Guwahati गुवाहाटी: कांग्रेस नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष देबाब्रत सायिकिया ने असम विधानसभा में हाल ही में पारित बहुविवाह निषेध विधेयक को लेकर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लागू करना जरूरी नहीं था, और इसे राजनीतिक रूप से ध्रुवीकरण (polarization) के तौर पर देखा जा रहा है। सायिकिया ने आईएएनएस से बातचीत में स्पष्ट किया, "यह अनिवार्य नहीं है। यदि आप राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों को देखें, तो यह कहना गलत है कि बहुविवाह केवल इस्लाम धर्म के लोगों में होता है। असल में, राज्य में क्रिश्चियन या आदिवासी समुदायों में बहुविवाह के मामलों की संख्या अधिक है।"
उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। "मुख्यमंत्री इस मुद्दे के जरिए लोगों को धर्म और समुदाय के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष के तौर पर हम केवल विरोध कर सकते हैं। विधेयक पारित हो चुका है, अब इसे रोका नहीं जा सकता। देबाब्रत सायिकिया ने यह भी बताया कि यह बिल समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, "संवैधानिक रूप से समान नागरिक संहिता केवल तभी लागू हो सकती है जब पूरी जनता तैयार हो। असम में अभी ऐसा नहीं है। विधेयक तो पारित हो गया है, लेकिन इसे समान नागरिक संहिता की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।"
कांग्रेस नेता ने समाज में बहुविवाह के प्रचलन और उसके प्रभावों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून बनाना और लागू करना अलग बात है, लेकिन सबसे जरूरी है समाज को जागरूक करना और लोगों की सहभागिता से सुधार लाना। उनके अनुसार, बहुविवाह निषेध विधेयक केवल कानूनी दृष्टि से सख्ती लाता है, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसे सफल बनाने के लिए व्यापक शिक्षा और जागरूकता अभियान की आवश्यकता होगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि असम सरकार को चाहिए कि वह सभी समुदायों के साथ संवाद स्थापित करे और किसी विशेष समुदाय के खिलाफ कानून का गलत संदेश न जाए। "हमारा विरोध यह दर्शाता है कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले समुदायों के हितों और संवेदनाओं का ध्यान रखना आवश्यक है।"
सायिकिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम में बहुविवाह निषेध विधेयक पर व्यापक चर्चा हो रही है। राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा इसके समर्थन और विरोध दोनों स्वर सुने जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार, विपक्ष का उद्देश्य केवल संतुलन बनाए रखना और समाज में किसी तरह की गलत ध्रुवीकरण प्रक्रिया को रोकना है। इस प्रकार, असम में बहुविवाह पर नए कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है, और विपक्ष इसे केवल नैतिक और संवैधानिक दृष्टि से चुनौती के रूप में देख रहा है।