लाइफ स्टाइल। भारतीय घरों में दही का इस्तेमाल लगभग हर मौसम में किया जाता है। गर्मियों में ठंडी लस्सी और रायता बनाने से लेकर सर्दियों में पराठों के साथ खाने तक, दही हमारी रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। घर का बना दही स्वाद, ताजगी और शुद्धता के लिहाज से काफी पसंद किया जाता है। लेकिन कई बार घर में दही जमाते समय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी दही बहुत पतला रह जाता है, तो कभी उसमें जरूरत से ज्यादा पानी निकल आता है। कई बार पूरी रात रखने के बावजूद दूध ठीक से जमता ही नहीं है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो कुछ आसान घरेलू तरीकों की मदद से आप गाढ़ा, मलाईदार और स्वादिष्ट दही तैयार कर सकते हैं।
दरअसल, दही जमाना जितना आसान दिखाई देता है, उतना ही इसमें कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। दूध का तापमान, जामन की गुणवत्ता, बर्तन का चुनाव और दही जमाने की जगह इसके स्वाद और गाढ़ेपन को प्रभावित करते हैं। अगर इन बातों का सही तरीके से ध्यान रखा जाए, तो घर में भी अच्छी बनावट वाला दही तैयार किया जा सकता है।
दही जमाने के लिए दूध का सही चुनाव करें
अगर आप चाहते हैं कि घर में जमा दही गाढ़ा और मलाईदार बने, तो सबसे पहले दूध की गुणवत्ता पर ध्यान दें। अधिक वसा और दूध के ठोस पदार्थों वाला दूध आमतौर पर ज्यादा गाढ़ा दही बनाने में मदद करता है। फुल क्रीम दूध से बना दही अक्सर टोंड या स्किम्ड दूध से बने दही की तुलना में ज्यादा क्रीमी होता है।
दही जमाने से पहले दूध को अच्छी तरह गर्म करना भी जरूरी है। बेहतर बनावट के लिए दूध को लगभग 82 से 85 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकता है। इससे दूध के प्रोटीन में बदलाव होता है, जो दही को अच्छी तरह जमने और पानी अलग होने की समस्या कम करने में मदद करता है। इसके बाद दूध को जामन मिलाने योग्य तापमान तक ठंडा करना चाहिए।
दूध का तापमान सही होना बेहद जरूरी
घर में दही ठीक से नहीं जमने की सबसे बड़ी वजहों में से एक दूध का गलत तापमान है। बहुत गर्म दूध में जामन डालने से उसमें मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं। वहीं, बहुत ठंडे दूध में बैक्टीरिया की गतिविधि धीमी हो जाती है, जिससे दही जमने में अधिक समय लग सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जामन मिलाते समय दूध का तापमान लगभग 42 से 43 डिग्री सेल्सियस होना उपयुक्त है। किचन थर्मामीटर से इसे आसानी से जांचा जा सकता है। यदि दूध का तापमान सही रहेगा, तो दही अच्छी तरह जमने की संभावना बढ़ जाती है।
दही जमाने के लिए ताजा जामन इस्तेमाल करें
कई बार लोग कई दिनों पुराने दही को ही जामन के रूप में इस्तेमाल करते रहते हैं। अगर जामन में सक्रिय बैक्टीरिया की मात्रा कम हो गई है, तो नया दही ठीक से नहीं जमेगा। इसलिए ताजा, सादा और सक्रिय कल्चर वाला दही इस्तेमाल करना बेहतर होता है।
एक लीटर दूध के लिए लगभग दो बड़े चम्मच ताजा दही शुरुआती मात्रा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, जामन की वास्तविक मात्रा उसके कल्चर और दही जमाने के तापमान पर निर्भर करती है। जामन को पहले थोड़े से गुनगुने दूध में अच्छी तरह मिलाएं और फिर बाकी दूध में डालें। इससे जामन पूरे दूध में समान रूप से फैल जाएगा।
