कर्नाटक

पैक्ड पानी बनाने वाली 24 कंपनियों पर बड़ा एक्शन, 45 यूनिटों में छापेमारी

Kavita2
30 Oct 2026 11:20 AM IST
पैक्ड पानी बनाने वाली 24 कंपनियों पर बड़ा एक्शन, 45 यूनिटों में छापेमारी
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बेंगलुरु। कर्नाटक में पैक्ड पीने के पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा अभियान शुरू किया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेशभर में पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर बनाने वाली इकाइयों के खिलाफ विशेष निरीक्षण अभियान चलाते हुए 45 निर्माण इकाइयों की जांच की है। इस दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 24 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए 32 नमूने सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को इस कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कई प्रतिष्ठानों में गंदगी, कर्मचारियों के आवश्यक मेडिकल प्रमाणपत्रों की कमी, खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और पैकेजिंग संबंधी नियमों का उल्लंघन सामने आया है। कोलार जिले के मुलबागल में अस्वच्छ परिस्थितियों में संचालित एक पानी निर्माण इकाई को बंद कराया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाली इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

राज्य सरकार की ओर से शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बाजार में बेचे जा रहे पैक्ड पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। आमतौर पर लोग बोतलबंद पानी को सुरक्षित मानकर खरीदते हैं, लेकिन यदि पानी का उत्पादन और पैकिंग निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं की जाए तो इससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निर्माण इकाइयों की जांच का निर्णय लिया है।

स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर के अनुसार, गुरुवार को राज्य के विभिन्न जिलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की 23 विशेष टीमों को निरीक्षण के लिए लगाया गया। इन टीमों ने पैक्ड पीने के पानी का निर्माण करने वाली कुल 45 इकाइयों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया, कर्मचारियों की स्वच्छता, निर्माण परिसर की स्थिति और आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता की पड़ताल की गई।

अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान अलग-अलग इकाइयों से पानी के 32 नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को सरकारी खाद्य प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया है। प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नमूने निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

विभाग ने बताया कि जांच के दौरान कई इकाइयों में स्वच्छता संबंधी गंभीर कमियां सामने आईं। कुछ स्थानों पर उत्पादन परिसर साफ-सुथरा नहीं मिला, जबकि कुछ इकाइयों में कर्मचारियों के आवश्यक स्वास्थ्य प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं थे। खाद्य उत्पादों के निर्माण में कर्मचारियों का स्वास्थ्य और स्वच्छता महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि लापरवाही से उत्पाद के दूषित होने की आशंका बढ़ सकती है।

इसके अलावा कुछ निर्माण इकाइयों में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई से संबंधित आवश्यक लाइसेंस उपलब्ध नहीं पाए गए। अधिकारियों को पैकिंग और लेबलिंग से जुड़ी खामियां भी मिलीं। कुछ प्रतिष्ठानों में कीट नियंत्रण के आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं थे।

इन अनियमितताओं को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने 24 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। संबंधित इकाइयों से नियमों के उल्लंघन को लेकर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

अभियान के दौरान मैसूरु और दावणगेरे की कुछ इकाइयों में पैकेजिंग तथा लेबलिंग संबंधी नियमों का उल्लंघन सामने आया। अधिकारियों ने ऐसी तीन इकाइयों से नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए पैक्ड पानी के उत्पाद जब्त किए। विभाग अब संबंधित इकाइयों के दस्तावेजों और उत्पादों की जांच कर रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई कोलार जिले के मुलबागल क्षेत्र में की गई। यहां एक पैक्ड पानी निर्माण इकाई में अस्वच्छ परिस्थितियां मिलने पर अधिकारियों ने उसका संचालन बंद करा दिया। विभाग का कहना है कि पानी जैसे आवश्यक खाद्य उत्पाद के निर्माण में स्वच्छता संबंधी मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विशेष अभियान शुक्रवार, 30 अक्टूबर को भी जारी रहेगा। इसके तहत अन्य निर्माण इकाइयों की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन मिलने पर आवश्यक कार्रवाई होगी। विभाग ने संकेत दिया है कि इस प्रकार के निरीक्षण आगे भी नियमित रूप से किए जाएंगे।

पैक्ड पीने के पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहरों और कस्बों में कार्यालयों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बोतलबंद पानी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। गर्मी और यात्रा के दौरान भी लोग पैक्ड पानी पर निर्भर रहते हैं।

ऐसे में यदि किसी निर्माण इकाई में पानी का पर्याप्त शुद्धिकरण नहीं किया जाता या पैकिंग के समय स्वच्छता संबंधी सावधानियां नहीं बरती जातीं तो दूषित पानी के बाजार तक पहुंचने का जोखिम हो सकता है। असुरक्षित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन के प्रत्येक चरण में सावधानी बरतना जरूरी है। पानी के स्रोत से लेकर शुद्धिकरण, भंडारण, बोतल की सफाई और अंतिम पैकिंग तक निर्धारित स्वच्छता मानकों का पालन आवश्यक होता है। इसके साथ ही समय-समय पर प्रयोगशाला परीक्षण भी किया जाना चाहिए।

हालांकि वर्तमान अभियान में लिए गए 32 नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। इसलिए सभी नोटिस प्राप्त इकाइयों के पानी को दूषित या पीने के लिए असुरक्षित घोषित करना उचित नहीं होगा। अभी तक सामने आई कार्रवाई मुख्य रूप से निरीक्षण के दौरान पाई गई प्रशासनिक, स्वच्छता और पैकेजिंग संबंधी अनियमितताओं पर आधारित है।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने उपभोक्ताओं को भी पैक्ड पानी खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे बोतल पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, निर्माण की तारीख, आवश्यक गुणवत्ता चिह्न और पैकिंग की स्थिति की जांच करें। बोतल की सील टूटी होने या पानी में असामान्य गंध तथा रंग दिखाई देने पर उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

विभाग के अनुसार, उपभोक्ता किसी संदिग्ध उत्पाद की शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से कर सकते हैं। इससे बाजार में नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार की इस कार्रवाई से पैक्ड पानी के कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी स्पष्ट संदेश मिला है कि लाइसेंस और स्वच्छता मानकों का पालन करना आवश्यक है। केवल पानी की बोतल पर आकर्षक लेबल लगाने या उसे शुद्ध बताने से गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए उत्पादन प्रक्रिया में आवश्यक सावधानियां बरतना जरूरी है।

फिलहाल 45 इकाइयों के निरीक्षण, 24 को नोटिस और एक इकाई का संचालन बंद कराए जाने के बाद विभाग की नजर प्रयोगशाला रिपोर्ट पर है। जांच परिणाम आने के बाद संबंधित इकाइयों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का फैसला किया जा सकता है।

कर्नाटक सरकार का कहना है कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना जनस्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसी उद्देश्य से निरीक्षण अभियान जारी रखा जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कदम उठाए जाएंगे।

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