लाइफ स्टाइल: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। मानसून के मौसम में इस वायरस को फैलाने वाले कीड़ों की सक्रियता बढ़ने के कारण बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक बताया जा रहा है। राज्य में इस वायरस की चपेट में आने से कई बच्चों की मौत की खबर सामने आने के बाद डॉक्टरों ने माता-पिता से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार चांदीपुरा वायरस बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इसका संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह दिमाग और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि बच्चों में दिखाई देने वाले शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जिसकी पहचान सबसे पहले वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। इसी वजह से इसका नाम चांदीपुरा वायरस पड़ा। यह वायरस रैब्डोविरिडे परिवार से संबंधित है और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

इस संक्रमण में दिमाग में सूजन आ सकती है, जिससे मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। खासतौर पर छोटे बच्चों में यह वायरस ज्यादा गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस?

विशेषज्ञों के अनुसार चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई यानी एक छोटे खून चूसने वाले कीड़े के काटने से फैलता है। मानसून के दौरान ऐसे कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसके अलावा कुछ मामलों में टिक्स जैसे कीड़ों की भूमिका भी सामने आई है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह वायरस खांसने, छींकने या सामान्य शारीरिक संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

बच्चों में दिखने वाले प्रमुख लक्षण

चांदीपुरा वायरस के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं और कुछ ही समय में गंभीर हो सकते हैं। बच्चों में इन लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

तेज बुखार आना

सिर में तेज दर्द होना

बार-बार उल्टी होना

कमजोरी और अत्यधिक थकान

मांसपेशियों में दर्द

चिड़चिड़ापन बढ़ना

ज्यादा नींद आना या सुस्ती महसूस होना

दौरे पड़ना

भ्रम की स्थिति पैदा होना

गंभीर स्थिति में बेहोशी आना

डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चे को तेज बुखार के साथ दौरे या असामान्य व्यवहार दिखाई दे तो तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।

किन बच्चों को ज्यादा खतरा?

हालांकि यह वायरस किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है, लेकिन 15 साल से कम उम्र के बच्चों में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है। इसके अलावा ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए जहां सैंड फ्लाई और अन्य कीड़े ज्यादा पाए जाते हैं।

गंदगी वाले क्षेत्रों, खुले नालों और ज्यादा कीड़ों वाले स्थानों पर रहने वाले परिवारों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।

बच्चों को रात में मच्छरदानी लगाकर सुलाएं।

बाहर जाते समय शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं।

कीड़े भगाने वाली दवाओं का इस्तेमाल करें।

घर और आसपास सफाई रखें।

नालियों और गंदे पानी को जमा न होने दें।

ऐसे स्थानों पर जाने से बचें जहां सैंड फ्लाई की संख्या ज्यादा हो।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चांदीपुरा वायरस से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। माता-पिता को बच्चों की सेहत में किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए। समय पर पहचान और इलाज से खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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