नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राजधानी की सड़कों पर यातायात का दबाव कम रखने के लिए एक विशेष व्यवस्था तैयार की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले केंद्रीय मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री संसद भवन से भारत मंडपम तक एक ही बस में यात्रा कर सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य वीवीआईपी वाहनों के अलग-अलग काफिलों की संख्या घटाना और आम लोगों को यातायात संबंधी परेशानी से बचाना है।

सूत्रों ने बताया कि ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने वाले केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को पहले संसद परिसर में एकत्र होने के लिए कहा जा सकता है। इसके बाद सभी नेता एक निर्धारित बस से एक साथ सम्मेलन स्थल भारत मंडपम के लिए रवाना होंगे। हालांकि, उनके संसद पहुंचने और वहां से भारत मंडपम के लिए निकलने का समय अभी तय नहीं किया गया है। कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने के बाद संबंधित नेताओं और सुरक्षा एजेंसियों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी।



यह व्यवस्था अभी प्रस्तावित बताई जा रही है और इसे लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन की सुरक्षा, नेताओं की सुविधा और दिल्ली की यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया गया है। एक ही बस में केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को ले जाने का प्रस्ताव इनमें सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्रिक्स सम्मेलन के कारण दिल्ली में कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों का आवागमन होगा। विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए विशेष काफिले और निर्धारित मार्ग तैयार किए गए हैं। ऐसे में यदि केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी अलग-अलग वाहनों तथा काफिलों में भारत मंडपम पहुंचते हैं तो राजधानी की प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव काफी बढ़ सकता है।

एक बस से सामूहिक यात्रा की व्यवस्था लागू होने पर वाहनों की संख्या में बड़ी कमी आएगी। इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए नेताओं के आवागमन की निगरानी करना भी अपेक्षाकृत आसान होगा। निर्धारित बस को सुरक्षा घेरे में संसद से भारत मंडपम तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए यात्रा मार्ग, वैकल्पिक रास्तों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की योजना भी तैयार की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य दिल्ली के आम लोगों को कम से कम परेशानी होने देना है। बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान वीवीआईपी मूवमेंट के कारण कई बार प्रमुख मार्गों पर यातायात कुछ समय के लिए रोका जाता है। इससे कार्यालय जाने वाले लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों और रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सामूहिक परिवहन व्यवस्था के जरिए यातायात को बार-बार रोकने की जरूरत कम की जा सकती है। संसद से भारत मंडपम के बीच केवल एक सुरक्षित काफिला चलने से सड़क को अपेक्षाकृत कम समय के लिए नियंत्रित करना पड़ेगा। इससे राजधानी में सामान्य यातायात को जल्द बहाल करने में मदद मिल सकती है। यातायात अधिकारी सम्मेलन के कार्यक्रम के अनुसार मार्गों पर वाहनों के संचालन की योजना बना रहे हैं।

दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सम्मेलन स्थल भारत मंडपम और उसके आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। नई दिल्ली जिले, राजनयिक क्षेत्रों, प्रमुख होटलों और विदेशी नेताओं के आवागमन वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के ठहरने वाले होटलों के कर्मचारियों का सत्यापन भी किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाने की जानकारी है। सम्मेलन स्थल पर प्रवेश केवल अधिकृत पास और पहचान की जांच के बाद दिया जाएगा। आपातकालीन परिस्थितियों के लिए चिकित्सा एवं अग्निशमन टीमों को भी तैयार रहने को कहा गया है।

भारत मंडपम में आयोजित होने वाले सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापार से जुड़ी चुनौतियों के कारण इस सम्मेलन पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

ब्रिक्स में शामिल देशों के नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं। इन बैठकों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। विदेशी नेताओं के काफिलों की आवाजाही के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी प्रतिबंध या डायवर्जन लागू किया जा सकता है। प्रशासन ने लोगों से यातायात संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने और संभव होने पर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की अपील की है।

अस्पताल, एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को बिना बाधा रास्ता उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की गई है। यातायात कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वीवीआईपी मूवमेंट के बावजूद चिकित्सा आपातकाल से जुड़े वाहनों को प्राथमिकता दी जाए। रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे की ओर जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलने की सलाह दी जा सकती है।

संसद से भारत मंडपम तक केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की प्रस्तावित सामूहिक यात्रा को प्रशासनिक समन्वय का हिस्सा माना जा रहा है। यदि इस योजना को अंतिम मंजूरी मिलती है तो यह बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में वाहनों और सुरक्षा काफिलों की संख्या कम करने का महत्वपूर्ण प्रयोग होगा। इससे सम्मेलन में शामिल भारतीय नेताओं का समय पर पहुंचना सुनिश्चित करने के साथ राजधानी में यातायात को सुचारु बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

फिलहाल नेताओं के संसद में इकट्ठा होने, बस के रवाना होने और भारत मंडपम पहुंचने के समय पर अंतिम फैसला बाकी है। सुरक्षा संबंधी कारणों से यात्रा कार्यक्रम का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। संबंधित एजेंसियां सम्मेलन की समय-सारिणी, विदेशी नेताओं के आवागमन और दिल्ली की यातायात स्थिति का आकलन करने के बाद इस व्यवस्था को अंतिम रूप देंगी।

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