New Delhi नई दिल्ली : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापन दिखाए जा रहे थे, जिनमें दावा किया जा रहा था कि बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक और यौन शोषण से संबंधित कंटेंट तक पहुंच दी जा सकती है। इन विज्ञापनों में यह भी कहा गया था कि इस तरह का कंटेंट लगभग 99 रुपये में उपलब्ध हो सकता है। इस मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस पूरे मामले पर तत्काल कार्रवाई करते हुए मेटा को निर्देश दिया है कि वह ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित कंटेंट को तुरंत प्लेटफॉर्म से हटाए। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार ने मेटा से इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब भी मांगा है और इसके लिए सात दिनों की समय सीमा तय की गई है। मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि केवल कंटेंट हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी बताना होगा कि ऐसे आपत्तिजनक विज्ञापन और सामग्री प्लेटफॉर्म तक पहुंचे कैसे और उन्हें बढ़ावा क्यों मिला।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और उनके एल्गोरिदम पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों का कहना है कि अगर एल्गोरिदम ऐसे कंटेंट को प्रमोट कर रहे हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। सरकार ने मेटा से यह भी कहा है कि वह अपने सिस्टम में सुधार करे और ऐसे कंटेंट के एल्गोरिदमिक प्रमोशन को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए।
यह मामला अब केवल एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इससे ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े किसी भी प्रकार के कंटेंट को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।