टुकड़ों में प्यार और फर्जी अटेंशन! जानिए क्या है नया 'सीगलिंग' डेटिंग ट्रेंड
फर्जी अटेंशन से रहें सावधान, 'सीगलिंग' डेटिंग ट्रेंड के संकेत और बचाव के तरीके
डिजिटल दौर में डेटिंग का तरीका तेजी से बदल रहा है। सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और इंस्टेंट मैसेजिंग ने लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने के अनगिनत अवसर दिए हैं, लेकिन इसके साथ ही रिश्तों में नए-नए व्यवहार और ट्रेंड भी सामने आने लगे हैं। पहले ‘घोस्टिंग’, ‘ब्रेडक्रम्बिंग’, ‘लव बॉम्बिंग’ और ‘बेंचिंग’ जैसे शब्द चर्चा में थे, वहीं अब एक नया डेटिंग ट्रेंड ‘सीगलिंग’ (Seagulling) तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह ट्रेंड उन लोगों के व्यवहार को दर्शाता है जो किसी रिश्ते में पूरी तरह शामिल नहीं होते, लेकिन समय-समय पर सामने आकर दूसरे व्यक्ति को उम्मीद देते रहते हैं। वे न तो रिश्ता खत्म करते हैं और न ही उसे गंभीरता से आगे बढ़ाते हैं। इस तरह वे सामने वाले को भावनात्मक रूप से उलझाए रखते हैं।
क्या है सीगलिंग डेटिंग ट्रेंड?
‘सीगलिंग’ शब्द समुद्र के किनारे उड़ने वाले सीगल पक्षियों के व्यवहार से प्रेरित माना जाता है। जैसे सीगल पक्षी अचानक आते हैं, कुछ देर मंडराते हैं और फिर उड़ जाते हैं, उसी तरह इस ट्रेंड में शामिल व्यक्ति भी अचानक संपर्क करता है, थोड़ी बातचीत करता है, दिलचस्पी दिखाता है और फिर लंबे समय के लिए गायब हो जाता है।
कुछ दिनों या हफ्तों बाद वह फिर से मैसेज, कॉल, लाइक या रिएक्शन देकर यह एहसास दिलाता है कि उसे आपकी परवाह है। लेकिन जब रिश्ता आगे बढ़ाने या जिम्मेदारी निभाने की बात आती है, तो वह फिर दूरी बना लेता है।
क्यों अपनाते हैं लोग यह व्यवहार?
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोग केवल भावनात्मक मान्यता (Validation) चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि सामने वाला अब भी उनके लिए उपलब्ध है। कुछ लोग अकेलापन महसूस होने पर पुराने रिश्तों में लौट आते हैं, जबकि कुछ लोग किसी गंभीर रिश्ते की जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं।
सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स की आसान उपलब्धता ने भी इस व्यवहार को बढ़ावा दिया है, क्योंकि लोगों के पास एक साथ कई विकल्प मौजूद रहते हैं।
सीगलिंग के सामान्य संकेत
व्यक्ति लंबे समय तक गायब रहता है और अचानक संपर्क करता है।
बातचीत की शुरुआत अक्सर वही करता है, लेकिन जल्द ही फिर दूरी बना लेता है।
भविष्य या कमिटमेंट की बात आने पर विषय बदल देता है।
सोशल मीडिया पर आपकी पोस्ट पर लाइक या रिएक्शन देता है, लेकिन वास्तविक बातचीत से बचता है।
जब उसे आपकी जरूरत होती है तभी संपर्क करता है।
रिश्ते को लेकर स्पष्ट जवाब देने से बचता है।
इसका मानसिक प्रभाव
लगातार उम्मीद और निराशा का यह चक्र व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इससे आत्मविश्वास कम हो सकता है, तनाव बढ़ सकता है और व्यक्ति बार-बार यह सोचने लगता है कि आखिर रिश्ते में समस्या कहां है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति लगातार ऐसा व्यवहार कर रहा है, तो भावनात्मक रूप से खुद को सुरक्षित रखना जरूरी है।
कैसे करें सही पार्टनर की पहचान?
एक स्वस्थ रिश्ते की सबसे बड़ी पहचान है निरंतरता, ईमानदारी और सम्मान। यदि कोई व्यक्ति वास्तव में आपके साथ रिश्ता बनाना चाहता है, तो वह नियमित संवाद करेगा, आपके समय और भावनाओं का सम्मान करेगा तथा भविष्य को लेकर स्पष्ट रहेगा।
सही पार्टनर की पहचान के लिए इन बातों पर ध्यान दें—
उसका व्यवहार लगातार एक जैसा हो, केवल सुविधा के अनुसार न बदलता हो।
वह बातचीत में स्पष्ट और ईमानदार हो।
मुश्किल समय में भी संपर्क बनाए रखे।
रिश्ते को लेकर जिम्मेदारी लेने से न बचे।
केवल ऑनलाइन नहीं, वास्तविक जीवन में भी समय और प्रयास लगाए।
आपकी भावनाओं और सीमाओं का सम्मान करे।
सीगलिंग से कैसे बचें?
यदि आपको महसूस हो कि कोई व्यक्ति बार-बार इसी तरह का व्यवहार कर रहा है, तो अपनी भावनात्मक सीमाएं तय करें। बार-बार मिलने वाली अधूरी उम्मीदों के बजाय स्पष्ट बातचीत करें और यदि सामने वाला रिश्ता लेकर गंभीर नहीं है, तो आगे बढ़ने का फैसला लेना बेहतर हो सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी व्यक्ति के शब्दों से ज्यादा उसके व्यवहार पर भरोसा करें। लगातार बदलते संकेतों के बजाय स्थिरता और सम्मान किसी भी स्वस्थ रिश्ते की सबसे महत्वपूर्ण नींव होते हैं।