ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन, मोदी से रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर होगी अहम वार्ता
नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को तीन दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंच गए। वह भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दिल्ली पहुंचने पर विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। पुतिन की यात्रा को भारत-रूस के पुराने रणनीतिक संबंधों के साथ ही मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स सम्मेलन से इतर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की वार्ता शुक्रवार को ही हो सकती है। इसमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संयुक्त निर्माण की संभावनाओं पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में किसी समझौते की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
रक्षा क्षेत्र में भारत और रूस के बीच दशकों पुराने संबंध हैं। भारतीय सशस्त्र बलों के पास बड़ी संख्या में रूसी मूल के विमान, टैंक, पनडुब्बियां और मिसाइल प्रणालियां हैं। बदलते सामरिक माहौल और भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन अभियान को देखते हुए दोनों देश अब तैयार हथियारों की खरीद से आगे बढ़कर संयुक्त विकास और उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। इसी कारण रूस के पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े सहयोग की संभावना पर रक्षा विशेषज्ञों की निगाह टिकी हुई है।
संभावित सहयोग के तहत भारत में लड़ाकू विमानों के निर्माण, तकनीक हस्तांतरण और भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप विमान में बदलाव जैसे विषय सामने आ सकते हैं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के Su-30MKI विमानों के आधुनिकीकरण तथा अतिरिक्त एस-400 वायु रक्षा प्रणालियों की संभावित खरीद भी दोनों देशों के रक्षा संवाद का हिस्सा बन सकती है। संवेदनशील प्रकृति के कारण इन मुद्दों पर होने वाली बातचीत का पूरा विवरण सार्वजनिक किए जाने की संभावना कम है।
पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है और मॉस्को पर पश्चिमी देशों का दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को कायम रखा है। नई दिल्ली लगातार यह कहती रही है कि युद्ध का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी अपनी पिछली मुलाकातों में भी पुतिन के सामने शांति और संवाद का पक्ष रख चुके हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की यह दूसरी भारत यात्रा है। इससे पहले वह दिसंबर 2025 में भारत आए थे और प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्षिक शिखर बैठक की थी। उस दौरान दोनों देशों ने व्यापार को अधिक संतुलित और विविध बनाने सहित आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी दोनों देशों के एजेंडे में है।
भारत और रूस के आर्थिक संबंधों में ऊर्जा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के बीच भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों तथा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेगा। पुतिन और मोदी की बैठक में तेल एवं गैस आपूर्ति, परमाणु ऊर्जा और भुगतान व्यवस्था से संबंधित विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन को कम करने के उपायों पर भी विचार कर सकते हैं। रूस को भारत का निर्यात उसके मुकाबले काफी कम है। भारत चाहता है कि रूस उसके दवा उत्पादों, कृषि वस्तुओं, मशीनरी, ऑटोमोबाइल कलपुर्जों और उपभोक्ता सामान के लिए अपना बाजार अधिक खोले। इसके साथ ही रुपये और रूबल में भुगतान की व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने तथा बैंकिंग संबंधी अड़चनों को दूर करने की कोशिश भी की जा रही है।
पुतिन की मौजूदगी से ब्रिक्स सम्मेलन का रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। विस्तारित ब्रिक्स में अब मूल पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के अलावा नए सदस्य भी शामिल हैं। समूह वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक भागीदारी, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार जैसे विषयों पर काम कर रहा है।
नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन के दौरान यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्ष, अमेरिका-चीन तनाव तथा वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद की छाया रहने की संभावना है। मेजबान देश के रूप में भारत का प्रयास ब्रिक्स को किसी एक देश के विरोध में खड़े मंच के बजाय वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने वाले सहयोगी समूह के रूप में प्रस्तुत करना होगा।
पुतिन की यात्रा को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उनके ठहरने के स्थान, आवागमन वाले मार्गों और सम्मेलन स्थल के आसपास विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। रूसी सुरक्षा अधिकारियों ने भी भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया है। यात्रा के दौरान पुतिन ब्रिक्स के मुख्य सत्रों में भाग लेने के साथ अन्य सदस्य देशों के नेताओं से भी द्विपक्षीय मुलाकात कर सकते हैं।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी-पुतिन बैठक में किसी बड़े रक्षा समझौते की घोषणा होती है या नहीं, इससे अलग यह मुलाकात दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की निरंतरता का संदेश देगी। बदलती वैश्विक व्यवस्था, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों और भारत के अमेरिका तथा यूरोप से बढ़ते संबंधों के बीच नई दिल्ली और मॉस्को अपने पुराने रिश्तों को नए आर्थिक एवं तकनीकी आधार देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में पुतिन की यह यात्रा ब्रिक्स सम्मेलन के साथ ही भारत-रूस संबंधों की भावी दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।