Lifestyle लाइफस्टाइल : बच्चे को कैंसर होने की खबर किसी भी परिवार के लिए बेहद परेशान करने वाली होती है। अक्सर माता-पिता के मन में पहला सवाल यही आता है कि आखिर बच्चे को कैंसर हुआ कैसे? क्या इसके पीछे खान-पान, मोबाइल, प्रदूषण या माता-पिता की कोई गलती है? विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में होने वाले ज्यादातर कैंसर के पीछे कोई एक निश्चित कारण बताना संभव नहीं है। वयस्कों के कैंसर की तुलना में अधिकांश बाल कैंसर का स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं होता। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर साल दुनियाभर में 0 से 19 वर्ष की उम्र के करीब 4 लाख बच्चों और किशोरों में कैंसर का पता चलता है।

सबसे बड़ा कारण क्या है?

कैंसर मूल रूप से शरीर की कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलावों से जुड़ा रोग है। सामान्य कोशिकाएं नियंत्रित तरीके से बढ़ती और विभाजित होती हैं, लेकिन कुछ आनुवंशिक बदलाव होने पर कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और कैंसर विकसित हो सकता है। बच्चों में ऐसे बदलाव कई बार उनके विकास के दौरान स्वाभाविक रूप से होने वाली DNA की गलतियों के कारण भी हो सकते हैं।

यही वजह है कि हर बच्चे के कैंसर के पीछे माता-पिता की गलती या किसी एक आदत को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। डॉक्टरों के लिए भी कई मामलों में यह बताना संभव नहीं होता कि बच्चे की कोशिकाओं में कैंसर पैदा करने वाला बदलाव आखिर क्यों हुआ।

क्या कैंसर माता-पिता से बच्चों में आता है?

कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन हर कैंसर वंशानुगत नहीं होता। WHO के अनुसार लगभग 10 प्रतिशत बच्चों में कैंसर के लिए आनुवंशिक प्रवृत्ति जिम्मेदार हो सकती है। अमेरिकी नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के मुताबिक लगभग 8 से 10 प्रतिशत बाल कैंसर विरासत में मिले हानिकारक आनुवंशिक बदलावों से जुड़े हो सकते हैं।

कुछ दुर्लभ आनुवंशिक सिंड्रोम और जीन में बदलाव बच्चों में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ बच्चों में आंख का कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा विरासत में मिले जीन बदलाव से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, ऐसा होना अपेक्षाकृत दुर्लभ है।

इसलिए अगर परिवार में कई लोगों को कम उम्र में कैंसर हुआ है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार जेनेटिक काउंसलिंग या जांच की सलाह दे सकते हैं।

क्या गर्भावस्था के दौरान कोई कारण हो सकता है?

बच्चे के गर्भ में विकसित होने के दौरान भी कोशिकाओं में आनुवंशिक बदलाव हो सकते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में गर्भावस्था के दौरान आयनाइजिंग रेडिएशन जैसे एक्सपोजर को संभावित जोखिम से जोड़ा गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गर्भावस्था में सामान्य चिकित्सकीय जांच कराने से बच्चे को कैंसर हो जाएगा।

NCI के अनुसार गर्भावस्था के दौरान कुछ प्रकार के रेडिएशन एक्सपोजर और जन्म के बाद कुछ चिकित्सकीय रेडिएशन एक्सपोजर के बीच कुछ कैंसर के जोखिम में हल्की वृद्धि देखी गई है। इसलिए डॉक्टर हमेशा जरूरत और लाभ-हानि को देखते हुए जांच की सलाह देते हैं।

क्या संक्रमण से भी बच्चों में कैंसर हो सकता है?

कुछ क्रॉनिक संक्रमण बच्चों में कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से जुड़े हैं। WHO के अनुसार HIV, Epstein-Barr virus और malaria जैसे संक्रमण कुछ परिस्थितियों में बाल कैंसर के जोखिम से संबंधित हो सकते हैं, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इन संक्रमणों से प्रभावित हर बच्चे को कैंसर होगा। संक्रमण और कैंसर के बीच संबंध जटिल होता है और कई अन्य जैविक कारक भी भूमिका निभाते हैं।

क्या प्रदूषण, तंबाकू या खराब खान-पान जिम्मेदार हैं?

