वाराणसी। सांसद आदर्श गांव नागेपुर में शनिवार को बिहार प्रांत के करीब 100 ग्रामप्रधानों का दल पहुंचा। बक्सर, भोजपुर और रोहतास जिलों के विभिन्न ब्लॉकों से आए ग्रामप्रधानों ने गांव में कराए गए विकास कार्यों और ग्रामीण सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने गांव के पंचायत सचिवालय, नंदघर, प्राथमिक विद्यालय, डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क, मुख्य प्रवेश द्वार, लोक समिति आश्रम और पीएनबी कृषक केंद्र समेत कई स्थानों का भ्रमण किया।
ग्रामप्रधानों का यह दौरा ग्रामीण विकास के विभिन्न मॉडल को समझने और अपने-अपने क्षेत्रों में उन्हें लागू करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गांव पहुंचने पर लोक समिति आश्रम में स्थानीय प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दल का स्वागत किया।
माल्यार्पण और अंगवस्त्र से हुआ स्वागत
बिहार से आए ग्रामप्रधानों का लोक समिति आश्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, ग्रामप्रधान मुकेश कुमार और लोक समिति के नंदलाल मास्टर ने स्वागत किया। अतिथियों को माल्यार्पण करने के साथ अंगवस्त्र प्रदान किया गया।
स्वागत के दौरान ग्रामप्रधानों और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच ग्रामीण विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। बिहार से आए जनप्रतिनिधियों ने नागेपुर में विभिन्न योजनाओं के तहत किए गए कार्यों की जानकारी ली और गांव के विकास मॉडल को समझने में रुचि दिखाई।
तीन वाहनों से पहुंचा ग्रामप्रधानों का दल
बिहार प्रांत के बक्सर, भोजपुर और रोहतास जिलों के विभिन्न ब्लॉकों से आए ग्रामप्रधान तीन वाहनों में सवार होकर नागेपुर पहुंचे। करीब 100 ग्रामप्रधानों के एक साथ गांव में पहुंचने से स्थानीय स्तर पर भी उत्साह का माहौल रहा।
दल में शामिल ग्रामप्रधानों ने गांव में मौजूद विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों और विकास कार्यों को देखा। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किन योजनाओं और संसाधनों का इस्तेमाल किया गया है।
पंचायत सचिवालय का किया अवलोकन
भ्रमण के दौरान ग्रामप्रधानों ने सबसे पहले पंचायत सचिवालय की व्यवस्थाओं को देखा। पंचायत स्तर पर प्रशासनिक कामकाज और ग्रामीणों से जुड़े कार्यों के संचालन को लेकर उन्होंने जानकारी प्राप्त की।
ग्रामप्रधानों ने इस बात को समझने की कोशिश की कि पंचायत सचिवालय के माध्यम से ग्रामीणों को किस प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों की प्रक्रिया को लेकर भी जानकारी ली गई।
नंदघर और विद्यालय की व्यवस्था देखी
दल ने गांव के नंदघर का भी निरीक्षण किया। यहां उपलब्ध सुविधाओं और बच्चों के लिए की गई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी हासिल की गई। इसके बाद ग्रामप्रधानों ने प्राथमिक विद्यालय का भ्रमण किया।
विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था, भवन और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का अवलोकन किया गया। ग्रामप्रधानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को समझने में रुचि दिखाई।
डॉ. आंबेडकर पार्क और मुख्य गेट भी देखा
ग्रामप्रधानों ने गांव में स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क का भी भ्रमण किया। पार्क की व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान के रूप में उसके उपयोग को लेकर जानकारी ली गई।
इसके अलावा दल ने गांव के मुख्य गेट का भी अवलोकन किया। गांव में सार्वजनिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के कार्यों को देखकर ग्रामप्रधानों ने अपने क्षेत्रों में भी इसी तरह की पहल करने की संभावनाओं पर चर्चा की।
लोक समिति आश्रम और कृषक केंद्र पहुंचे
भ्रमण के दौरान ग्रामप्रधान लोक समिति आश्रम भी पहुंचे। आश्रम की गतिविधियों और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों के बारे में उन्हें जानकारी दी गई।
इसके बाद दल ने पीएनबी कृषक केंद्र का निरीक्षण किया। किसानों से जुड़ी सुविधाओं और कृषि क्षेत्र में सहायता के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी ग्रामप्रधानों ने ली। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कृषि की भूमिका को देखते हुए कृषक केंद्र का भ्रमण दल के लिए महत्वपूर्ण रहा।
अनुभवों को अपने गांवों में लागू करने की कोशिश
बिहार से आए ग्रामप्रधानों के इस दौरे का उद्देश्य केवल विकास कार्यों का निरीक्षण करना नहीं, बल्कि दूसरे गांवों में अपनाए जा सकने वाले बेहतर प्रयासों को समझना भी रहा। ग्रामप्रधानों ने विभिन्न स्थानों का अवलोकन करते हुए वहां की व्यवस्थाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अलग-अलग राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान विकास कार्यों को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो सकता है।
ग्रामीण विकास के मॉडल को समझने का अवसर
नागेपुर को सांसद आदर्श गांव के रूप में विकसित किए जाने के बाद यहां विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य कराए गए हैं। पंचायत व्यवस्था, शिक्षा, बाल विकास, सार्वजनिक सुविधाओं और कृषि से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखने के लिए समय-समय पर दूसरे क्षेत्रों के प्रतिनिधि यहां पहुंचते रहे हैं।
बिहार के 100 ग्रामप्रधानों के दौरे को भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामप्रधानों ने गांव में हुए कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया और कई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी हासिल की।
बिहार से आए ग्रामप्रधानों का नागेपुर दौरा ग्रामीण विकास के अनुभवों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। बक्सर, भोजपुर और रोहतास के जनप्रतिनिधियों ने गांव की विभिन्न व्यवस्थाओं को करीब से देखा और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए अपनाए गए तरीकों की जानकारी ली। इससे दोनों राज्यों के पंचायत प्रतिनिधियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।