लाइफ स्टाइल : सावन के महीने में सोमवार व्रत रखने वाले लोग फलाहार के रूप में कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी, पकौड़ी, चीला और अन्य व्यंजन खाना पसंद करते हैं। कुट्टू का आटा व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा देने के साथ पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। यही वजह है कि सावन में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। लेकिन बढ़ती मांग के बीच मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर कुट्टू का मिलावटी आटा खा लिया जाए तो सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
कुछ समय पहले मिलावटी कुट्टू का आटा खाने से कई लोगों के बीमार होने के मामले सामने आ चुके हैं। लोगों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त और कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। ऐसे में व्रत के लिए कुट्टू का आटा खरीदते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। बाजार में असली दिखने वाला नकली या मिलावटी आटा भी मिल सकता है। इसलिए खरीदने से पहले इसकी पहचान करना जरूरी है।
कुट्टू के आटे में मिलावट करने के लिए कई बार अखरोट, अरारोट, मैदा या सिंघाड़े का आटा मिलाया जाता है। देखने में यह आटा सामान्य कुट्टू जैसा ही नजर आता है, लेकिन खाने के बाद शरीर पर इसका गलत असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान घरेलू तरीकों से कुट्टू के आटे की शुद्धता की जांच की जा सकती है।
रंग और बनावट से करें पहचान
असली कुट्टू के आटे का रंग हल्का भूरा या ग्रे जैसा होता है। इसे हाथ में लेने पर यह हल्का दानेदार, मुलायम और थोड़ा चिपचिपा महसूस हो सकता है। वहीं नकली या मिलावटी कुट्टू का आटा अक्सर ज्यादा सफेद दिखाई देता है। इसे छूने पर इसमें खुरदुरापन महसूस हो सकता है। हालांकि सिर्फ रंग देखकर पूरी तरह पहचान करना मुश्किल है, इसलिए अन्य तरीकों से भी जांच करनी चाहिए।
पानी से करें कुट्टू के आटे की जांच
मिलावट पहचानने का एक आसान तरीका पानी की मदद से किया जा सकता है। इसके लिए एक कटोरी पानी लें और उसमें दो से तीन चम्मच कुट्टू का आटा डालें। अगर आटा असली है तो वह धीरे-धीरे कटोरी के नीचे बैठ जाएगा। वहीं मिलावटी आटा पानी में जल्दी घुलने लगेगा या सफेद परत जैसा दिखाई दे सकता है।
इसके अलावा आयोडीन टिंचर की मदद से भी जांच की जाती है। असली कुट्टू के आटे में आयोडीन डालने पर रंग में बदलाव नहीं होता। जबकि अगर इसमें कुछ अन्य स्टार्च वाली चीजों की मिलावट है तो रंग बदल सकता है।
तेल से भी कर सकते हैं पहचान
कुट्टू के आटे की शुद्धता जांचने के लिए तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। अगर आटा असली है तो तेल में मिलाने पर सामान्य रूप से घुल जाएगा और ज्यादा गांठें नहीं बनाएगा। वहीं मिलावटी आटा तेल के संपर्क में आने पर थक्के या गांठें बना सकता है।
खरीदारी करते समय रखें इन बातों का ध्यान
अगर आप खुला कुट्टू का आटा खरीद रहे हैं तो सबसे पहले उसका रंग, गंध और बनावट जरूर देखें। बहुत ज्यादा सफेद या अजीब गंध वाला आटा खरीदने से बचें। वहीं पैकेट बंद आटा खरीदते समय लेबल जरूर जांचें। पैकेट पर कंपनी का नाम, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और FSSAI का लाइसेंस मार्क देखना जरूरी है।
व्रत के दौरान खानपान में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। इसलिए सावन में कुट्टू का आटा खरीदते समय जल्दबाजी न करें और उसकी गुणवत्ता की जांच जरूर करें। सही और शुद्ध आटे का इस्तेमाल करके ही व्रत के व्यंजनों का आनंद लें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।