Life style :  अचानक खड़े होने पर सिर हल्का महसूस होना, चलते समय संतुलन बिगड़ जाना या कुछ समय के लिए आसपास की चीजें घूमती हुई दिखाई देना आम अनुभव हो सकता है। कई बार कम पानी पीने, लंबे समय तक खाली पेट रहने, ज्यादा गर्मी में रहने या अचानक ब्लड प्रेशर गिरने के कारण ऐसा होता है। लेकिन अगर चक्कर बार-बार आने लगे, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे केवल कमजोरी या थकान मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
चक्कर आना अपने आप में कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि कई अलग-अलग स्थितियों से जुड़ा लक्षण हो सकता है। किसी व्यक्ति को सिर हल्का महसूस हो सकता है, किसी को ऐसा लग सकता है कि वह गिरने वाला है, जबकि कुछ लोगों को कमरा या आसपास की चीजें घूमती हुई महसूस होती हैं। इसलिए चक्कर की वजह समझने के लिए उसके प्रकार और साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।
अचानक खड़े होने पर क्यों आता है चक्कर?
लंबे समय तक बैठे या लेटे रहने के बाद अचानक खड़े होने पर कुछ लोगों को कुछ सेकंड के लिए सिर हल्का महसूस होता है। कई बार इसकी वजह शरीर की स्थिति बदलने के साथ ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना हो सकती है। इसे ऑर्थोस्टेटिक या पोस्टुरल हाइपोटेंशन कहा जाता है।
शरीर सामान्य तौर पर स्थिति बदलने के साथ रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है। लेकिन अगर यह प्रक्रिया तुरंत संतुलित नहीं हो पाती तो मस्तिष्क तक कुछ समय के लिए रक्त प्रवाह कम हो सकता है और व्यक्ति को चक्कर जैसा महसूस हो सकता है।
अगर यह समस्या लगातार हो रही है तो ब्लड प्रेशर की जांच और डॉक्टर की सलाह उपयोगी हो सकती है।
शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है वजह
डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी चक्कर आने की सामान्य वजहों में शामिल है। बहुत ज्यादा पसीना आने, गर्मी में लंबे समय तक रहने, पर्याप्त पानी न पीने, उल्टी या दस्त जैसी स्थिति में शरीर से तरल पदार्थ कम हो सकता है।
ऐसी स्थिति में कमजोरी, मुंह सूखना, थकान और चक्कर जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। खासकर गर्म मौसम में पर्याप्त तरल लेना महत्वपूर्ण है।
हालांकि जिन लोगों को किडनी, हृदय या दूसरी ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिनमें तरल की मात्रा सीमित रखने की सलाह दी गई हो, उन्हें पानी की मात्रा बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए।
खाली पेट रहने से भी हो सकती है परेशानी
लंबे समय तक कुछ न खाने के बाद कुछ लोगों को कमजोरी, कंपकंपी, पसीना या चक्कर जैसा महसूस हो सकता है। खासकर डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों में ब्लड शुगर कम होना गंभीर स्थिति बन सकती है।
अगर चक्कर के साथ बहुत ज्यादा पसीना, कंपकंपी, भ्रम, कमजोरी या बेहोशी जैसी स्थिति हो तो इसे सामान्य भूख समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डायबिटीज से पीड़ित लोगों को ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर द्वारा बताई गई लो ब्लड शुगर मैनेजमेंट योजना का पालन करना चाहिए।
कान की समस्या से भी जुड़ा हो सकता है चक्कर
अगर ऐसा महसूस हो कि कमरा घूम रहा है या शरीर स्थिर होने के बावजूद आसपास की चीजें घूम रही हैं, तो इसे वर्टिगो जैसी स्थिति से जोड़ा जा सकता है। शरीर का संतुलन बनाए रखने में अंदरूनी कान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अंदरूनी कान से जुड़ी कुछ समस्याओं के कारण अचानक घूमने जैसा एहसास हो सकता है। कई लोगों में सिर की स्थिति बदलने, करवट लेने या ऊपर-नीचे देखने पर चक्कर बढ़ सकता है।
वर्टिगो के अलग-अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए बार-बार ऐसी समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से कारण की जांच कराना बेहतर है।
एनीमिया भी हो सकता है एक कारण
शरीर में पर्याप्त स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी होने पर थकान और कमजोरी के साथ चक्कर महसूस हो सकता है। एनीमिया के कई कारण होते हैं।
अगर चक्कर के साथ लगातार थकान, कमजोरी, सांस फूलना या त्वचा का असामान्य रूप से पीला दिखाई देना जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर रक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।
सिर्फ चक्कर के आधार पर एनीमिया मान लेना सही नहीं है। इसकी पुष्टि जांच से होती है।
दवाओं का असर भी संभव
कुछ दवाओं के कारण ब्लड प्रेशर कम होने, नींद आने या संतुलन प्रभावित होने जैसी समस्या हो सकती है। यदि कोई नई दवा शुरू करने या दवा की खुराक बदलने के बाद चक्कर आने लगे हैं, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट को इसकी जानकारी देना चाहिए।
बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी जरूरी दवा को अचानक बंद नहीं करना चाहिए। डॉक्टर जरूरत के अनुसार दवा की खुराक या विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
कब तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी है?
हर बार चक्कर आना गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ स्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी हो सकती है। चक्कर के साथ चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, अचानक दिखाई देने में बदलाव, बहुत तेज नया सिरदर्द, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या चलने में अचानक गंभीर असंतुलन जैसे लक्षण हों तो तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
इसी तरह सिर पर चोट लगने के बाद चक्कर आना, लगातार उल्टी होना या चेतना में बदलाव होना भी तत्काल जांच की जरूरत पैदा कर सकता है।
बार-बार चक्कर आए तो क्या करें?
अगर चक्कर बार-बार आते हैं तो यह ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है कि समस्या कब शुरू होती है। क्या अचानक खड़े होने पर चक्कर आता है? क्या सिर घुमाने पर कमरा घूमता महसूस होता है? क्या लंबे समय तक भूखे रहने के बाद परेशानी बढ़ती है? चक्कर कितनी देर रहता है और उसके साथ मतली, कान में आवाज, सुनने में बदलाव, सिरदर्द या धड़कन तेज होने जैसे लक्षण हैं या नहीं?
ये जानकारियां डॉक्टर को संभावित कारण समझने में मदद कर सकती हैं। जरूरत के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, रक्त जांच, कान और संतुलन से संबंधित जांच या अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं।
चक्कर आने के दौरान तुरंत बैठ जाना या सुरक्षित जगह पर लेटना गिरने और चोट लगने के जोखिम को कम कर सकता है। समस्या ठीक होने तक वाहन चलाने, ऊंचाई पर काम करने या मशीन चलाने से बचना भी सुरक्षित रहता है।
बार-बार होने वाले चक्कर को केवल कमजोरी मानना सही नहीं है। कई बार इसका कारण सामान्य और आसानी से ठीक होने वाला होता है, लेकिन कभी-कभी यह ऐसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है जिसकी जांच जरूरी है। खासकर चक्कर लगातार बढ़ रहे हों, रोजमर्रा के काम प्रभावित कर रहे हों या उनके साथ गंभीर लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
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