नई दिल्ली: नौकरी और बच्चों की जिम्मेदारी एक साथ संभालना आज के समय में कई माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऑफिस का काम, मीटिंग, डेडलाइन, घर की जिम्मेदारियां और बच्चों की पढ़ाई—इन सबके बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। लगातार भागदौड़ के कारण तनाव और थकान बढ़ सकती है। ऐसे में कुछ आसान आदतें रोजमर्रा की जिंदगी को काफी व्यवस्थित बना सकती हैं।
सबसे जरूरी बात है कि हर काम को एक ही दिन में पूरा करने का दबाव न बनाया जाए। जरूरी कामों की प्राथमिकता तय करने से मानसिक बोझ कम होता है और समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
पहले से बनाएं दिन की योजना
सुबह उठने के बाद जल्दबाजी से बचने के लिए रात में ही अगले दिन की तैयारी कर लेना फायदेमंद हो सकता है। बच्चों के कपड़े, स्कूल बैग, टिफिन और जरूरी सामान पहले से तैयार रखें।
ऑफिस से जुड़े महत्वपूर्ण कामों की सूची भी पहले बना लें। इससे सुबह के समय अफरा-तफरी कम होगी और बच्चों को समय देना आसान हो जाएगा।
जिम्मेदारियां बांटना जरूरी
घर और बच्चों की सारी जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर नहीं होनी चाहिए। पति-पत्नी आपस में काम बांट सकते हैं। कोई बच्चों को स्कूल छोड़ सकता है तो दूसरा टिफिन या होमवर्क की जिम्मेदारी संभाल सकता है।
अगर परिवार में अन्य सदस्य मदद के लिए मौजूद हैं तो उनकी सहायता भी ली जा सकती है। जिम्मेदारियां बांटने से तनाव कम होता है और परिवार के सभी सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल बनता है।
बच्चों के लिए तय करें क्वालिटी टाइम
नौकरी के कारण बच्चों के साथ घंटों बिताना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कम समय में भी अच्छा जुड़ाव बनाया जा सकता है। रोज कुछ समय मोबाइल और ऑफिस के काम से दूर रहकर सिर्फ बच्चों के साथ बिताएं।
उनसे स्कूल, दोस्तों और उनकी पसंद की चीजों के बारे में बात करें। बच्चों को यह महसूस होना जरूरी है कि माता-पिता उनकी बातें सुनते और समझते हैं।
स्क्रीन टाइम पर रखें संतुलन
वर्किंग पेरेंट्स के लिए बच्चों को मोबाइल या टीवी देकर व्यस्त रखना आसान विकल्प लगता है, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन पर निर्भरता सही नहीं है।
बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें और उन्हें खेल, किताब, ड्राइंग या दूसरे रचनात्मक कामों में शामिल करने की कोशिश करें।
खुद के लिए भी निकालें समय
पेरेंटिंग और नौकरी के बीच अक्सर माता-पिता अपनी जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। पर्याप्त नींद, नियमित भोजन और कुछ समय अपने लिए निकालना भी जरूरी है।
थका हुआ और तनावग्रस्त व्यक्ति घर और ऑफिस दोनों जगह बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता। इसलिए आराम को समय की बर्बादी समझने के बजाय जरूरी हिस्सा मानना चाहिए।
बच्चों को भी बनाएं जिम्मेदार
बच्चों की उम्र के अनुसार उन्हें छोटे-छोटे काम दिए जा सकते हैं। अपना बैग व्यवस्थित करना, खिलौने सही जगह रखना या पढ़ाई का सामान तैयार करना जैसी आदतें उन्हें जिम्मेदार बनाती हैं।
इससे माता-पिता का काम भी कम होता है और बच्चों में आत्मनिर्भरता विकसित होती है।
परफेक्ट बनने का दबाव न लें
हर दिन योजना के मुताबिक चले, यह जरूरी नहीं है। कभी ऑफिस का काम बढ़ सकता है तो कभी बच्चा ज्यादा समय मांग सकता है। ऐसे में खुद पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय परिस्थितियों के अनुसार काम करना बेहतर है।
नौकरी और पेरेंटिंग का संतुलन छोटे बदलावों से आसान बनाया जा सकता है। सही योजना, जिम्मेदारियों का बंटवारा और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय रोज की भागदौड़ को काफी कम कर सकता है।
Tags: