लाइफ स्टाइल : सोशल मीडिया पर इन दिनों मोबाइल फोन को खाली कांच के गिलास में रखकर सोने का एक अनोखा ट्रेंड वायरल हो रहा है। इस ट्रिक को खास तौर पर ऐसे लोग अपना रहे हैं, जिन्हें सुबह अलार्म सुनकर उठने में परेशानी होती है या जो बार-बार स्नूज बटन दबाकर दोबारा सो जाते हैं। दावा किया जा रहा है कि गिलास में फोन रखने से अलार्म की आवाज ज्यादा स्पष्ट सुनाई देती है और मोबाइल को बिस्तर से दूर रखने की आदत भी विकसित होती है।
इस वायरल ट्रिक के पीछे पहला तर्क अलार्म की आवाज से जुड़ा है। मोबाइल को गद्दे, तकिए या मुलायम सतह पर रखने से उसका स्पीकर आंशिक रूप से ढक सकता है। ऐसे में अलार्म की आवाज दब जाती है और गहरी नींद में सोने वाले व्यक्ति तक ठीक से नहीं पहुंचती। फोन को खाली गिलास में सीधा रखने पर स्पीकर खुला रहता है। कांच की कठोर सतह ध्वनि को परावर्तित कर सकती है, जिससे आवाज कुछ अधिक तेज या स्पष्ट महसूस हो सकती है।
हालांकि आवाज कितनी बढ़ेगी, यह फोन के स्पीकर की स्थिति, गिलास के आकार और मोबाइल रखने के तरीके पर निर्भर करता है। यह किसी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित साउंड एम्प्लीफायर का विकल्प नहीं है। फिर भी सामान्य अलार्म की आवाज कम लगने वाले लोगों के लिए यह एक साधारण प्रयोग हो सकता है।
इस ट्रिक का दूसरा फायदा फोन को बिस्तर से दूर रखना बताया जा रहा है। अगर गिलास को कमरे में किसी सुरक्षित टेबल पर रखा जाए तो अलार्म बंद करने के लिए व्यक्ति को बिस्तर छोड़कर उठना पड़ेगा। चलकर फोन तक पहुंचने और उसे गिलास से निकालने में कुछ अतिरिक्त समय लगेगा। इससे स्नूज दबाकर तत्काल दोबारा सो जाने की आदत टूट सकती है।
फोन को बिस्तर से दूर रखने से देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करने और बार-बार नोटिफिकेशन देखने की आदत भी कम हो सकती है। वर्ष 2020 में प्रकाशित एक छोटे यादृच्छिक अध्ययन में सोने से 30 मिनट पहले मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करने वालों में नींद आने में लगने वाला समय घटने, नींद की अवधि बढ़ने और नींद की गुणवत्ता सुधरने जैसे परिणाम मिले थे। हालांकि अध्ययन में केवल 38 प्रतिभागी शामिल थे, इसलिए इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
रात में फोन पास होने पर कॉल, मैसेज, नोटिफिकेशन और वाइब्रेशन नींद में व्यवधान पैदा कर सकते हैं। मोबाइल दूर रखने से व्यक्ति रात में अचानक नींद खुलने पर स्क्रीन देखने से बच सकता है। इससे नियमित बेडटाइम रूटीन बनाने में सहायता मिल सकती है। स्मार्टफोन के अत्यधिक रात्रिकालीन इस्तेमाल को नींद देर से आने और कुल नींद कम होने से भी जोड़ा गया है।
फोन की स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी भी चर्चा का विषय रहती है। स्क्रीन से निकली रोशनी, विशेष रूप से नीली तरंगें, मेलाटोनिन और शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि शोध यह भी बताता है कि केवल नीली रोशनी ही समस्या नहीं है। सोशल मीडिया, गेम, काम से जुड़े संदेश और भावनात्मक सामग्री भी दिमाग को सक्रिय रखकर नींद आने में देरी कर सकते हैं।
इस ट्रिक को आजमाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। फोन को गिलास में रखकर चार्ज नहीं करना चाहिए, क्योंकि बंद स्थान में गर्मी जमा होने की आशंका रह सकती है। मोबाइल को ऐसे गिलास में भी न रखें जो तंग हो या जिससे फोन निकालते समय गिरने और कांच टूटने का खतरा हो। पानी वाले गिलास में फोन रखने की भूल बिल्कुल न करें।
बेहतर विकल्प के रूप में फोन को मजबूत स्टैंड पर बिस्तर से कुछ दूरी पर रखा जा सकता है। अलार्म की आवाज बढ़ाकर, वाइब्रेशन चालू करके या अलग अलार्म घड़ी का उपयोग करके भी यही उद्देश्य पूरा किया जा सकता है। कुल मिलाकर, वायरल ट्रिक का वास्तविक लाभ गिलास से ज्यादा फोन को बिस्तर से दूर रखने और रात में स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करने में है।