लाइफ स्टाइल : नहाने के बाद लोग आमतौर पर अंडरगारमेंट्स, पैंट और टीशर्ट सहित सभी कपड़े बदल लेते हैं, लेकिन मोजों की सफाई को कई बार नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग एक ही जोड़ी मोजे लगातार कई दिनों तक पहनते रहते हैं। मोजे बाहर से साफ और सूखे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उनमें पसीना, त्वचा की मृत कोशिकाएं और गंदगी जमा हो सकती है। ऐसा वातावरण दुर्गंध पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों और फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल बन सकता है।
पैरों में पसीने की ग्रंथियां बड़ी संख्या में होती हैं। बंद जूते पहनने पर हवा का आवागमन कम हो जाता है और पैरों के आसपास गर्म तथा नम वातावरण बनने लगता है। खासकर उंगलियों के बीच नमी अधिक समय तक बनी रह सकती है। यदि मोजे पसीने से भीग जाएं और उन्हें बिना धोए दोबारा पहना जाए तो पैरों से दुर्गंध, खुजली और त्वचा संबंधी परेशानी का खतरा बढ़ सकता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के अनुसार फंगस गर्म और नम जगहों पर तेजी से बढ़ सकता है। संस्था प्रतिदिन पैरों को साबुन से धोने, उन्हें पूरी तरह सुखाने और हर दिन साफ मोजे पहनने की सलाह देती है। यदि मोजे पसीने या पानी से गीले हो जाएं तो उन्हें दिन में एक से अधिक बार बदलना चाहिए। 
 गंदे मोजे दोबारा पहनने के नुकसान
एक बार पहने हुए मोजों को बिना धोए दोबारा पहनने से पहले उनमें मौजूद पसीना और गंदगी वापस त्वचा के संपर्क में आती है। इससे पैरों से दुर्गंध आने के साथ त्वचा में जलन या खुजली हो सकती है। जिन लोगों के पैरों में पहले से फंगल संक्रमण है, उनके लिए गंदे और नम मोजे समस्या को बढ़ा सकते हैं।
एथलीट फुट पैरों में होने वाला एक आम फंगल संक्रमण है। इसके लक्षणों में उंगलियों के बीच खुजली, सफेद या पपड़ीदार त्वचा, जलन, दरारें और कभी-कभी छाले शामिल हो सकते हैं। ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा हर दिन साफ मोजे पहनने, पैरों को धोने के बाद विशेष रूप से उंगलियों के बीच अच्छी तरह सुखाने और तौलिया या जूते साझा नहीं करने की सलाह देती है। 
मोजों के साथ जूतों की स्वच्छता भी जरूरी है। लगातार एक ही जूता पहनने से उसके अंदर की नमी पूरी तरह सूख नहीं पाती। संभव हो तो जूतों की अलग-अलग जोड़ियां बारी-बारी से पहनें और इस्तेमाल के बाद उन्हें हवादार स्थान पर रखें। सांस लेने योग्य कपड़े वाले जूते और नमी सोखने वाले मोजे गर्मी तथा पसीना कम करने में मदद कर सकते हैं।
 हर दिन मोजे बदलना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ रोजाना साफ और धुले हुए मोजे पहनने की सलाह देते हैं। व्यायाम, दौड़ने, जिम जाने या लंबे समय तक जूते पहनने के बाद मोजे जरूर बदलने चाहिए। जिन लोगों के पैरों में अधिक पसीना आता है, उन्हें दिन में दो बार भी मोजे बदलने पड़ सकते हैं। एनएचएस की सलाह के अनुसार एक ही मोजे या जूते को लगातार दो दिन पहनने से बचना चाहिए। 
 मोजे धोने का सही तरीका
मोजों को उल्टा करके धोने से अंदर जमा पसीना और त्वचा की मृत कोशिकाएं बेहतर तरीके से साफ हो सकती हैं। सामान्य उपयोग वाले मोजों को अच्छे डिटर्जेंट से उनके केयर लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार धोएं। हर प्रकार के मोजे को 60 डिग्री सेल्सियस पर धोना जरूरी नहीं है, क्योंकि अधिक तापमान कुछ कपड़ों और उनकी इलास्टिक को नुकसान पहुंचा सकता है।
हालांकि, घर में किसी व्यक्ति को एथलीट फुट होने पर कुछ स्वास्थ्य संस्थान कपड़े के निर्देश अनुमति दें तो मोजों और चादरों को 60 डिग्री सेल्सियस पर धोने की सलाह देते हैं। धोने के बाद मोजों को पूरी तरह सुखाना जरूरी है। हर मोजे पर गर्म आयरन करना आवश्यक नहीं है और सिंथेटिक या इलास्टिक वाले मोजों को इससे नुकसान हो सकता है।
यदि खुजली, लालिमा, त्वचा फटना या दुर्गंध लगातार बनी रहे तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें। मधुमेह या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को पैरों की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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