पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई के तहत बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बी-बोस) के उप निदेशक अजय कुमार सिंह के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। गुरुवार को हुई इस कार्रवाई में पटना और बेगूसराय स्थित उनके परिसरों के साथ बी-बोस के मीठापुर स्थित सरकारी कार्यालय की भी तलाशी ली गई। EOU की अलग-अलग टीमों ने एक साथ कार्रवाई करते हुए नकदी, जेवरात, निवेश और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की।

  EOU के अनुसार, अजय कुमार सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में उनके पास 3 करोड़ 34 लाख 78 हजार 300 रुपये की आय से अधिक संपत्ति होने के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह राशि उनकी ज्ञात आय की तुलना में करीब 90.04 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इसी आधार पर आर्थिक अपराध इकाई ने उनके खिलाफ मामला दर्ज कर तलाशी की कार्रवाई शुरू की।

 छापेमारी के दौरान अधिकारियों को अलग-अलग ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी, जेवरात और जमीन-मकान समेत अन्य संपत्तियों से जुड़े कागजात मिलने की बात सामने आई है। बेगूसराय स्थित पैतृक आवास से नोटों की गड्डियां बरामद होने की जानकारी है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां 500 रुपये के नोटों की गड्डियों के अलावा 5 रुपये के नोटों की भी कई गड्डियां मिलीं। बरामद नकदी और दस्तावेजों का मिलान जांच एजेंसी अजय कुमार सिंह की घोषित आय और संपत्ति से कर रही है।

 EOU की टीम ने पटना में चंद्रतारा भवन, बीबी कॉवेज, आकाशवाणी रोड और खाजपुरा स्थित परिसरों की तलाशी ली। इसके अलावा बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के मीठापुर कार्यालय में भी जांच की गई। बेगूसराय जिले में साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के परोरा गांव स्थित उनके पैतृक आवास को भी तलाशी के दायरे में रखा गया। कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी किए जाने से कार्रवाई का दायरा काफी व्यापक रहा।

 जांच एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और संपत्ति के कागजात के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि अजय कुमार सिंह और उनके परिवार के नाम पर कितनी चल-अचल संपत्ति है। जमीन, मकान, बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि घोषित आय के मुकाबले वास्तविक संपत्ति कितनी है और संपत्तियों की खरीद के लिए धन का स्रोत क्या रहा है।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में जांच एजेंसी आम तौर पर अधिकारी की सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वैध आय, वेतन, निवेश, पारिवारिक आय और संपत्ति के घोषित विवरण का आकलन करती है। इसके बाद इन तमाम स्रोतों की तुलना अधिकारी और उसके परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों से की जाती है। अजय कुमार सिंह के मामले में भी EOU इसी प्रक्रिया के तहत मिले दस्तावेजों और नकदी का सत्यापन कर रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अजय कुमार सिंह वर्ष 2005 से सरकारी सेवा में हैं। हाल के वर्षों में उन्हें बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड में उप निदेशक के पद पर तैनात किया गया था। इससे पहले वे शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा पदाधिकारी के पद पर भी कार्यरत रहे हैं। 2025 में मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी अजय कुमार सिंह का तबादला पटना में बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड में किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

 EOU की छापेमारी के बाद शिक्षा विभाग और बी-बोस से जुड़े अधिकारियों के बीच भी हलचल तेज हो गई है। हालांकि, तलाशी के दौरान बरामद संपत्ति को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। अभी बरामद नकदी, जेवर और संपत्ति के दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जा रहा है। किसी भी संपत्ति को अवैध या आय से अधिक मानने के लिए जांच एजेंसी को उसके स्रोत और अधिकारी की वैध आय के बीच अंतर का विधिवत आकलन करना होगा।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बिहार में आर्थिक अपराध इकाई की ओर से आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। अजय कुमार सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में सामने आई करीब 3.35 करोड़ रुपये की कथित आय से अधिक संपत्ति ने सरकारी तंत्र में भी सवाल खड़े किए हैं। अब जांच का अगला चरण बरामद दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, निवेश और संपत्तियों के स्वामित्व की पड़ताल पर केंद्रित रहेगा।

  फिलहाल EOU की जांच जारी है। छापेमारी के दौरान मिली संपत्ति और नकदी का विस्तृत मूल्यांकन तथा दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी संपत्ति का हिसाब संदिग्ध पाया जाता है। मामले में आगे और संपत्तियों या वित्तीय लेन-देन के खुलासे की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

 

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