मतदाता सूची पुनरीक्षण पर बोले सम्राट चौधरी पात्र वोटरों के नाम सुरक्षित
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से कराई गई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया तय नियमों और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना था। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे। इसके साथ ही दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए भी पूरी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी।सम्राट चौधरी ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी ओर से निर्धारित नियमों के तहत ही मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम किया गया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया के दौरान सभी आवश्यक कदम उठाए गए ताकि मतदाता सूची में सही जानकारी दर्ज हो सके।
मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया की समय-सीमा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बिहार में यह अभियान 24 जून 2025 से शुरू हुआ और 25 जुलाई 2025 तक चला। इस दौरान मतदाता सूची में शामिल नामों और विवरणों का सत्यापन किया गया।उन्होंने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोगों और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं से जुड़ी जानकारी की जांच की गई। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनाना था।सम्राट चौधरी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का सही होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर मतदाता सूची में सुधार और सत्यापन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
उन्होंने विपक्षी दलों की ओर से SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयोग ने सभी नियमों का पालन करते हुए काम किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने का अवसर दिया गया था। अगर किसी व्यक्ति को किसी जानकारी को लेकर आपत्ति थी तो उसके लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था भी रखी गई थी।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। सही मतदाता सूची के आधार पर ही निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकते हैं। इसलिए समय-समय पर सूची का सत्यापन आवश्यक होता है।
SIR प्रक्रिया को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमों के अनुसार बताया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि योग्य मतदाताओं को मतदान का अधिकार मिले और गलत या अपात्र नामों को हटाया जाए। उन्होंने कहा कि SIR प्रक्रिया इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए की गई।उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची में सुधार एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रक्रिया का मकसद चुनाव व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में SIR के दौरान अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों ने तय दिशा-निर्देशों के तहत काम किया। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया के हर चरण में नियमों का पालन किया गया।उन्होंने दोहराया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को मतदान के अधिकार से वंचित करना सरकार या चुनाव आयोग का उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दावे और आपत्तियों की व्यवस्था इसी वजह से रखी गई थी ताकि किसी भी वास्तविक मतदाता को परेशानी न हो।मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाता सूची में मृत लोगों, स्थान बदल चुके लोगों और डुप्लीकेट पंजीकरण की पहचान करना जरूरी है। इससे चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।कुल मिलाकर बिहार में SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चुनाव आयोग का बचाव किया है। उन्होंने विपक्षी दलों के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से पूरा किया गया।