सावन की पहचान बना जयपुर का मशहूर घेवर राजघराने से जुड़ा है इतिहास
घेवर मिठाई का 300 साल पुराना शाही सफर
लाइफस्टाइल : सावन का महीना आते ही बाजारों में एक खास मिठाई की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगती है। गोल आकार, जालीदार बनावट और ऊपर से सजी मलाई व मेवों से तैयार घेवर सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और परंपरा की पहचान है। खासकर जयपुर में सावन और तीज के त्योहारों के दौरान घेवर की मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है।
कहा जाता है कि जयपुर की स्थापना के समय से ही घेवर राजघरानों की पसंदीदा मिठाइयों में शामिल रहा है। इसकी शुरुआत करीब 1727 में जयपुर शहर की स्थापना के आसपास मानी जाती है। हालांकि इसके इतिहास को लेकर कई लोक मान्यताएं हैं।
राजघराने की रसोई से बाजार तक पहुंचा घेवर
राजस्थान की शाही रसोई में बनने वाली मिठाइयों में घेवर का अलग स्थान रहा है। इसकी खास बनावट और स्वाद ने इसे राजाओं-महाराजाओं की पसंद बना दिया था।
धीरे-धीरे यह मिठाई आम लोगों तक पहुंची और आज राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश में प्रसिद्ध हो चुकी है।
जालीदार बनावट बनाती है खास
घेवर को बनाने की प्रक्रिया भी इसे बाकी मिठाइयों से अलग बनाती है। इसे मैदा, घी और दूध से तैयार किया जाता है। गर्म घी में एक विशेष तरीके से घोल डालकर इसे जालीदार आकार दिया जाता है।
इसके बाद इसे चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है। मलाई घेवर, मावा घेवर और सादा घेवर इसके प्रमुख प्रकार हैं।
सावन और तीज से जुड़ा है खास रिश्ता
राजस्थान में घेवर का संबंध सावन और तीज के त्योहारों से बहुत गहरा है। हरियाली तीज और कजरी तीज के अवसर पर महिलाएं अपने मायके से आए सिंधारे में घेवर जरूर शामिल करती हैं।
मान्यता है कि यह मिठाई खुशियों, प्रेम और रिश्तों की मिठास का प्रतीक है।
जयपुर के बाजारों में बढ़ जाती है मांग
सावन शुरू होते ही जयपुर के मिठाई बाजारों में घेवर की रौनक बढ़ जाती है। पुराने हलवाई आज भी पारंपरिक तरीके से इसे तैयार करते हैं।
जयपुर का घेवर देश-विदेश तक प्रसिद्ध है और पर्यटक भी इसे राजस्थान की खास पहचान के रूप में खरीदते हैं।
बनाने की कला पीढ़ियों से चली आ रही
घेवर बनाने की कला कई हलवाई परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही है। सही तापमान, घोल की मात्रा और तलने की तकनीक ही इसके स्वाद को खास बनाती है।
कई दुकानदार आज भी पुराने तरीकों से घेवर बनाते हैं, जिससे इसका पारंपरिक स्वाद बरकरार है।
मिठाई से ज्यादा संस्कृति की पहचान
घेवर केवल स्वाद की चीज नहीं है बल्कि राजस्थान की परंपरा, त्योहारों और शाही विरासत का हिस्सा है। सावन में इसकी खुशबू बाजारों से लेकर घरों तक पहुंचती है और लोगों को पुराने समय की याद दिलाती है।
जयपुर के राजघराने से जुड़ी यह शाही मिठाई आज भी अपनी पहचान और लोकप्रियता बनाए हुए है।