पाकिस्तान में भी गूंजता है ये पंजाबी गीत

Update: 2026-08-01 09:35 GMT

लाइफस्टाइल डेस्क: बॉलीवुड फिल्मों में कई ऐसे गाने होते हैं जो रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ जाते हैं और लंबे समय तक याद किए जाते हैं। ऐसा ही एक गाना साल 2014 में रिलीज हुई कंगना रनौत की फिल्म ‘क्वीन’ का ‘लंदन ठुमकदा’ है। यह गाना आज भी शादी समारोहों और पार्टियों में खूब बजाया जाता है। अपनी तेज धुन, पंजाबी अंदाज और शानदार म्यूजिक की वजह से इस गाने ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई थी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह सुपरहिट गाना पंजाब के एक पुराने लोकगीत से प्रेरित है।

‘लंदन ठुमकदा’ की धुन में पंजाब की लोक संस्कृति की झलक साफ नजर आती है। यह गाना पंजाब के पारंपरिक लोकगीत ‘लट्ठे दी चादर उत्ते सलेटी रंग माहिया’ से जुड़ा हुआ है। यह लोकगीत पंजाब की पुरानी टप्पा और बोलियां शैली का हिस्सा रहा है। इसकी जड़ें उस समय के पंजाब से जुड़ी हैं, जब भारत का विभाजन नहीं हुआ था और पंजाब का बड़ा हिस्सा आज के पाकिस्तान में आता था।

यह लोकगीत कई दशकों से पंजाब के गांवों और खासकर शादी-ब्याह के समारोहों में गाया जाता रहा है। पुराने समय में महिलाएं शादी के अवसरों पर ढोलक के साथ बैठकर ऐसे लोकगीत गाती थीं। इन गीतों के जरिए वे अपनी भावनाओं, प्यार, शिकायतों और रिश्तों की मिठास को व्यक्त करती थीं। ‘लट्ठे दी चादर’ भी ऐसा ही गीत है, जिसमें प्रेम और छेड़छाड़ भरे अंदाज में भावनाओं को पेश किया गया है।

इस लोकगीत को भारत और पाकिस्तान दोनों जगहों पर पसंद किया जाता रहा है। विभाजन से पहले यह पूरे पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा था। विभाजन के बाद भी पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में यह गीत लोगों के बीच लोकप्रिय बना रहा। कई कलाकारों ने इसे अपनी आवाज देकर और ज्यादा प्रसिद्ध बनाया। पंजाबी गायिका सुरिंदर कौर और पाकिस्तान की मशहूर गायिका मुस्सरत नजीर के वर्जन भी काफी लोकप्रिय रहे हैं।

लोकगीतों की खासियत यह होती है कि वे सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि समाज और संस्कृति की कहानियां भी अपने अंदर समेटे होते हैं। ‘लट्ठे दी चादर’ जैसे गीतों में पंजाब के पारंपरिक जीवन, रिश्तों की गर्माहट और प्रेम की भावनाओं को महसूस किया जा सकता है। यही वजह है कि यह गीत पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के बीच लोकप्रिय बना रहा।

‘क्वीन’ फिल्म के लिए जब इस लोकधुन को आधुनिक संगीत के साथ पेश किया गया तो इसे नया रूप मिला। फिल्म के माहौल और कहानी के अनुसार इसमें नए बीट्स जोड़े गए, लेकिन इसके पंजाबी रंग और लोकगीत की मूल भावना को बरकरार रखा गया। यही कारण है कि ‘लंदन ठुमकदा’ रिलीज होते ही लोगों का पसंदीदा बन गया।

शादी समारोहों में आज भी यह गाना खूब बजता है। दूल्हा-दुल्हन के परिवार से लेकर दोस्तों तक, हर कोई इस गाने पर झूमता नजर आता है। इसकी लोकप्रियता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय लोक संगीत की जड़ें कितनी मजबूत हैं।

कंगना रनौत की ‘क्वीन’ का यह गाना सिर्फ एक बॉलीवुड हिट नहीं है, बल्कि पंजाब की समृद्ध लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी पेश करता है। पुराने लोकगीत को नए अंदाज में पेश कर इसे देश-दुनिया तक पहुंचाने का काम बॉलीवुड ने किया है। आज ‘लंदन ठुमकदा’ जहां युवाओं की पसंद है, वहीं इसके पीछे छिपी लोकगीत की कहानी इसे और खास बना देती है।

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