नई दिल्ली: IRS अधिकारी की बेटी की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। वारदात की कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस ने 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली है। जांच के दौरान सामने आए नए वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को पुलिस अदालत के सामने पेश करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी का प्रयास घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन तैयार कर आरोपियों की कथित भूमिका को साक्ष्यों के जरिए स्थापित करने का है।
मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आई है। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के कैमरों के अलावा उन रास्तों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांची है, जहां से संबंधित लोगों के आने-जाने की संभावना थी। अलग-अलग जगहों की फुटेज को जोड़कर घटना से पहले और बाद की गतिविधियों का पता लगाया जा रहा है।
100 से ज्यादा CCTV कैमरों की जांच
पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी। इसमें निजी प्रतिष्ठानों, आवासीय परिसरों और सड़कों पर लगे कैमरे शामिल हो सकते हैं। फुटेज में दिखाई देने वाले लोगों और वाहनों की गतिविधियों का समय के आधार पर मिलान किया जा रहा है। जांच अधिकारियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि घटना से पहले संदिग्ध कहां थे, घटनास्थल तक कैसे पहुंचे और वारदात के बाद किस दिशा में गए। इसके लिए अलग-अलग कैमरों से मिले वीडियो की क्रमवार टाइमलाइन तैयार की जा सकती है।
अदालत में पेश होंगे नए वीडियो सबूत
पुलिस मामले में मिले नए वीडियो साक्ष्यों को अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है। डिजिटल साक्ष्य को न्यायिक प्रक्रिया में इस्तेमाल करने के लिए उसकी प्रामाणिकता और स्रोत से जुड़ी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के अलावा मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा भी जांच में सहायक हो सकते हैं। इन साक्ष्यों का आपस में मिलान कर पुलिस अपने निष्कर्ष को मजबूत करने की कोशिश करेगी।
घटनाक्रम की टाइमलाइन पर फोकस
हत्या जैसे गंभीर मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घटना की सटीक टाइमलाइन तैयार करना होता है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़िता घटना से पहले कहां थी, किससे मिली और उसके बाद क्या हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों को भी सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से मिलाया जा सकता है। किसी बयान और वीडियो में अंतर मिलने पर जांच अधिकारी उससे जुड़े तथ्यों की दोबारा पड़ताल कर सकते हैं।
फोरेंसिक जांच भी अहम
वीडियो फुटेज के साथ घटनास्थल से मिले फोरेंसिक साक्ष्य भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अदालत में अभियोजन पक्ष को आरोप साबित करने के लिए साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला पेश करनी होगी। फिलहाल दिल्ली पुलिस नए वीडियो और अन्य उपलब्ध प्रमाणों को व्यवस्थित करने में जुटी है। अदालत में इन साक्ष्यों की न्यायिक जांच के बाद ही उनका अंतिम महत्व तय होगा। मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम फैसला भी न्यायालय ही करेगा।
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