लाइफस्टाइल। बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए खुशियों और नई उम्मीदों से भरा समय होता है। माता-पिता बनने का एहसास पति-पत्नी की जिंदगी को पूरी तरह बदल देता है। घर में नन्हे मेहमान के आने से जहां खुशियां बढ़ती हैं, वहीं नई जिम्मेदारियां भी शुरू हो जाती हैं। बच्चे की देखभाल, रात में बार-बार जागना, घर के काम और नौकरी के बीच संतुलन बनाना कई बार मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस, गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। कई बार दोनों एक-दूसरे से प्यार तो करते हैं, लेकिन थकान और समय की कमी के कारण अपनी भावनाएं ठीक से व्यक्त नहीं कर पाते।
रिश्तों के जानकारों के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद दंपती के जीवन में बदलाव आना सामान्य है। हालांकि, यदि दोनों एक-दूसरे की जरूरतों को समझें और मिलकर जिम्मेदारियां निभाएं, तो इस नए दौर में भी अपने रिश्ते को मजबूत बनाए रख सकते हैं।
1. नींद पूरी न होने से बढ़ सकता है गुस्सा
नवजात शिशु की देखभाल के दौरान माता-पिता की नींद अक्सर पूरी नहीं हो पाती। बच्चे को दूध पिलाना, डायपर बदलना और रात में बार-बार उठना रोजमर्रा का हिस्सा बन जाता है।लगातार नींद की कमी से थकान, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। इसका असर पति-पत्नी की बातचीत पर भी दिखाई देता है।ऐसी स्थिति में दोनों को एक-दूसरे की नींद का ध्यान रखना चाहिए। जहां संभव हो, बच्चे की देखभाल के लिए बारी-बारी से जिम्मेदारी संभालें।यदि मां रात में अधिक समय तक जागती है, तो पिता सुबह बच्चे को संभालकर उसे आराम करने का मौका दे सकता है। इसी तरह दोनों अपनी परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्था बना सकते हैं।
2. घर और बच्चे की जिम्मेदारियां मिलकर निभाएं
बच्चे के जन्म के बाद कई परिवारों में देखभाल की अधिकांश जिम्मेदारी मां पर आ जाती है।बच्चे को संभालने के साथ घर के काम और अन्य जिम्मेदारियां निभाना शारीरिक तथा मानसिक रूप से थका सकता है।ऐसे में पति का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है।बच्चे को नहलाना, कपड़े बदलना, सुलाना, घर की सफाई करना और जरूरी सामान लाना जैसे काम दोनों मिलकर कर सकते हैं।जिम्मेदारियों का संतुलित बंटवारा होने से किसी एक व्यक्ति पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता और आपसी नाराजगी कम हो सकती है।
3. एक-दूसरे से खुलकर बात करना जरूरी
बच्चे के आने के बाद कई बार पति-पत्नी अपनी परेशानियां खुलकर नहीं बता पाते।एक साथी को लग सकता है कि दूसरा उसकी मेहनत नहीं समझ रहा, जबकि दूसरे को महसूस हो सकता है कि उसे पर्याप्त समय और महत्व नहीं मिल रहा।इस तरह की गलतफहमियां धीरे-धीरे रिश्ते में दूरी पैदा कर सकती हैं।इसलिए रोजाना कुछ समय निकालकर एक-दूसरे से बातचीत करना जरूरी है।अपनी परेशानी बताते समय आरोप लगाने के बजाय अपनी भावनाएं व्यक्त करें।उदाहरण के लिए, 'तुम मेरी मदद नहीं करते' कहने की जगह 'मुझे आज बहुत थकान हो रही है, क्या तुम कुछ देर बच्चे को संभाल सकते हो?' कहना अधिक उपयोगी हो सकता है।
4. बच्चे के साथ पार्टनर को भी दें समय
माता-पिता बनने के बाद ज्यादातर समय बच्चे की देखभाल में बीतने लगता है।ऐसे में पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ पहले की तरह समय नहीं बिता पाते।हालांकि, रिश्ते में प्यार और भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने के लिए साथ में समय बिताना जरूरी है।इसके लिए हर बार बाहर घूमने या किसी खास योजना की जरूरत नहीं होती।बच्चे के सो जाने के बाद साथ बैठकर चाय पीना, दिनभर की बातें साझा करना या पसंदीदा कार्यक्रम देखना भी रिश्ते में नजदीकियां बढ़ा सकता है।यदि परिवार में भरोसेमंद व्यक्ति की मदद उपलब्ध हो, तो कभी-कभी दोनों थोड़ी देर साथ बाहर भी जा सकते हैं।
5. छोटी-छोटी बातों पर बहस करने से बचें
बच्चे की देखभाल के दौरान थकान और तनाव के कारण मामूली बातों पर भी गुस्सा आ सकता है।कभी दूध की बोतल रखने की जगह को लेकर बहस हो सकती है, तो कभी घर का कोई काम समय पर नहीं होने से नाराजगी बढ़ सकती है।ऐसी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय थोड़ी देर शांत होना बेहतर हो सकता है।यदि दोनों में से कोई बहुत थका हुआ है, तो महत्वपूर्ण बातचीत बाद में करना उपयोगी रहेगा।एक-दूसरे की गलती निकालने के बजाय समस्या का समाधान ढूंढने पर ध्यान देना चाहिए।साथ ही, अपमानजनक भाषा और लगातार आलोचना से बचना जरूरी है।
6. प्यार जताने के छोटे तरीके अपनाएं
बच्चे के जन्म के बाद पति-पत्नी की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि रिश्ते में प्यार कम हो गया है।कई बार प्यार जताने के लिए समय और ऊर्जा कम बचती है।ऐसे में छोटे-छोटे प्रयास रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं।पार्टनर के काम की तारीफ करना, उसकी पसंद का खाना बनाना, दिनभर की मेहनत के लिए धन्यवाद कहना या मुश्किल समय में उसका साथ देना रिश्ते में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।शारीरिक नजदीकियों के मामले में भी दोनों की सहजता और सहमति महत्वपूर्ण है। प्रसव के बाद शारीरिक रिकवरी में समय लग सकता है, इसलिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहिए।
7. जरूरत पड़ने पर परिवार या विशेषज्ञ की मदद लें
नए माता-पिता अक्सर यह सोचते हैं कि उन्हें सारी जिम्मेदारियां खुद ही संभालनी चाहिए।लेकिन जरूरत पड़ने पर परिवार के भरोसेमंद सदस्यों या दोस्तों से मदद लेना गलत नहीं है।यदि कोई कुछ समय के लिए बच्चे की देखभाल कर सकता है, तो माता-पिता को आराम करने का अवसर मिल सकता है।वहीं, यदि पति-पत्नी के बीच लगातार तनाव, बातचीत बंद होना या गंभीर मतभेद बने रहें, तो कपल काउंसलर की मदद ली जा सकती है।
प्रसव के बाद लंबे समय तक उदासी, अत्यधिक चिंता, निराशा या सामान्य काम करने में कठिनाई महसूस होना मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
बच्चे के आने के बाद रिश्ते को समझदारी से संभालें
बच्चे का जन्म पति-पत्नी के रिश्ते में एक नया अध्याय शुरू करता है। इस दौरान जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और दोनों की दिनचर्या बदल जाती है।शुरुआती महीनों में थकान, तनाव और समय की कमी होना असामान्य नहीं है। लेकिन एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना और मिलकर चुनौतियों का सामना करना रिश्ते को मजबूत बना सकता है।
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