लाइफ स्टाइल :  शारदीय नवरात्रि में व्रत और फलाहार के साथ साबूदाना की खपत भी बढ़ जाती है। स्वाद और आसानी से तैयार होने के कारण यह कई लोगों के व्रत के भोजन का प्रमुख हिस्सा होता है। हालांकि, रायपुर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा के मुताबिक, साबूदाना को हेल्दी समझकर रोजाना खाना और केवल इसी पर निर्भर रहना सही नहीं है। उनका कहना है कि साबूदाना में मुख्य रूप से स्टार्च होता है, इसलिए इसे संपूर्ण पोषण देने वाला भोजन समझने से पहले इसकी बनावट और पोषण संबंधी सीमाओं को जानना जरूरी है।
डॉ. जयेश शर्मा बताते हैं कि साबूदाना खाने में स्वादिष्ट जरूर लगता है, लेकिन इससे शरीर को मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट मिलता है। उनके मुताबिक, व्रत के दौरान सिर्फ पेट भरने और संतुलित भोजन लेने में अंतर है। कोई खाद्य पदार्थ व्रत में स्वीकार्य है, इसका यह अर्थ नहीं कि वह शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा कर देता है। साबूदाना को लेकर भी इसी अंतर को समझने की जरूरत है। इसे फलाहार का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन पूरे भोजन का एकमात्र आधार बनाना उचित नहीं है।
साबूदाना की लोकप्रियता के बीच अक्सर उसके पोषण पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता, जितना उसके स्वाद पर दिया जाता है। डॉ. शर्मा इसे अत्यधिक प्रसंस्कृत और मुख्य रूप से स्टार्च वाला खाद्य पदार्थ बताते हैं। उनकी बात का प्रमुख संदेश यह है कि साबूदाना खाने से मिलने वाली ऊर्जा को संतुलित पोषण का पर्याय नहीं समझना चाहिए। शरीर को कार्बोहाइड्रेट के अलावा दूसरे पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। ऐसे में व्रत के दिनों में भोजन का चुनाव करते समय पूरी थाली की संरचना पर ध्यान देना जरूरी है।
खाने से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को आसान भाषा में समझाने वाले कृष अशोक भी साबूदाना के बारे में इसी तरह की बात रखते हैं। उनके मुताबिक, साबूदाना उन्हें भी पसंद है और उसका स्वाद अच्छा लगता है। हालांकि, स्वाद पसंद होने के बावजूद उसके पोषण संबंधी तथ्य नहीं बदलते। वह इसे मुख्य रूप से स्टार्च से बना खाद्य पदार्थ बताते हैं। उनके अनुसार, व्रत में साबूदाना खाने पर शरीर को ज्यादातर कार्बोहाइड्रेट मिलता है। इसलिए इसे खाते समय यह समझना जरूरी है कि
भोजन
में पोषण की विविधता कितनी है।
कृष अशोक साबूदाना को अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड बताते हैं। हालांकि, किसी खाद्य पदार्थ की ऐसी श्रेणी तय करने के लिए उसके निर्माण और उसमें शामिल सामग्री की जानकारी भी मायने रखती है। यहां पोषण से जुड़ा प्रमुख मुद्दा उसका स्टार्च प्रधान होना है। केवल प्रसंस्करण का नाम सुनकर किसी भोजन के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय उसकी मात्रा, सामग्री और पूरे आहार में उसकी भूमिका को समझना अधिक उपयोगी है। साबूदाना को लेकर दी गई सलाह का केंद्र भी भोजन में संतुलन बनाए रखना है।
ब्लड शुगर पर असर इस चर्चा का दूसरा अहम पहलू है। कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन का रक्त में ग्लूकोज के स्तर पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यह असर सभी लोगों में एक जैसा नहीं होता। भोजन में कार्बोहाइड्रेट का प्रकार, उसकी मात्रा और साथ खाई गई चीजें भी मायने रखती हैं। इसलिए साबूदाना खाने के बाद हर व्यक्ति का ब्लड शुगर एक निश्चित स्तर तक बढ़ेगा, ऐसा दावा करना सही नहीं होगा। स्टार्च प्रधान भोजन के संदर्भ में मात्रा और पूरे भोजन की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है। The Nutrition Source
कृष अशोक के मुताबिक, साबूदाना में इस्तेमाल होने वाला टैपिओका स्टार्च बोबा और बबल टी में इस्तेमाल होने वाले टैपिओका बॉल्स में भी पाया जाता है। इस तुलना के जरिए वह साबूदाना की मूल सामग्री को समझाते हैं। हालांकि, समान स्टार्च होने का मतलब यह नहीं कि दोनों से तैयार हर व्यंजन का पोषण भी एक जैसा होगा। तैयार भोजन में इस्तेमाल होने वाली बाकी सामग्री अलग हो सकती है। इसलिए किसी व्यंजन को समझने के लिए केवल उसके एक घटक के बजाय पूरी सामग्री पर ध्यान देना चाहिए।
व्रत में साबूदाना खाने को लेकर सामने आई इन बातों का अर्थ यह नहीं है कि कार्बोहाइड्रेट की शरीर में कोई जरूरत नहीं होती। सवाल भोजन के संतुलन और उसके चुनाव का है। खासकर डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। कार्बोहाइड्रेट की गणना और संतुलित भोजन की योजना ब्लड शुगर प्रबंधन में मदद कर सकती है। ऐसे लोगों को व्रत के दौरान अपने भोजन की योजना व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार बनानी चाहिए। CDC
नवरात्रि के दौरान फलाहार का चुनाव करते समय परंपरा और स्वाद के साथ पोषण को भी महत्व देना जरूरी है। डॉ. जयेश शर्मा और कृष अशोक की टिप्पणियां साबूदाना को बिना सोचे रोज के भोजन का मुख्य आधार बनाने की आदत पर सवाल उठाती हैं। उनकी बातों में साझा बिंदु यह है कि साबूदाना मुख्य रूप से स्टार्च देता है और केवल इसी पर निर्भर रहना संतुलित आहार नहीं है। व्रत में क्या खाया जा रहा है, कितनी मात्रा में खाया जा रहा है और उससे कौन से पोषक तत्व मिल रहे हैं—इन बातों को समझकर भोजन का चुनाव करना अधिक उपयोगी होगा।
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