लाइफ स्टाइल। अगर आप रोजाना रोटी-सब्जी और चावल खाकर बोर हो गए हैं और कुछ पारंपरिक व स्वादिष्ट खाना चाहते हैं, तो राजस्थान और मालवा क्षेत्र की मशहूर बाफला बाटी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। खासकर मध्य प्रदेश के इंदौर और आसपास के इलाकों में दाल बाफला खूब पसंद किया जाता है। इसे घी, दाल, चटनी और चूरमे के साथ परोसा जाता है। देखने में यह दाल बाटी जैसी लगती है, लेकिन इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है। बाफला बाटी को पहले पानी में उबाला जाता है और फिर घी लगाकर बेक या सेंका जाता है। इसी प्रक्रिया से इसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा और अंदर का भाग नरम रहता है। आइए जानते हैं घर पर स्वादिष्ट बाफला बाटी बनाने की आसान रेसिपी।
क्या है बाफला बाटी और दाल बाटी से कैसे अलग है?
बाफला बाटी राजस्थान और मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की पारंपरिक डिश है। इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में इसे दाल के साथ परोसा जाता है। यह खाने में भरपूर और स्वाद में लाजवाब होती है।
दाल बाटी में बाटी को आमतौर पर सीधे सेंककर या बेक करके पकाया जाता है, जबकि बाफला बाटी को पहले पानी में उबाला जाता है। इसके बाद इसे घी लगाकर ओवन, तंदूर या कड़ाही में सुनहरा और कुरकुरा किया जाता है।
उबालने की वजह से बाफला बाटी अंदर तक अच्छी तरह पकती है और इसका टेक्सचर भी अलग होता है। इसे तोड़कर ऊपर से घी डालने और दाल के साथ खाने का अपना ही मजा है।
बाफला बाटी बनाने के लिए जरूरी सामग्री
घर पर बाफला बाटी बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। अधिकतर चीजें आपकी रसोई में आसानी से मिल जाती हैं।
बाटी के लिए सामग्री:
- 2 कप गेहूं का आटा
- 2 बड़े चम्मच सूजी, वैकल्पिक
- 3 बड़े चम्मच घी या तेल
- आधा छोटा चम्मच अजवाइन
- स्वादानुसार नमक
- जरूरत के अनुसार पानी
परोसने के लिए:
- 1 कप अरहर या मूंग-मसूर की दाल
- घी
- हरी चटनी या लहसुन की चटनी
- प्याज और नींबू, इच्छानुसार
स्टेप 1: सबसे पहले गूंथ लें आटा
एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें। इसमें सूजी, अजवाइन, नमक और घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए थोड़ा सख्त आटा गूंथ लें।आटा न तो बहुत नरम होना चाहिए और न ही इतना सख्त कि उससे बाटी बनाना मुश्किल हो जाए। आटा तैयार होने के बाद इसे लगभग 15 मिनट तक ढककर रख दें।
इसके बाद आटे की बराबर आकार की लोइयां बना लें। प्रत्येक लोई को गोल करें और बीच में अंगूठे से हल्का दबाव देकर छोटा-सा गड्ढा बना दें। इससे बाटी को समान रूप से पकाने में मदद मिल सकती है।
स्टेप 2: बाटियों को पानी में उबालें
अब एक बड़े बर्तन में पर्याप्त पानी गर्म करें। पानी में उबाल आने पर तैयार बाटियों को सावधानी से डालें।इन्हें मध्यम आंच पर तब तक पकाएं, जब तक बाटियां ऊपर तैरने न लगें और अच्छी तरह पक न जाएं। इनके आकार के अनुसार लगभग 10 से 15 मिनट लग सकते हैं।
इसके बाद बाटियों को पानी से निकालकर छलनी में रख दें, ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए। उन्हें थोड़ी देर ठंडा होने दें और सतह को सूखने दें।यही प्रक्रिया बाफला बाटी को सामान्य बाटी से अलग बनाती है। उबालने से इसका अंदरूनी हिस्सा नरम और अच्छी तरह पका हुआ रहता है।
स्टेप 3: बाटियों को कुरकुरा बनाएं
अब उबली हुई बाटियों पर हल्का घी लगाएं। इसके बाद उन्हें ओवन में लगभग 180 से 200 डिग्री सेल्सियस पर 15 से 20 मिनट तक बेक करें। बीच में पलट दें, ताकि दोनों तरफ सुनहरा रंग आ जाए।अगर आपके पास ओवन नहीं है, तो मोटे तले वाली कड़ाही में नमक की परत बिछाकर उसके ऊपर स्टैंड रखें। बाटियों को स्टैंड पर रखकर ढक दें और धीमी आंच पर पकाएं। समय-समय पर पलटते रहें।बाटी बाहर से सुनहरी और हल्की कुरकुरी हो जाए, तो उसे निकाल लें। पकने का समय बाटी के आकार और इस्तेमाल किए गए उपकरण के अनुसार बदल सकता है।
स्टेप 4: स्वादिष्ट दाल तैयार करें
बाफला बाटी के साथ दाल का स्वाद इसे और खास बना देता है। इसके लिए अरहर, मूंग या मसूर की दाल का इस्तेमाल कर सकते हैं।दाल को अच्छी तरह धोकर कुकर में हल्दी और पानी के साथ नरम होने तक पकाएं। एक पैन में घी गर्म करें और उसमें जीरा, हींग, लहसुन, सूखी लाल मिर्च और बारीक कटा टमाटर डालकर भूनें।तैयार तड़के को दाल में मिलाएं। जरूरत के अनुसार नमक और पानी डालकर कुछ मिनट उबालें। अंत में हरा धनिया डाल दें।
स्टेप 5: घी के साथ गर्मागर्म करें सर्व
अब गर्म बाफला बाटी को हल्का तोड़ें और ऊपर से थोड़ा घी डालें। इसके साथ गरम दाल, हरी चटनी या लहसुन की चटनी परोसें।स्वाद बढ़ाने के लिए प्याज, नींबू और हरी मिर्च भी साथ रख सकते हैं। अगर पारंपरिक मालवी अंदाज में भोजन करना चाहते हैं, तो इसके बाद थोड़ा चूरमा भी परोस सकते हैं।बाफला बाटी को स्वादिष्ट बनाने के लिए खास टिप्स
बाटी का आटा गूंथते समय पर्याप्त घी डालने से उसका टेक्सचर बेहतर हो सकता है। हालांकि, बहुत अधिक घी डालने से भोजन में कैलोरी और वसा की मात्रा बढ़ती है, इसलिए अपनी जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करें।
उबालने के बाद बाटियों का अतिरिक्त पानी निकालना जरूरी है। इससे सेंकते समय उनकी सतह बेहतर तरीके से कुरकुरी हो सकती है।दाल को बहुत गाढ़ा न रखें, ताकि बाटी के साथ उसे आसानी से खाया जा सके। वहीं, दाल में तड़का हमेशा परोसने से पहले देने पर स्वाद और खुशबू अच्छी रहती है।
क्या बाफला बाटी हेल्दी होती है?
बाफला बाटी गेहूं के आटे से बनाई जाती है, इसलिए इससे कार्बोहाइड्रेट और कुछ मात्रा में फाइबर मिलता है। दाल के साथ खाने पर भोजन में प्रोटीन भी शामिल हो जाता है।हालांकि, बाटी में घी की मात्रा अधिक होने पर कैलोरी और संतृप्त वसा बढ़ सकती है। इसलिए संतुलित मात्रा में घी इस्तेमाल करना और साथ में दाल व अन्य पौष्टिक चीजें शामिल करना बेहतर है।
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