नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर भरोसा जताया कि सदस्य देशों के नेता वैश्विक कल्याण की साझा भावना के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा करेंगे। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर संस्कृत का एक श्लोक साझा करते हुए भारतीय चिंतन परंपरा और दुनिया के सामूहिक कल्याण के विचार को सामने रखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा, “आने वाले दिनों में दुनिया भर के नेता ब्रिक्स समिट के लिए इकट्ठा होंगे। पूरा भरोसा है कि इस समिट में वैश्विक कल्याण की उम्मीदों के साथ कई मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।” प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय सामने आया है, जब ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं।
संस्कृत श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ने और सभी देशों के हित में काम करने की भारत की सोच को रेखांकित किया। भारतीय विदेश नीति में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के विचार को लगातार महत्व दिया जाता रहा है। इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। भारत ने अपनी पिछली बहुपक्षीय बैठकों और वैश्विक सम्मेलनों में भी सहयोग, समावेशी विकास और मानवता के कल्याण को प्रमुखता दी है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी सहयोग, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार सहित कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में जारी युद्ध और तनाव के कारण सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की परिस्थितियां तथा बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है।
भारत की कोशिश ब्रिक्स को विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत आवाज बनाने की है। नई दिल्ली का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी वैश्विक संस्थाओं की मौजूदा संरचना में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। सम्मेलन में वैश्विक प्रशासनिक और वित्तीय संस्थाओं में सुधार की मांग प्रमुखता से उठाई जा सकती है।
ब्रिक्स की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया और कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी इसमें शामिल हुईं। विस्तारित ब्रिक्स दुनिया की बड़ी आबादी, ऊर्जा संसाधनों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसके कारण समूह के फैसलों और घोषणाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहती है।
सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने पर भी बातचीत हो सकती है। भारत केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्राओं के बीच संपर्क स्थापित करने और सुरक्षित भुगतान प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को तेज, किफायती और सुविधाजनक बनाना है। हालांकि, सदस्य देशों की अलग-अलग वित्तीय व्यवस्थाओं के कारण इस दिशा में कई तकनीकी चुनौतियां भी मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के दौरान कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और आपसी सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने वाली वार्ता में द्विपक्षीय व्यापार तथा ऊर्जा सहयोग पर विशेष जोर रहने की संभावना है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित अन्य शीर्ष नेताओं की भागीदारी भी सम्मेलन को महत्वपूर्ण बना रही है। भारत और चीन के बीच होने वाली किसी भी उच्चस्तरीय बातचीत पर सीमा से जुड़े विषयों, व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में नजर रहेगी। भारत का प्रयास अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए ब्रिक्स के भीतर व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने का होगा।
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर भी व्यापक विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। विकासशील देशों का कहना है कि जलवायु संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उन्हें विकसित देशों से पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी सहायता मिलनी चाहिए। भारत स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास, आपदा प्रबंधन और जलवायु के अनुकूल बुनियादी ढांचे से जुड़े अपने अनुभव सदस्य देशों के साथ साझा कर सकता है।
तकनीक और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का विषय भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है। डिजिटल भुगतान, पहचान प्रणाली और सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के भारत के अनुभव को कई विकासशील देशों ने उपयोगी माना है। ब्रिक्स मंच के माध्यम से भारत डिजिटल तकनीक को अधिक समावेशी बनाने और विकासशील देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने की पहल कर सकता है।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग भी सम्मेलन के एजेंडे में रह सकता है। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और आतंकवाद को मिलने वाली वित्तीय सहायता के खिलाफ ठोस वैश्विक कार्रवाई की मांग करता रहा है। सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा और उसके खिलाफ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता का उल्लेख किए जाने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश सम्मेलन के प्रति भारत के सकारात्मक और सहयोग आधारित दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत ब्रिक्स को टकराव का मंच बनाने के बजाय संवाद और साझा समाधान की व्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है। प्रधानमंत्री की ओर से संस्कृत श्लोक साझा करना इसी नीति का सांस्कृतिक और कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन केवल सदस्य देशों के आपसी संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में स्थान दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब निगाहें सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं और जारी किए जाने वाले साझा घोषणापत्र पर टिकी हैं। इससे पता चलेगा कि ब्रिक्स देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए किन क्षेत्रों में ठोस सहयोग और साझा पहल पर सहमत होते हैं।