गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। यहां सेप्टिक टैंक की सफाई करने उतरे चार प्रवासी श्रमिकों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और मौके पर पहुंची पुलिस व प्रशासन की टीम ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
बताया जा रहा है कि सफाई के दौरान टैंक के अंदर जहरीली गैस भर गई, जिसकी वजह से मजदूर बेहोश हो गए। उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। इस हादसे ने एक बार फिर बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के खतरों को उजागर कर दिया है।
सफाई के लिए टैंक में उतरे थे श्रमिक
जानकारी के अनुसार, गोपालगंज में कुछ प्रवासी श्रमिक सेप्टिक टैंक की सफाई के काम में लगे हुए थे। काम के दौरान एक-एक कर श्रमिक टैंक के अंदर उतरते गए।
जैसे ही वे अंदर पहुंचे, वहां मौजूद जहरीली गैस का असर होने लगा। गैस के कारण मजदूरों को सांस लेने में परेशानी हुई और वे बेहोश होकर टैंक के अंदर गिर गए।
घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत मदद की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी।
जहरीली गैस बनी मौत की वजह
प्रारंभिक जांच में हादसे की मुख्य वजह सेप्टिक टैंक के अंदर बनी जहरीली गैस को माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे टैंकों में लंबे समय तक बंद रहने के कारण जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं।
इन गैसों में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है और सांस लेने में दिक्कत पैदा हो सकती है। बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर जाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
बचाव की कोशिश हुई नाकाम
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन ने श्रमिकों को बाहर निकालने की कोशिश की। बचाव दल को भी मौके पर बुलाया गया।
कड़ी मशक्कत के बाद मजदूरों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
चारों श्रमिकों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में मातम छा गया। रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे स्थान पर काम करने गए मजदूरों की अचानक मौत से परिजन सदमे में हैं।
परिवार वालों ने प्रशासन से उचित मदद और मुआवजे की मांग की है।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि श्रमिकों को बिना सुरक्षा उपकरणों के सेप्टिक टैंक में क्यों उतारा गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि काम कराने वाले लोगों की ओर से सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हादसे
देश के कई हिस्सों में समय-समय पर सेप्टिक टैंक और सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस से मौत के मामले सामने आते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सीवर या टैंक में उतरने से पहले गैस की जांच, ऑक्सीजन की उपलब्धता और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी है।
लेकिन कई बार लापरवाही और जानकारी की कमी के कारण मजदूर अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी
सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मजदूरों को सुरक्षा किट, मास्क, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
प्रशासन भी समय-समय पर लोगों को ऐसे कामों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देता है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी बंद टैंक या सीवर में बिना जांच और सुरक्षा व्यवस्था के प्रवेश न करें।
अगर सफाई की जरूरत हो तो प्रशिक्षित कर्मचारियों और जरूरी उपकरणों की मदद लेनी चाहिए, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी संख्या में मजदूर रोजी-रोटी के लिए दूसरे शहरों और राज्यों में काम करने जाते हैं।
ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और काम देने वालों की जिम्मेदारी होती है।