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तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे पुतिन मोदी से करेंगे अहम वार्ता

नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को तीन दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे। वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। पुतिन के साथ रूस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, राजनयिक और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हैं। इस यात्रा को भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
#BREAKING | Russian President Vladimir Putin arrives in New Delhi to participate in the 18th BRICS Summit.
— DD News (@DDNewslive) September 10, 2026
Minister of State for External Affairs, Kirti Vardhan Singh receives President Putin at the airport.
During his visit, President Putin is scheduled to hold talks with… pic.twitter.com/lsnO9ouINf
रूसी राष्ट्रपति की यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग, व्यापार, वित्तीय व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच ब्रिक्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुतिन की भागीदारी को रूस की ओर से इस समूह को दी जा रही प्राथमिकता के रूप में देखा जा रहा है।
Warmly welcome President Vladimir Putin of Russia for the 18th BRICS Summit. He was received by MoS @KVSinghMPGonda at the airport.
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 10, 2026
India and Russia share multifaceted and longstanding ties anchored in Special and Privileged Strategic Partnership.#BRICS2026 #BRICSIndia2026… pic.twitter.com/pwxcO2aHLt
ब्रिक्स सम्मेलन से इतर राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, विज्ञान एवं तकनीक तथा परिवहन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं और दोनों देश इन्हें विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखते हैं।
बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित और विविध बनाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है। भारत और रूस के बीच व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा ऊर्जा आयात पर आधारित है। भारत चाहता है कि रूस उसके दवा उत्पादों, कृषि वस्तुओं, मशीनरी, वस्त्र, ऑटोमोबाइल के कलपुर्जों और अन्य निर्मित सामान के लिए अपना बाजार अधिक खोले। इससे व्यापार असंतुलन को कम करने और भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
🇷🇺🇮🇳Ceremony marking the official arrival of Russian President Vladimir #Putin in #India to attend the#BRICS Summit. pic.twitter.com/yemWZUGi8Q
— Russia in India 🇷🇺 (@RusEmbIndia) September 10, 2026
दोनों देशों के सामने बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने की चुनौती भी है। रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण कई व्यापारिक लेनदेन में व्यावहारिक परेशानियां सामने आई हैं। मोदी और पुतिन की वार्ता में स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से व्यापार, सुरक्षित भुगतान प्रणाली और दोनों देशों के वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषय उठ सकते हैं। व्यापारिक समुदाय को उम्मीद है कि उच्चस्तरीय बातचीत से लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में प्रगति होगी।
ऊर्जा सहयोग भी इस बैठक का प्रमुख विषय रहने की संभावना है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, जबकि रूस कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का प्रमुख उत्पादक है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की है। वैश्विक दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है।
तेल और गैस के अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं। तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना भारत-रूस सहयोग का प्रमुख उदाहरण है। पुतिन की यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं, ईंधन आपूर्ति और नई तकनीक के उपयोग से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हो सकती है। भारत स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोतों का विस्तार करना चाहता है, जिसमें रूस की तकनीकी विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
रक्षा सहयोग भारत-रूस संबंधों का एक और मजबूत आधार है। भारतीय सशस्त्र बलों के पास बड़ी संख्या में रूसी मूल के लड़ाकू विमान, टैंक, युद्धपोत और मिसाइल प्रणालियां हैं। हाल के वर्षों में भारत ने तैयार हथियारों की खरीद के स्थान पर तकनीक हस्तांतरण और देश में ही रक्षा उपकरणों के निर्माण पर जोर दिया है। ऐसे में दोनों नेता संयुक्त उत्पादन, रक्षा तकनीक और मौजूदा सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण पर चर्चा कर सकते हैं।
पुतिन के साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि यह यात्रा केवल राजनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहेगी। रूसी प्रतिनिधिमंडल भारतीय अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों के साथ अलग-अलग बैठकों में हिस्सा ले सकता है। इन बैठकों में उद्योग, खनन, रेलवे, उर्वरक, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और दवा निर्माण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
पुतिन की भारत यात्रा रूस-यूक्रेन युद्ध और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच हो रही है। भारत ने यूक्रेन संघर्ष पर लगातार संतुलित रुख अपनाया है। नई दिल्ली ने हिंसा रोकने, बातचीत शुरू करने और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री मोदी द्विपक्षीय बैठक में एक बार फिर शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर भारत का पक्ष रख सकते हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन में भी यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापारिक प्रतिबंधों जैसे विषय चर्चा में आ सकते हैं। भारत का प्रयास ब्रिक्स को विकासशील देशों की आवाज मजबूत करने वाले सहयोगी मंच के रूप में आगे बढ़ाने का रहेगा। सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राजनीतिक हित होने के बावजूद आर्थिक सहयोग, संस्थागत सुधार और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन की यह यात्रा भारत और रूस के संबंधों की निरंतरता का मजबूत संदेश देती है। भारत जहां अमेरिका, यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है, वहीं उसने रूस के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को भी कायम रखा है। अगले तीन दिनों के दौरान होने वाली बैठकों और संभावित समझौतों से यह स्पष्ट होगा कि दोनों देश बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपने संबंधों को किस नई दिशा में आगे बढ़ाना चाहते हैं।





