Lifestyle,लाइफस्टाइल : कई बार लोग अपने शरीर पर अचानक नीले या हल्के बैंगनी रंग के निशान देखकर हैरान रह जाते हैं, जबकि उन्हें कोई चोट या दुर्घटना नहीं हुई होती। ऐसे निशान को “स्पॉन्टेनियस ब्रुइसिंग” कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये निशान किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं और कभी-कभी ये सामान्य कारणों से भी बन जाते हैं।
डॉ. रिया शर्मा, हेमेटोलॉजिस्ट, बताती हैं कि शरीर पर बिना चोट के नीले निशान पड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम वजह ब्लड प्लेटलेट्स या कोलेजन में कमी होती है। ब्लड प्लेटलेट्स खून को जमाने का काम करती हैं। जब इनकी संख्या कम होती है, तो हल्की खरोंच या दबाव से भी त्वचा पर निशान पड़ सकते हैं। इसी तरह, कोलेजन की कमी त्वचा को कमजोर बनाती है, जिससे छोटे रक्त वाहिकाएँ टूट जाती हैं और नीले निशान बन जाते हैं।
एक अन्य सामान्य कारण है विटामिन की कमी, खासकर विटामिन C और विटामिन K। ये विटामिन रक्त वाहिकाओं को मजबूत रखते हैं। इनके अभाव में त्वचा आसानी से चोट खा सकती है और निशान दिख सकते हैं। इसके अलावा, मधुमेह, थायरॉइड या लिवर से जुड़ी बीमारियाँ भी इस समस्या का कारण बन सकती हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि कुछ दवाइयाँ जैसे ब्लड थिनर्स या स्टेरॉइड्स भी शरीर पर बिना चोट के ब्रुइज़िंग बढ़ा सकते हैं। इस वजह से, अगर कोई व्यक्ति लगातार बिना कारण के नीले निशान देख रहा है, तो उसे डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। शुरुआती जांच में ब्लड टेस्ट और विटामिन स्तर की जांच की जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादातर हल्के निशान किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं होते। रोज़मर्रा की गतिविधियों, कसरत, या हल्का दबाव भी शरीर पर नीले निशान बना सकता है। लेकिन अगर निशान अचानक बढ़ जाएँ, बहुत बड़े हों या अन्य लक्षण जैसे थकान, बुखार या मस्से की तरह उभरें, तो तुरंत मेडिकल सलाह लेना जरूरी है।
नीले निशानों से बचाव के लिए कुछ आसान उपाय भी बताए गए हैं। पर्याप्त विटामिन C और K युक्त आहार, जैसे हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, संतरे, केला और ब्रोकली, सेवन करने चाहिए। साथ ही, हल्की चोट से बचने के लिए कसरत या रोज़मर्रा की गतिविधियों में सतर्कता जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीले निशान को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। हल्की समस्या को समय रहते पहचानकर सही कदम उठाने से गंभीर रोगों से बचा जा सकता है। इसलिए, शरीर पर अचानक या बार-बार होने वाले नीले निशानों को नजरअंदाज न करें और स्वास्थ्य जांच कराना ज़रूरी है।