SIR विवाद पर EC को घेरा दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की सफाई पर उठाए सवाल
पटना : वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच CPI(ML) लिबरेशन के जनरल सेक्रेटरी दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग (EC) की ओर से दी गई सफाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने रविवार को कहा कि SIR के शेड्यूल से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं है। उन्होंने आयोग की सफाई को अपनी गलती स्वीकार करने जैसा बताया।दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से दिए गए जवाब से वह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की सफाई में यह संकेत मिलता है कि फैसले लेने की प्रक्रिया में कुछ खामियां थीं। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए।
यह विवाद वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़ा है। SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच पहले से ही बहस चल रही है। इसी बीच एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें दावा किया गया कि SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद थे।रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ निर्णयों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि कुछ आदेश ऐसे जारी किए गए, जिनको लेकर संबंधित चुनाव आयुक्तों ने अपनी जानकारी और सहमति को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि, इस रिपोर्ट में किए गए दावों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट की गई।इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए CPI(ML) लिबरेशन के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की सफाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आयोग का जवाब किसी स्पष्टीकरण के बजाय गलती स्वीकार करने जैसा है।
उन्होंने कहा, "हम बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। यह एक कबूलनामा है... यह अपनी गलती मानना है। अपराध कबूल करना है, और इसके बाद उन्हें अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।" यह बयान दीपांकर भट्टाचार्य की ओर से दिया गया है।दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया से जुड़ी संस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।
SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना है। चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची में बदलाव और सत्यापन की प्रक्रिया करता है, ताकि सूची में योग्य मतदाताओं की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो सके।हालांकि, SIR को लेकर विपक्षी दलों और कुछ राजनीतिक संगठनों की ओर से आपत्तियां भी उठाई जा रही हैं। उनका कहना है कि ऐसी प्रक्रियाओं में मतदाताओं के अधिकार और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।वहीं चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया और इससे जुड़े फैसलों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है। आयोग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया नियमों और निर्धारित व्यवस्था के तहत संचालित होती है।CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव ने अपने बयान में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।इस पूरे विवाद की शुरुआत एक मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई, जिसमें SIR से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद होने का दावा किया गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में और अधिक स्पष्टता देनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि फैसले लेने की प्रक्रिया और उससे जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।उन्होंने चुनाव आयोग के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, चुनाव आयोग जैसी संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निष्पक्षता और पारदर्शिता जरूरी है।SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की सफाई और विपक्षी दलों के आरोपों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। जहां विपक्षी नेता प्रक्रिया और निर्णय लेने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को उचित बता रहा है।इस मामले में अभी भी अलग-अलग पक्षों की ओर से बयान सामने आ रहे हैं। दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की सफाई को स्वीकार नहीं किया और इसे गलती मानने जैसा बताया। वहीं चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया से जुड़े अपने पक्ष को स्पष्ट किया गया है।कुल मिलाकर SIR प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद में CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने आयोग की सफाई को अपनी गलती स्वीकार करना बताया और कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा गया है।