लाइफ स्टाइल : हरतालिका तीजहिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के प्रमुख व्रतों में से एक माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। कई स्थानों पर अविवाहित युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज में दिनभर व्रत रखने के साथ रात्रि जागरण की भी परंपरा है। ऐसे में सवाल उठता है कि थकान और भूख-प्यास के बीच पूरी रात जागकर पूजा-पाठ कैसे किया जाए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज की रात भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना, भजन-कीर्तन और कथा सुनते हुए बिताना शुभ माना जाता है। हालांकि निर्जला या कठिन व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। केवल जागते रहने के लिए शरीर को जरूरत से ज्यादा थकाना उचित नहीं है।
हरतालिका तीज पर क्यों किया जाता है रात्रि जागरण?
पौराणिक मान्यताओं में हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती की भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए की गई कठोर तपस्या से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने पूरी निष्ठा से भगवान शिव की आराधना की थी और बाद में भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी कारण हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कई परिवारों और क्षेत्रों में दिन की पूजा के साथ रात में जागरण करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
रात के समय महिलाएं एक साथ बैठकर शिव-पार्वती की कथा सुनती हैं, भजन गाती हैं और अलग-अलग प्रहर में पूजा करती हैं। सामूहिक रूप से धार्मिक गतिविधियां करने से जागरण भी आसान हो जाता है।
पहला काम: भजन-कीर्तन में बिताएं रात
अगर हरतालिका तीज की रात जागना है तो भजन-कीर्तन सबसे पारंपरिक तरीकों में से एक है। परिवार या आसपास की व्रती महिलाएं एक जगह एकत्र होकर भगवान शिव और माता पार्वती के भजन गा सकती हैं।
शिव भजन, माता पार्वती के मंगल गीत और धार्मिक कीर्तन के कारण मन पूजा में लगा रहता है। सामूहिक रूप से भजन करने से नींद भी अपेक्षाकृत कम महसूस हो सकती है।
इसके लिए पहले से भजनों की सूची तैयार की जा सकती है। घर में छोटा सा पूजा स्थल सजाकर महिलाएं बारी-बारी से भजन और आरती कर सकती हैं। डमरू या मंजीरे जैसे सामान्य वाद्ययंत्र उपलब्ध हों तो उनका इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
इस दौरान तेज आवाज से आसपास के लोगों को परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखना चाहिए।
दूसरा काम: हर प्रहर करें शिव-पार्वती की पूजा
रात्रि जागरण को केवल जागते रहने की चुनौती बनाने के बजाय उसे पूजा के अलग-अलग चरणों में बांटा जा सकता है। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं रात में अलग-अलग प्रहर में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।
पूजा के लिए शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा के सामने दीपक जलाया जा सकता है। फूल और पूजा की अन्य सामग्री अर्पित करके आरती की जा सकती है। पूजा सामग्री और विधि स्थानीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
हर कुछ समय बाद पूजा या आरती करने से लंबे जागरण को छोटे हिस्सों में बांटने में मदद मिलती है। इससे लगातार एक जगह शांत बैठे रहने के कारण आने वाली नींद भी कम हो सकती है।
महिलाएं महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप भी कर सकती हैं। मंत्र जप मन को पूजा में केंद्रित रखने का सरल तरीका माना जाता है।
तीसरा काम: सुनें हरतालिका तीज की कथा
हरतालिका तीज की रात जागरण के दौरान व्रत कथा सुनना या पढ़ना भी अच्छा तरीका है। समूह में बैठकर एक महिला कथा पढ़ सकती है और बाकी महिलाएं उसे सुन सकती हैं।
इसके अलावा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी धार्मिक कथाओं का पाठ किया जा सकता है। कथा समाप्त होने के बाद आरती और मंत्र जाप किया जा सकता है।
अगर कई महिलाएं एक साथ जागरण कर रही हैं तो सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी जा सकती है। कोई पूजा की तैयारी करे, कोई कथा पढ़े और कोई भजन कराए। इससे पूरी रात गतिविधियां बनी रहती हैं और जागरण बोझ जैसा महसूस नहीं होता।
पूजा स्थल को पहले से करें तैयार
हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए दिन पहले से ही काफी व्यस्त हो सकता है। ऐसे में रात के जागरण से पहले पूजा का सामान व्यवस्थित कर लेना सुविधाजनक रहता है।
फूल, दीपक, पूजा की थाली, शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र और कथा की पुस्तक जैसी जरूरी चीजें एक स्थान पर रखी जा सकती हैं। इससे रात में बार-बार सामान तलाशने की जरूरत नहीं होगी।
अगर सामूहिक जागरण किया जा रहा है तो पहले ही तय किया जा सकता है कि भजन कब होंगे, कथा कब पढ़ी जाएगी और पूजा किस समय की जाएगी।
नींद आए तो थोड़ी देर चलें
पूरी रात एक ही जगह बैठे रहने से नींद जल्दी आ सकती है। इसलिए पूजा के बीच कुछ समय के लिए उठकर सामान्य रूप से टहलना मददगार हो सकता है।
शरीर को अत्यधिक थकाने वाली गतिविधि करने की जरूरत नहीं है। खासकर निर्जला व्रत में शरीर पहले ही पानी और भोजन न मिलने के कारण कमजोर महसूस कर सकता है।
नींद भगाने के लिए अत्यधिक व्यायाम करना या शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालना ठीक नहीं है। जागरण का उद्देश्य धार्मिक आराधना है, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाना नहीं।
निर्जला व्रत में स्वास्थ्य का रखें ध्यान
हरतालिका तीज पर कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है। लंबे समय तक भोजन और पानी के बिना रहने के साथ पूरी रात जागने से कुछ लोगों को चक्कर, कमजोरी, सिरदर्द या अन्य परेशानी हो सकती है।
अगर व्रत के दौरान तेज चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या कोई गंभीर परेशानी महसूस हो तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को कठोर उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
सुबह पूजा के बाद पूरा होता है जागरण
रातभर भजन, कथा और शिव-पार्वती की आराधना के बाद सुबह पूजा की जाती है। व्रत खोलने की विधि और समय अलग-अलग पारिवारिक तथा क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न हो सकता है।
इस तरह हरतालिका तीज की रात जागने के लिए **भजन-कीर्तन, अलग-अलग प्रहर में शिव-पार्वती की पूजा और हरतालिका तीज की कथा** तीन प्रमुख गतिविधियां हो सकती हैं। इनसे रात का समय धार्मिक वातावरण में गुजरता है और व्रती महिलाओं का ध्यान भी पूजा में लगा रहता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्रत और जागरण श्रद्धा तथा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार किया जाए। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
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