वयस्कों में तंबाकू, शराब, मोटापा और लंबे समय तक कुछ पर्यावरणीय जोखिम कैंसर के महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं। लेकिन बच्चों के मामले में तस्वीर अलग है। WHO का कहना है कि बहुत कम बाल कैंसर पर्यावरण या जीवनशैली से जुड़े होते हैं।

NCI के अनुसार कुछ पर्यावरणीय पदार्थ DNA में बदलाव से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन बच्चों में कैंसर के अधिकांश मामलों में यह स्पष्ट करना मुश्किल होता है कि कौन-सा एक्सपोजर वास्तव में बीमारी का कारण बना।

इसलिए किसी बच्चे को कैंसर होने पर माता-पिता को खुद को दोषी नहीं मानना चाहिए।

बच्चों में कौन-कौन से कैंसर ज्यादा होते हैं?

बच्चों में कैंसर के कई प्रकार हो सकते हैं। WHO के अनुसार ल्यूकेमिया, ब्रेन ट्यूमर और कुछ ठोस ट्यूमर, जैसे न्यूरोब्लास्टोमा और विल्म्स ट्यूमर, प्रमुख प्रकारों में शामिल हैं। किशोरों में लिम्फोमा, हड्डियों के कैंसर और थायरॉयड कैंसर भी देखे जाते हैं।

हर कैंसर के लक्षण अलग हो सकते हैं और सामान्य लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए किसी एक लक्षण को देखकर कैंसर का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

WHO के अनुसार बच्चों में लंबे समय तक रहने वाला बुखार, तेज या लगातार सिरदर्द, हड्डियों में दर्द और वजन कम होना जैसे लक्षण चेतावनी संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा शरीर में असामान्य गांठ या सूजन, लगातार कमजोरी, असामान्य रक्तस्राव, बार-बार संक्रमण या बच्चे के व्यवहार और स्वास्थ्य में लगातार बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

ध्यान रखें कि इनमें से किसी भी लक्षण का मतलब सीधे कैंसर नहीं है। बच्चों में ऐसे लक्षण कई सामान्य बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं। चिंता तब ज्यादा होती है जब कोई समस्या लगातार बनी रहे, बढ़ती जाए या सामान्य इलाज से ठीक न हो।

समय पर जांच क्यों जरूरी है?

बाल कैंसर में सबसे महत्वपूर्ण बात है सही और समय पर निदान। WHO के मुताबिक जल्दी पहचान और सही उपचार से बच्चों के ठीक होने की संभावना बढ़ती है। कई देशों में जहां व्यापक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध है, वहां 80 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों के कैंसर ठीक हो सकते हैं।

इसलिए किसी बच्चे में लंबे समय से असामान्य लक्षण दिखाई दे रहे हों तो घरेलू उपचार या इंटरनेट की जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चे को बाल कैंसर विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं।

क्या बच्चों में कैंसर से बचाव संभव है?

बच्चों में कैंसर की रोकथाम वयस्कों के कैंसर से अलग है। चूंकि ज्यादातर मामलों का कारण ज्ञात नहीं होता, इसलिए हर बाल कैंसर को रोक पाना संभव नहीं है। WHO भी कहता है कि बच्चों में सामान्य आबादी के लिए कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम आम तौर पर उपयोगी नहीं हैं। कुछ विशेष आनुवंशिक जोखिम वाले परिवारों में डॉक्टर निगरानी या जेनेटिक काउंसलिंग की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष: बच्चों में कैंसर का सबसे बड़ा सच यही है कि अधिकांश मामलों में इसका कोई एक निश्चित कारण नहीं मिलता। कोशिकाओं में अचानक होने वाले आनुवंशिक बदलाव, कुछ दुर्लभ वंशानुगत स्थितियां और कुछ संक्रमण या विशेष एक्सपोजर जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए बच्चे को कैंसर होने पर माता-पिता को दोषी ठहराना बिल्कुल उचित नहीं है। लगातार या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर समय पर डॉक्टर से जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। शुरुआती पहचान और उचित उपचार से कई बच्चों के ठीक होने की अच्छी संभावना रहती है।

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