बक्सर: बिहार के बक्सर जिले में पुलिस और मंदिर के बीच एक अनोखा रिश्ता देखने को मिलता है, जो करीब एक सदी से चली आ रही परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है। यहां थानेदार का पद संभालने वाला हर नया अधिकारी सबसे पहले मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना करता है। यह परंपरा साल 1920-21 के दौर से चली आ रही बताई जाती है और आज भी इसका पालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बक्सर के एक प्राचीन मंदिर से जुड़ी यह मान्यता है कि थानेदार की नई जिम्मेदारी संभालने से पहले भगवान का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। इसी विश्वास के चलते पुलिस अधिकारी पदभार ग्रहण करने के बाद मंदिर पहुंचते हैं और क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।
अंग्रेजों के समय से चली आ रही परंपरा
बताया जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के समय हुई थी। वर्ष 1920-21 के आसपास तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने मंदिर में पूजा कर अपनी सेवा की शुरुआत की थी। इसके बाद यह एक परंपरा बन गई और आने वाले थानेदार भी इसे निभाते चले गए। हालांकि इस परंपरा से जुड़ी कई बातें स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं, लेकिन क्षेत्र के लोगों के बीच इसका विशेष महत्व है।
मंदिर में पहुंचकर लेते हैं आशीर्वाद
जब भी किसी नए थानेदार की तैनाती होती है, तो वह मंदिर जाकर पूजा करता है। इस दौरान वह क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने और जनता की सेवा करने का संकल्प लेता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास का प्रतीक भी है।
लोगों की आस्था से जुड़ा है मंदिर
बक्सर के इस मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर में पूजा करने से अधिकारी को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और वह अपने कर्तव्यों को बेहतर तरीके से निभा पाता है। यही वजह है कि वर्षों बाद भी नई पीढ़ी के पुलिस अधिकारी इस परंपरा को सम्मान के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
पुलिस और जनता के रिश्ते का प्रतीक
किसी भी क्षेत्र में पुलिस की भूमिका केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं होती, बल्कि जनता के साथ विश्वास और सहयोग का रिश्ता बनाना भी जरूरी होता है। बक्सर की यह परंपरा इसी भावना को दर्शाती है। आज के आधुनिक दौर में भी जब कई पुरानी परंपराएं खत्म हो रही हैं, तब बक्सर में करीब 100 साल पुरानी यह परंपरा लोगों के लिए आकर्षण और आस्था का केंद्र बनी हुई है।
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