भागलपुर। विक्रमशिला सेतु की मरम्मत के साथ ही इसके पुनर्स्थापन कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सेतु के डेक स्लैब में सामने आई गड़बड़ियों को दूर करने का काम किया जा रहा है। स्लैब में मौजूद दरारों को विशेष तकनीक से ठीक किया जा रहा है, ताकि पानी अंदर प्रवेश न कर सके और सेतु के अंदर मौजूद लोहे को जंग लगने से बचाया जा सके। शनिवार को नोजल की मदद से तीन स्लैब की दरारों को भरने का काम किया गया।

सेतु के जिन हिस्सों में दरारें मिली हैं, वहां नोजल डालकर विशेष मैटेरियल और केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। अभियंताओं के अनुसार नोजल के माध्यम से मैटेरियल डालने के बाद मशीन की मदद से दरार को अच्छी तरह बंद कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य दरारों को पूरी तरह सील करना है, ताकि भविष्य में पानी अंदर नहीं पहुंच सके।

विक्रमशिला सेतु के डेक स्लैब में दरारें पाए जाने के बाद इन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जा रहा है। अभियंताओं के मुताबिक अगर दरार खुली रह जाती है तो बारिश या अन्य कारणों से पानी स्लैब के अंदर प्रवेश कर सकता है। पानी के संपर्क में आने से अंदर मौजूद लोहे में जंग लगने की आशंका बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने पर संरचना प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से पुनर्स्थापन कार्य के शुरुआती चरण में उन सभी स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां स्लैब में दरारें हैं। इसके बाद इन दरारों में केमिकल और अन्य जरूरी मैटेरियल डालकर उन्हें बंद किया जा रहा है। शनिवार को इसी प्रक्रिया के तहत तीन स्लैब की दरारों को भरा गया।

विशेषज्ञों की जांच में विक्रमशिला सेतु के अंदरूनी हिस्से में ‘एलीगेटर क्रैकिंग’ की स्थिति सामने आई है। इसके बाद सेतु की मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्य को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। जांच के आधार पर उन हिस्सों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां संरचनात्मक सतह पर दरारें दिखाई दे रही हैं।

सेतु की मरम्मत में इस्तेमाल की जा रही तकनीक के तहत पहले दरार वाले हिस्से को चिह्नित किया जाता है। इसके बाद दरारों में नोजल लगाया जाता है। नोजल के जरिए केमिकल या आवश्यक मैटेरियल अंदर तक पहुंचाया जाता है। सामग्री भरने के बाद मशीन की मदद से दरार को बंद किया जाता है। इससे दरार के भीतर खाली जगह को भरने और उसे सील करने में मदद मिलती है।

अभियंताओं का मुख्य ध्यान फिलहाल डेक स्लैब की गड़बड़ियों को दूर करने पर है। सेतु के स्लैब में जहां भी दरारें मिली हैं, वहां चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मौजूदा क्षति को आगे बढ़ने से रोकना और सेतु की संरचना को सुरक्षित बनाए रखना है।

विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत के साथ पुनर्स्थापन का काम शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सेतु पर लगातार वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में इसकी संरचना के अलग-अलग हिस्सों की स्थिति की जांच और जरूरत के अनुसार मरम्मत जरूरी है। विशेषज्ञों की जांच में मिली कमियों के आधार पर अब सुधार कार्य किया जा रहा है।

डेक स्लैब किसी भी सेतु का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। वाहनों का भार इसी हिस्से से होकर संरचना के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है। इसलिए स्लैब में मौजूद दरारों को समय रहते ठीक करना जरूरी माना जाता है। विक्रमशिला सेतु पर इसी को ध्यान में रखते हुए दरारों की मरम्मत शुरू की गई है।

अभियंताओं के अनुसार दरारों को खुला छोड़ना भविष्य में समस्या बढ़ा सकता है। पानी अंदर जाने पर लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे लोहे की मजबूती प्रभावित होने का खतरा रहता है। यही कारण है कि दरारों को केमिकल से भरकर पानी के प्रवेश को रोकने की कोशिश की जा रही है।

शनिवार को तीन स्लैब की दरारों में नोजल डालकर मरम्मत की गई। नोजल के जरिए मैटेरियल अंदर डालने के बाद मशीन से इसे अच्छी तरह बंद किया गया। इसी तकनीक का इस्तेमाल आगे अन्य प्रभावित स्लैब पर भी किया जाएगा। जहां-जहां दरारें चिह्नित की गई हैं, वहां मरम्मत का काम किया जाना है।

विशेषज्ञों की जांच में सामने आई एलीगेटर क्रैकिंग के आधार पर सेतु के अंदरूनी हिस्सों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जांच में मिली स्थिति के अनुसार मरम्मत की योजना तैयार की गई है। इसके तहत पहले दरारों को भरने और स्लैब की गड़बड़ियों को दूर करने का काम किया जा रहा है।

सेतु की मरम्मत और पुनर्स्थापन का उद्देश्य मौजूदा समस्याओं को ठीक करने के साथ आगे होने वाली क्षति को रोकना भी है। पानी का प्रवेश रोकना इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए विशेष केमिकल और मशीनों की मदद ली जा रही है।

विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। पहले डेक स्लैब की दरारों को ठीक किया जा रहा है। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार अन्य हिस्सों पर भी काम किया जाएगा। फिलहाल अभियंताओं और विशेषज्ञों की निगरानी में स्लैब की दरारों को भरने का कार्य चल रहा है।

शनिवार को तीन स्लैब पर काम पूरा होने के बाद आगे अन्य चिह्नित स्थानों की दरारों को ठीक किया जाएगा। सेतु के अंदर पानी पहुंचने और लोहे में जंग लगने की संभावना को कम करने के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मरम्मत के साथ शुरू हुआ पुनर्स्थापन कार्य विक्रमशिला सेतु की संरचना को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में अहम कदम है।

Tags: