strawberry plant : घर में गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोग अब केवल फूल और सजावटी पौधे ही नहीं, बल्कि सब्जियों और फलों के पौधे भी लगाना पसंद कर रहे हैं। घर में उगाए गए ताजे फल और सब्जियां गार्डन की खूबसूरती बढ़ाने के साथ पौधों की देखभाल का एक अलग अनुभव भी देते हैं। हालांकि आम, अमरूद या दूसरे कई फलों के पेड़ों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होती है। छोटे घर, बालकनी या छत पर ऐसे पौधों को लगाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में स्ट्रॉबेरी एक अच्छा विकल्प है, जिसे सीमित जगह में गमले या कंटेनर में भी उगाया जा सकता है।
स्ट्रॉबेरी का पौधा आकार में छोटा होता है और इसकी जड़ें भी बहुत अधिक गहराई तक नहीं जातीं। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल मिले तो इसे बालकनी, छत या छोटे गार्डन में लगाया जा सकता है। हालांकि अच्छी ग्रोथ और फल के लिए पौधे की जरूरतों को समझना जरूरी है।
सही पौधे से करें शुरुआत
अगर पहली बार स्ट्रॉबेरी उगा रहे हैं तो बीज के बजाय नर्सरी से स्वस्थ पौधा या रनर लाकर शुरुआत करना आसान हो सकता है। पौधा खरीदते समय उसकी पत्तियों को ध्यान से देखें। हरी और स्वस्थ पत्तियों वाला पौधा चुनें और कीट या बीमारी के स्पष्ट लक्षण वाले पौधों से बचें।
स्ट्रॉबेरी की कई किस्में होती हैं और सभी किस्मों की जलवायु संबंधी जरूरतें एक जैसी नहीं होतीं। इसलिए स्थानीय मौसम के अनुकूल किस्म चुनना बेहतर रहता है। नर्सरी से पौधा खरीदते समय वहां उपलब्ध किस्म और उसकी देखभाल की जानकारी ली जा सकती है।
कैसा होना चाहिए गमला?
स्ट्रॉबेरी को बहुत बड़े गमले की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन कंटेनर में पानी की निकासी अच्छी होना जरूरी है। गमले के नीचे पर्याप्त ड्रेनेज होल होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।
अगर पानी गमले में लगातार जमा रहता है तो जड़ों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। स्ट्रॉबेरी के पौधों को हैंगिंग बास्केट, ग्रो बैग और चौड़े कंटेनर में भी लगाया जा सकता है।
एक ही कंटेनर में बहुत ज्यादा पौधे लगाने से बचना चाहिए। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से उन्हें फैलने की जगह मिलती है और हवा का आवागमन भी बेहतर रहता है।
मिट्टी तैयार करते समय रखें ध्यान
स्ट्रॉबेरी के पौधे के लिए मिट्टी हल्की और पानी की अच्छी निकासी वाली होनी चाहिए। भारी और लगातार गीली रहने वाली मिट्टी पौधे की जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
गार्डन की मिट्टी के साथ अच्छी तरह तैयार जैविक खाद या कम्पोस्ट मिलाया जा सकता है। मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा न हो।
पौधा लगाते समय इसकी जड़ों को मिट्टी में अच्छी तरह सेट करें, लेकिन पौधे के क्राउन यानी वह हिस्सा जहां से पत्तियां निकलती हैं, उसे बहुत ज्यादा गहराई में दबाने से बचें।
धूप है बेहद जरूरी
स्ट्रॉबेरी के पौधे को अच्छी ग्रोथ और फल देने के लिए पर्याप्त धूप की जरूरत होती है। इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां दिन में कई घंटे सीधी धूप मिल सके।
अगर बालकनी में पौधा लगाया है तो देखें कि वहां सुबह या दिन के समय पर्याप्त रोशनी पहुंच रही है या नहीं। बहुत कम धूप मिलने पर पौधे की वृद्धि और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
गर्मी बहुत ज्यादा हो तो पौधे की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम के अनुसार धूप और पानी की जरूरत में बदलाव हो सकता है।
पानी देते समय न करें यह गलती
स्ट्रॉबेरी के पौधे को नियमित नमी पसंद होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गमले में लगातार पानी भरा रहे। मिट्टी की ऊपरी सतह को देखकर पानी की जरूरत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पानी देते समय कोशिश करें कि मिट्टी अच्छी तरह नम हो जाए और अतिरिक्त पानी नीचे के छेद से बाहर निकल जाए। बार-बार बहुत ज्यादा पानी देने से जड़ों के आसपास नमी बढ़ सकती है।
वहीं मिट्टी को लंबे समय तक पूरी तरह सूखने देना भी पौधे के लिए ठीक नहीं है। मौसम और गमले के आकार के अनुसार पानी देने की मात्रा तय करनी चाहिए।
खाद से मिलेगी अच्छी ग्रोथ
गमले में लगे पौधों को सीमित मिट्टी से ही पोषण मिलता है। इसलिए समय-समय पर पौधे को उचित पोषण देना जरूरी हो सकता है। अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद या कम्पोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि जरूरत से ज्यादा खाद देना पौधे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विशेष रूप से नाइट्रोजन की अधिकता से पौधे में पत्तियां तो ज्यादा बढ़ सकती हैं, लेकिन फल बनने पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी खाद का इस्तेमाल संतुलित मात्रा में करना चाहिए।
फल को मिट्टी से बचाएं
स्ट्रॉबेरी के फल अक्सर पौधे से नीचे की तरफ लटकते हैं। अगर फल लगातार गीली मिट्टी के संपर्क में रहें तो उनके खराब होने की आशंका बढ़ सकती है।
इसी वजह से पौधे के आसपास हल्की मल्चिंग की जा सकती है। सूखी घास या उपयुक्त जैविक सामग्री की पतली परत मिट्टी के ऊपर बिछाई जा सकती है। इससे फल सीधे मिट्टी के संपर्क में आने से बच सकते हैं और मिट्टी की नमी भी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
कीटों पर रखें नजर
घर के गार्डन में लगे स्ट्रॉबेरी के पौधों पर समय-समय पर कीट या रोग का असर दिखाई दे सकता है। पत्तियों पर असामान्य धब्बे, मुड़ी हुई पत्तियां या छोटे कीट दिखाई दें तो पौधे की जांच करें।
खराब या सूखी पत्तियों को समय पर हटाने से पौधा साफ रहता है। पौधों को बहुत पास-पास रखने से भी नमी और बीमारी की समस्या बढ़ सकती है, इसलिए हवा के आवागमन के लिए पर्याप्त जगह देना जरूरी है।
सही समय पर तोड़ें स्ट्रॉबेरी
पौधे पर स्ट्रॉबेरी आने के बाद उसके पूरी तरह लाल और पके होने का इंतजार करें। फल तैयार होने पर उसे सावधानी से तोड़ें, ताकि पौधे की शाखा को नुकसान न पहुंचे।
घर पर स्ट्रॉबेरी उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम जगह में भी एक आकर्षक फलदार पौधा लगाया जा सकता है। इसकी हरी पत्तियां, सफेद फूल और लाल फल बालकनी या गार्डन को खूबसूरत रूप भी देते हैं।
अगर सही गमला, अच्छी मिट्टी, पर्याप्त धूप, संतुलित पानी और नियमित देखभाल मिले तो घर में स्ट्रॉबेरी का पौधा उगाना मुश्किल नहीं है। थोड़ी मेहनत और धैर्य के साथ छोटे से गार्डन या बालकनी में भी स्ट्रॉबेरी उगाने का आनंद लिया जा सकता है।
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