लाइफस्टाइ। एलोवेरा आमतौर पर त्वचा और बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बागवानी में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा की पत्तियों के अंदर मौजूद जेल को कुछ गार्डनर्स कटिंग लगाने और पौधों की सामान्य देखभाल में घरेलू विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। हालांकि इसे कोई चमत्कारी खाद या सभी पौधों की समस्याओं का इलाज नहीं समझना चाहिए। सही मात्रा और तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है।
अगर आपके घर में एलोवेरा का पौधा पहले से लगा है तो बाजार से महंगे उत्पाद खरीदने के बजाय ताजा पत्ती से थोड़ी मात्रा में जेल निकाला जा सकता है। आइए जानते हैं इसे पौधों के लिए इस्तेमाल करने के आसान तरीके।
कटिंग लगाने में एलोवेरा जेल
एलोवेरा जेल का सबसे लोकप्रिय गार्डनिंग इस्तेमाल पौधों की कटिंग के साथ किया जाता है। नया पौधा तैयार करने के लिए स्वस्थ शाखा की कटिंग लेने के बाद उसके निचले सिरे पर थोड़ी मात्रा में ताजा एलोवेरा जेल लगाया जा सकता है।
इसके बाद कटिंग को उपयुक्त और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी या पॉटिंग मिक्स में लगा दें। मिट्टी को हल्का नम रखें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी न डालें।
एलोवेरा जेल को अक्सर घरेलू 'रूटिंग जेल' के विकल्प के रूप में बताया जाता है, लेकिन व्यावसायिक rooting hormone जितना भरोसेमंद प्रभाव हर पौधे में मिलेगा, इसका मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित है।
एलोवेरा का लिक्विड कैसे बनाएं?
पौधों में इस्तेमाल करने के लिए एलोवेरा जेल को सीधे बड़ी मात्रा में मिट्टी में डालने के बजाय पानी में पतला करना बेहतर है।
इसके लिए एलोवेरा की एक छोटी पत्ती लें। उसे अच्छी तरह धोकर काटें और पीला रस निकलने दें। इसके बाद अंदर का साफ जेल निकाल लें। बहुत थोड़ी मात्रा में जेल को पर्याप्त पानी में अच्छी तरह मिलाएं।
इस घोल को तैयार करने के बाद पौधों की मिट्टी में सीमित मात्रा में दिया जा सकता है। शुरुआत हमेशा कम मात्रा से करें और पौधे की प्रतिक्रिया देखें।
पत्तियों पर स्प्रे करने से पहले सावधानी
सोशल मीडिया पर एलोवेरा का पानी पत्तियों पर स्प्रे करने की सलाह भी खूब मिलती है। ऐसा करने से पहले सावधानी जरूरी है। बहुत गाढ़ा या चिपचिपा घोल पत्तियों पर परत बना सकता है और धूल को आकर्षित कर सकता है।
अगर स्प्रे करना ही है तो जेल को बहुत ज्यादा पानी में पतला करें और पहले पौधे की एक-दो पत्तियों पर परीक्षण करें। तेज धूप में स्प्रे करने से बचें। शाम या सुबह का समय बेहतर हो सकता है।
किसी तरह के धब्बे, पत्तियां मुरझाने या दूसरी प्रतिकूल प्रतिक्रिया दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
एलोवेरा खाद का विकल्प नहीं
एलोवेरा जेल में कई प्राकृतिक यौगिक मौजूद होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह पौधों के लिए संतुलित उर्वरक बन जाता है। पौधों को स्वस्थ विकास के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और दूसरे आवश्यक पोषक तत्व सही अनुपात में चाहिए।
इसलिए एलोवेरा जेल का इस्तेमाल नियमित खाद, कम्पोस्ट या पौधे की जरूरत के अनुसार दिए जाने वाले उर्वरक की जगह नहीं करना चाहिए।
अच्छी मिट्टी, पर्याप्त रोशनी, सही सिंचाई और उचित पोषण ही पौधों के स्वस्थ विकास की बुनियाद हैं।
बाजार वाला एलोवेरा जेल इस्तेमाल करें या नहीं?
गार्डनिंग के लिए संभव हो तो पौधे से निकला **शुद्ध ताजा एलोवेरा जेल** इस्तेमाल करें। कॉस्मेटिक इस्तेमाल के लिए बाजार में मिलने वाले एलोवेरा जेल में खुशबू, रंग, प्रिजर्वेटिव या दूसरे पदार्थ मिले हो सकते हैं।
ये अतिरिक्त तत्व पौधों के लिए जरूरी नहीं हैं और कुछ मामलों में नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए पैकेट वाले स्किनकेयर एलोवेरा जेल को पौधों में डालने से बचना बेहतर है।
ज्यादा एलोवेरा डालने से बचें
किसी भी घरेलू गार्डनिंग नुस्खे की तरह एलोवेरा में भी 'ज्यादा डालेंगे तो ज्यादा फायदा होगा' वाला नियम काम नहीं करता। बड़ी मात्रा में जैविक पदार्थ गमले की मिट्टी में डालने से नमी और सूक्ष्मजीव गतिविधि बदल सकती है।
इससे फंगस, दुर्गंध या जड़ों से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। खासकर छोटे गमलों में बहुत कम मात्रा इस्तेमाल करना बेहतर है।
किन पौधों पर कर सकते हैं इस्तेमाल?
मनी प्लांट, गुलाब, तुलसी या दूसरे सामान्य घरेलू पौधों की कटिंग तैयार करते समय लोग एलोवेरा जेल का प्रयोग करते हैं। लेकिन हर पौधे की rooting जरूरत अलग होती है। कुछ पौधे आसानी से कटिंग से जड़ बना लेते हैं, जबकि कुछ के लिए विशेष वातावरण या rooting hormone की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए किसी महंगे या दुर्लभ पौधे पर सीधे प्रयोग करने के बजाय पहले सामान्य पौधे पर परीक्षण करना बेहतर विकल्प है।
कुल मिलाकर एलोवेरा जेल एक **सस्ता घरेलू गार्डनिंग प्रयोग** हो सकता है, खासकर कटिंग लगाते समय। लेकिन पौधों की तेजी से ग्रोथ, बीमारी खत्म करने या भरपूर फूल दिलाने जैसे दावों को लेकर सावधानी जरूरी है। इसे सीमित मात्रा में सहायक उपाय के रूप में इस्तेमाल करें और पौधों की असली जरूरत यानी सही मिट्टी, पानी, धूप और पोषण पर ज्यादा ध्यान दें।