40 साल तक कहां गायब रही टुटू लंदन में खुला बड़ा राज
लंदन के घर में मिली दशकों से लापता टुटू पेंटिंग
नाइजीरिया की मशहूर पेंटिंग ‘टुटू’ (Tutu) की कहानी किसी रहस्य से कम नहीं है। प्रसिद्ध नाइजीरियाई कलाकार बेन एनवोनवू की बनाई यह पेंटिंग दशकों तक दुनिया की नजरों से गायब रही। करीब 40 साल तक इसका पता नहीं चला और फिर अचानक यह लंदन के एक घर में मिली। इसकी दोबारा खोज ने कला जगत में हलचल मचा दी और ‘टुटू’ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई।
‘टुटू’ को नाइजीरिया की सबसे चर्चित कलाकृतियों में गिना जाता है। बेन एनवोनवू ने 1970 के दशक में नाइजीरियाई राजकुमारी अडेटुटू एडेमिलुई का चित्र बनाया था। इसी नाम से पेंटिंग को बाद में ‘टुटू’ के नाम से प्रसिद्धि मिली। समय के साथ इस कलाकृति का सांस्कृतिक महत्व इतना बढ़ा कि इसे अक्सर ‘अफ्रीकी मोनालिसा’ कहा जाने लगा।
इस पेंटिंग की कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब यह लंबे समय के लिए गायब हो गई। दशकों तक कला विशेषज्ञों और आम लोगों को इसकी वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं थी। माना जाने लगा था कि मूल पेंटिंग शायद हमेशा के लिए खो चुकी है।
करीब चार दशक बाद कहानी अचानक बदल गई। लंदन के एक घर में यह पेंटिंग मिली। रिपोर्टों के अनुसार घर के मालिकों ने एक कला विशेषज्ञ से संपर्क किया, जिसके बाद इसकी पहचान बेन एनवोनवू की ‘टुटू’ के रूप में हुई। इतने लंबे समय से लापता चर्चित कलाकृति का एक निजी घर से सामने आना कला जगत के लिए बड़ी खबर बन गया।
इसके बाद पेंटिंग को नीलामी के लिए पेश किया गया। 2018 में लंदन में बोनहम्स की नीलामी में ‘टुटू’ लगभग £1.2 मिलियन में बिकी थी। उस समय इसकी बिक्री ने अनुमान से कहीं अधिक कीमत हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।
‘टुटू’ की अहमियत केवल उसकी नीलामी कीमत तक सीमित नहीं है। इसे आधुनिक नाइजीरियाई कला और देश की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखा जाता है। पेंटिंग में चित्रित महिला और कलाकार की शैली ने इसे अफ्रीकी कला इतिहास में खास स्थान दिलाया।
हालांकि ‘टुटू’ से संबंधित एक से अधिक चित्र बनाए जाने की जानकारी भी कला इतिहास में मिलती है। इसलिए किसी भी तस्वीर या पेंटिंग को मूल ‘टुटू’ बताते समय उसके संस्करण और प्रमाणिकता का उल्लेख महत्वपूर्ण है।
चार दशक की गुमनामी, लंदन के एक घर में अचानक खोज और फिर लाखों पाउंड की नीलामी—‘टुटू’ की कहानी बताती है कि कभी-कभी ऐतिहासिक कलाकृतियां वर्षों तक आम नजरों से दूर रहने के बाद अचानक दुनिया के सामने लौट आती हैं।