कांग्रेस की 1 नवंबर की महारैली पर व्यापारियों ने जताई चिंता, सोनिया गांधी से कार्यक्रम टालने की अपील
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियों के साथ व्यापारिक हलकों में भी चिंता बढ़ गई है। दिल्ली चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से रामलीला मैदान में होने वाली रैली को स्थगित करने की अपील की है। व्यापारी संगठन का कहना है कि दिवाली की खरीदारी के महत्वपूर्ण समय में इतनी बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित होने से आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। संगठन ने दावा किया है कि रैली के कारण लगभग 20 प्रमुख बाजारों में 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। सीटीआई ने कार्यक्रम को 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित करने अथवा रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल की रैली का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि त्योहारों के दौरान व्यापारियों और ग्राहकों को होने वाली संभावित परेशानियों को लेकर चिंतित है।
दिल्ली चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी मांग रखी। संगठन ने कहा कि नवंबर की शुरुआत राजधानी के व्यापारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान दिवाली की खरीदारी बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में ग्राहक कपड़े, सजावटी सामान, मिठाइयां, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपहार खरीदने के लिए बाजार पहुंचते हैं। ऐसे समय में मध्य दिल्ली के व्यस्त इलाके में बड़ी राजनीतिक सभा होने से वाहनों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंच प्रभावित होने की आशंका है।
व्यापारी संगठन ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से आग्रह किया कि वे व्यापारियों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की तारीख या स्थान बदलने पर विचार करें। संगठन ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रस्तावित रैली को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है।
सीटीआई का कहना है कि रैली में लगभग 10 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि यह आयोजकों से जुड़ा अनुमान है और वास्तविक उपस्थिति कार्यक्रम के दिन ही स्पष्ट होगी। यदि बड़ी संख्या में लोग रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में पहुंचते हैं, तो यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
रामलीला मैदान मध्य दिल्ली के प्रमुख स्थानों में शामिल है। इसके आसपास सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, अजमेरी गेट, आसफ अली रोड और अन्य बड़े व्यापारिक क्षेत्र स्थित हैं। इन इलाकों में रोजाना हजारों व्यापारी और ग्राहक पहुंचते हैं। त्योहारों के दौरान यहां सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ रहती है।
व्यापारी संगठन की चिंता है कि रैली में शामिल होने वाले लोगों और वाहनों की बड़ी संख्या के कारण आसपास की सड़कों पर यातायात जाम लग सकता है। यदि पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लागू करती है, तो उसका असर ग्राहकों और माल ढुलाई करने वाले वाहनों पर भी पड़ सकता है।
सीटीआई ने आशंका जताई है कि बाजारों में पहुंचने वाले ग्राहकों को पार्किंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा सामान की आपूर्ति करने वाले छोटे-बड़े मालवाहक वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारिक गतिविधियों में रुकावट आ सकती है।
दिल्ली के प्रमुख थोक बाजारों में केवल स्थानीय ग्राहक ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों के व्यापारी भी खरीदारी करने आते हैं। दिवाली से पहले बड़ी संख्या में कारोबारी अपने प्रतिष्ठानों के लिए सामान खरीदते हैं। ऐसे में यातायात और पार्किंग संबंधी समस्याओं से बाजारों में खरीदारी प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
व्यापारी संगठन ने दावा किया है कि रैली के कारण करीब 20 बाजारों में 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है। हालांकि यह सीटीआई का अनुमान है, न कि वास्तविक रूप से दर्ज आर्थिक नुकसान। रैली अभी आयोजित नहीं हुई है और संभावित नुकसान के आकलन की विस्तृत पद्धति भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
सीटीआई ने अपनी अपील में कहा है कि वह दिल्ली के लगभग 20 लाख व्यापारियों की चिंताओं को सामने रख रहा है। संगठन का कहना है कि राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन बड़े आयोजनों की योजना बनाते समय स्थानीय कारोबारियों तथा आम नागरिकों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
व्यापारियों ने रैली को 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित करने का सुझाव दिया है। संगठन का तर्क है कि इससे दिवाली की प्रमुख खरीदारी अवधि के दौरान संभावित व्यवधान से बचा जा सकेगा। इसके अलावा कार्यक्रम को बुराड़ी मैदान में स्थानांतरित करने की मांग भी की गई है।
सीटीआई का मानना है कि बुराड़ी में कार्यक्रम आयोजित करने से मध्य दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों पर दबाव कम किया जा सकता है। हालांकि किसी भी वैकल्पिक स्थल पर इतने बड़े आयोजन के लिए यातायात प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग और प्रशासनिक अनुमतियों की आवश्यकता होगी।
कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर राजनीतिक तैयारियां भी जारी हैं। पार्टी नेतृत्व इसे अपनी राजनीतिक मांगों और मुद्दों को जनता के सामने रखने के अवसर के रूप में देख रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण रैली और सभा आयोजित करने का अधिकार प्राप्त है। दूसरी ओर व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की आवाजाही तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ऐसी परिस्थितियों में रैली के आयोजन और बाजारों की सामान्य गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक माना जा रहा है। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात की वैकल्पिक व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और निर्धारित पार्किंग सुविधाएं संभावित परेशानियों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
दिल्ली में त्योहारों के दौरान बाजारों में अधिक भीड़ होने के कारण व्यापारिक संगठनों की ओर से अक्सर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने की मांग की जाती रही है। भीड़भाड़ वाले बाजारों में मालवाहक वाहनों, ग्राहकों और पैदल यात्रियों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना प्रशासन के लिए चुनौती होती है।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल पहले भी राजनीतिक प्रदर्शनों और बड़े आयोजनों के कारण व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर कर चुके हैं। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सामने आई एक पूर्व अपील में भी उन्होंने राहुल गांधी से प्रस्तावित रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने तथा बाहरी दिल्ली में वैकल्पिक स्थान चुनने का आग्रह किया था।
अब व्यापारियों की नजर कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि पार्टी रैली की तारीख या स्थान बदलने पर विचार करेगी अथवा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजन करेगी।
इसके अलावा दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों की ओर से यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी किए जाने वाले निर्देश भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि रैली निर्धारित स्थल पर आयोजित होती है, तो आसपास के बाजारों में आने-जाने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक मार्ग और पार्किंग संबंधी जानकारी उपयोगी साबित होगी।
फिलहाल सीटीआई ने साफ किया है कि उसकी अपील राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए की गई है। संगठन चाहता है कि दिवाली के महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बाजारों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों। अब यह देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व व्यापारियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और प्रशासन संभावित भीड़ तथा यातायात संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए कैसी व्यवस्था तैयार करता है।