'हवा का रुख बदल रहा है', वांगचुक की पत्नी की पोस्ट से छिड़ी राजनीतिक बहस
नई दिल्ली : बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार की हार और जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की है। उनकी टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि इसमें उन्होंने मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को बदलाव के संकेत के रूप में पेश करते हुए सवाल किया कि क्या अब देश में वास्तव में "अच्छे दिन" आने वाले हैं।
गीतांजलि आंग्मो ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि एक चुनाव परिणाम से कोई क्रांति नहीं आती, लेकिन कई बार छोटी-छोटी दरारें इस बात का संकेत देती हैं कि व्यवस्था के भीतर कुछ बदल रहा है। उन्होंने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देखने को मिला और अब बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के लंबे समय से सुरक्षित माने जाने वाले गढ़ में प्रशांत किशोर ने बड़ी जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, "क्या हवा का रुख बदल रहा है? पहले जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शन के बाद एक इस्तीफा और अब प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ बांकीपुर में शानदार जीत हासिल की है।" इसके बाद उन्होंने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे कोई बड़ा परिवर्तन आ गया है, लेकिन ऐसे परिणाम भविष्य के संकेत अवश्य देते हैं। उन्होंने सवाल किया, "क्या भारत अब राजनीति की एक नई भाषा चाहता है? क्या आखिरकार 'अच्छे दिन' आने वाले हैं?" अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने हंसने वाली इमोजी भी साझा की, जिसे कई लोगों ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में देखा।
दरअसल, सोमवार को घोषित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणामों ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा को 19,324 मतों के अंतर से हराकर बड़ी जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के घोषित परिणामों के अनुसार, प्रशांत किशोर को 64,117 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 44,827 मत प्राप्त हुए। वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करने वाली राष्ट्रीय जनता दल की उम्मीदवार रेखा गुप्ता इस बार 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। इस परिणाम को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि बांकीपुर सीट लंबे समय से पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है।
गीतांजलि आंग्मो इससे पहले भी सोशल मीडिया पर अपने विचारों को लेकर चर्चा में रही हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने एक अन्य पोस्ट में अपनी वैचारिक पहचान को लेकर विस्तार से लिखा था। उन्होंने कहा था कि वे किसी एक राजनीतिक विचारधारा या दल से खुद को नहीं जोड़तीं। उन्होंने लिखा, "मैं न भाजपाई हूं, न कांग्रेसी, न संघी, न कम्युनिस्ट। न वामपंथी, न दक्षिणपंथी, न समाजवादी, न पूंजीवादी, न उदारवादी और न ही रूढ़िवादी। मैं इन सभी विचारों से परे हूं।"
उन्होंने आगे कहा कि वह हर विचारधारा की अच्छी बातों को अपनाने में विश्वास रखती हैं और बाकी को छोड़ देती हैं। उनके अनुसार, मनुष्य जब स्वयं को केवल राजनीतिक, धार्मिक या सामाजिक पहचान तक सीमित कर लेता है तो वह अपने वास्तविक अस्तित्व को छोटा कर देता है। उन्होंने लिखा कि मनुष्य की सबसे गहरी पहचान किसी दल, धर्म या विचारधारा से नहीं, बल्कि चेतना से होती है। अपनी पोस्ट का समापन उन्होंने अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रसिद्ध संस्कृत वाक्य "चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्" के साथ किया।
बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम और उस पर आई इस तरह की प्रतिक्रियाओं ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर जनसुराज पार्टी इस जीत को बिहार की राजनीति में बदलाव की शुरुआत बता रही है, वहीं भाजपा इसे स्थानीय परिस्थितियों का परिणाम मान रही है। दूसरी ओर, गीतांजलि आंग्मो जैसी सामाजिक हस्तियों की टिप्पणियां भी इस चुनावी नतीजे को राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श से जोड़ रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जीत का प्रभाव बिहार की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल की रणनीतियों पर किस रूप में दिखाई देता है।