मिट्टी या स्टील के बर्तन में जमाएं दही
दही जमाने के लिए साफ बर्तन का चुनाव करना जरूरी है। कई घरों में मिट्टी के बर्तन में दही जमाने की परंपरा है। बिना चमकदार परत वाले उपयुक्त खाद्य-सुरक्षित मिट्टी के बर्तन कुछ अतिरिक्त नमी सोख सकते हैं, जिससे दही की बनावट गाढ़ी महसूस हो सकती है। हालांकि, अच्छी तरह साफ किए गए स्टील या कांच के बर्तन में भी बेहतरीन दही जमाया जा सकता है।
बर्तन पूरी तरह साफ होना चाहिए। उसमें साबुन या डिटर्जेंट का अवशेष नहीं रहना चाहिए। जामन डालने के बाद बर्तन को ढककर ऐसी जगह रखें, जहां उसका तापमान स्थिर बना रहे।
दही जमाते समय बार-बार बर्तन न हिलाएं
दही जमाने के दौरान लोग अक्सर यह देखने के लिए बार-बार ढक्कन खोलते हैं कि दही जमा है या नहीं। ऐसा करने से दही की बनावट प्रभावित हो सकती है। बर्तन को बार-बार हिलाने से भी दही के अंदर बन रही संरचना टूट सकती है और पानी अलग होने लगता है।
दही जमने के दौरान बर्तन को एक ही स्थान पर स्थिर रखना चाहिए। लगभग 43 डिग्री सेल्सियस के नियंत्रित तापमान पर सामान्यतः छह से दस घंटे में दही जम सकता है। तापमान और जामन के अनुसार समय कम या अधिक हो सकता है।
सर्दियों में दही जमाने का आसान तरीका
सर्दियों में कम तापमान के कारण दही जमने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। ऐसे में दूध में जामन मिलाने के बाद बर्तन को किसी इंसुलेटेड कंटेनर या दही जमाने वाली मशीन में रखा जा सकता है। इससे तापमान लंबे समय तक स्थिर रखने में मदद मिलती है।
ध्यान रखें कि दही को सीधे अत्यधिक गर्म स्थान पर नहीं रखना चाहिए। जरूरत से ज्यादा गर्मी जामन के बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकती है। बेहतर परिणाम के लिए दही जमाने वाली मशीन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
दही में पानी क्यों निकलने लगता है?
कई बार दही अच्छी तरह जम जाता है, लेकिन कुछ देर बाद उसके ऊपर पानी दिखाई देने लगता है। इसे व्हे यानी मट्ठा कहा जाता है। थोड़ी मात्रा में मट्ठा अलग होना सामान्य है। हालांकि, जरूरत से ज्यादा पानी निकलने का कारण दही को बहुत देर तक गर्म स्थान पर रखना, बर्तन को हिलाना या दूध को पर्याप्त गर्म नहीं करना हो सकता है।
जैसे ही दही ठीक से जम जाए, उसे रेफ्रिजरेटर में रख देना चाहिए। इससे खट्टापन बढ़ने की प्रक्रिया धीमी होती है और दही की बनावट बेहतर बनी रहती है। यदि बहुत अधिक गाढ़ा दही चाहिए, तो जमे हुए दही को साफ मलमल के कपड़े में रखकर कुछ मट्ठा अलग किया जा सकता है।
इन गलतियों से जरूर बचें
दही जमाते समय खराब या बहुत पुराना जामन इस्तेमाल न करें। अत्यधिक गर्म दूध में जामन डालने और दही को जरूरत से ज्यादा देर तक बाहर रखने से भी बचें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। यदि दही में फफूंदी दिखाई दे, असामान्य गंध आए या पर्याप्त समय तक सही तापमान पर रखने के बावजूद दही न जमे, तो उसे खाने के बजाय फेंक देना सुरक्षित है।
इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर घर में गाढ़ा, ताजा और स्वादिष्ट दही बनाया जा सकता है। सही तापमान, अच्छा जामन और थोड़े धैर्य से आपको हर बार बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।