Delhi दिल्ली: भारत और जापान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक नई रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की है। गुरुवार को नई दिल्ली में हुई 16वीं द्विपक्षीय शिखर बैठक के दौरान दोनों देशों ने मिलकर बड़े लैंग्वेज मॉडल, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर सहमति जताई। इस साझेदारी को तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक डिजिटल प्रतिस्पर्धा के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस समझौते का उद्देश्य न केवल उन्नत AI तकनीक का संयुक्त विकास करना है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और ग्लोबल साउथ में सफल तकनीकी अनुप्रयोगों को भी दोहराना है। दोनों देश मिलकर ऐसी प्रणाली विकसित करना चाहते हैं जो ऊर्जा-कुशल, सुरक्षित और व्यापक स्तर पर उपयोग योग्य हो।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में अमेरिका द्वारा एंथ्रोपिक के सबसे उन्नत AI मॉडल्स तक विदेशी नागरिकों की पहुंच को राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से सीमित किया गया था। हालांकि बाद में इस रोक को हटा लिया गया, लेकिन इस घटना ने वैश्विक स्तर पर यह बहस फिर से तेज कर दी कि फ्रंटियर AI तकनीक तक पहुंच अब तेजी से भू-राजनीतिक निर्णयों पर निर्भर होती जा रही है। इससे भरोसेमंद तकनीकी साझेदारियों और स्वदेशी क्षमता विकास की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत और जापान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने इस बैठक में तकनीकी सहयोग के व्यापक ढांचे पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों ने यह तय किया कि सहयोग केवल AI तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे टेक्नोलॉजी स्टैक को कवर करेगा।
इस साझेदारी में GPU तकनीक, डेटा सेंटर विकास, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा मल्टीलिंगुअल और ओपन-सोर्स फाउंडेशन मॉडल्स के विकास पर भी संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।
बैठक में AI सुरक्षा (AI Safety), साइबर सुरक्षा और ऊर्जा-कुशल कंप्यूटिंग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने माना कि AI तकनीक के तेज विकास के साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत और जापान को वैश्विक AI इकोसिस्टम में एक मजबूत स्थान दिला सकती है। सेमीकंडक्टर और कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों की तकनीकी निर्भरता कम होगी और स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा।
इसके साथ ही यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तकनीकी संतुलन बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है, जहां चीन और अमेरिका पहले से ही AI और सेमीकंडक्टर तकनीक में प्रमुख खिलाड़ी बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, भारत और जापान की यह नई AI रणनीतिक साझेदारी न केवल तकनीकी विकास को गति देगी, बल्कि वैश्विक डिजिटल व्यवस्था में दोनों देशों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगी।