नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार से एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि सरकार ने इस प्रक्रिया को वापस नहीं लिया, तो जनता उसे सत्ता से बाहर कर देगी। मुख्यमंत्री का यह बयान नई दिल्ली में INDIA गठबंधन के नेताओं के राजघाट पहुंचने और महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि देने के बाद सामने आया। विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोकने की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन विरोध प्रदर्शन कर रहा था।
राजघाट से निकलते समय पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को विपक्ष की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए।रेवंत रेड्डी ने कहा, "SIR को वापस लें, वरना आपको अपना पद छोड़ना पड़ेगा। संपूर्ण क्रांति। मोदी जी, अपना सिंहासन छोड़ दें; वरना जनता आपसे ऐसा करवा देगी।"मुख्यमंत्री ने अपने बयान में 'संपूर्ण क्रांति' का उल्लेख करते हुए विपक्ष के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि जनता अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है और उनकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।रेवंत रेड्डी का यह बयान राजनीतिक चेतावनी के रूप में सामने आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
राजघाट पहुंचे INDIA गठबंधन के कई बड़े नेता
गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के अन्य नेता राजघाट पहुंचे।इस दौरान नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी विपक्षी नेताओं के साथ मौजूद रहे।इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।राजघाट पहुंचने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी नेताओं के लिए दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित एक रेस्तरां में दोपहर के भोजन का आयोजन किया था। इस बैठक में विरोध प्रदर्शन की रणनीति और आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा हुई।
तीन दिनों से दिल्ली की सड़कों पर विपक्ष का प्रदर्शन
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि INDIA गठबंधन पिछले तीन दिनों से दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहा है।उन्होंने कहा कि विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।दरअसल, विपक्षी गठबंधन का विरोध प्रदर्शन मंगलवार, 6 अक्टूबर को शुरू हुआ था। उस दिन विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया था।दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और लागू प्रतिबंधात्मक आदेशों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था।इसके बाद बुधवार, 7 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।गुरुवार को आंदोलन के तीसरे दिन विपक्षी नेताओं ने राजघाट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है।विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए एसआईआर प्रक्रिया तत्काल वापस लेने की मांग की है।कुछ विपक्षी नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के स्थान पर मतपत्रों से मतदान कराने की मांग भी उठाई है।हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक वैधानिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही रिकॉर्ड तैयार करना और सूची को अद्यतन रखना है।मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और राजनीतिक हस्तक्षेप से जुड़े आरोपों पर विपक्ष तथा चुनाव आयोग के बीच मतभेद बने हुए हैं।
रेवंत रेड्डी पहले भी उठा चुके हैं एसआईआर का मुद्दा
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी इससे पहले भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुके हैं।सितंबर में तेलंगाना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि एसआईआर प्रक्रिया की आड़ में भाजपा विरोधी मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश की जा रही है।उस समय उन्होंने वामपंथी दलों से भी कांग्रेस के साथ मिलकर इस मुद्दे पर आंदोलन करने की अपील की थी।रेवंत रेड्डी ने दावा किया था कि तेलंगाना में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
विपक्षी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश
गुरुवार को राजघाट पर हुए कार्यक्रम में विभिन्न विपक्षी दलों की भागीदारी को INDIA गठबंधन के संयुक्त विरोध अभियान के रूप में देखा जा रहा है।कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने विपक्षी नेताओं को एक मंच पर अपनी मांगें रखने का अवसर दिया।इस दौरान राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।उन्होंने दावा किया कि करीब 300 सांसद शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें बार-बार रोका गया।राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं के साथ पुलिस के व्यवहार की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
राजघाट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए गुरुवार को राजघाट और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों को प्रमुख मार्गों पर तैनात किया गया।पुलिस ने यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ मार्गों पर आवश्यक प्रतिबंध भी लगाए।इससे पहले दो दिनों के दौरान विपक्षी नेताओं और पुलिस के बीच प्रदर्शन स्थलों तक पहुंचने को लेकर टकराव की स्थिति बन चुकी थी।गुरुवार को विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि पर पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
एसआईआर पर राजनीतिक विवाद जारी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों का विरोध मुख्य रूप से मतदाताओं के अधिकारों, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से संबंधित है।दूसरी ओर, चुनाव आयोग मतदाता सूची को अद्यतन रखने और पात्र मतदाताओं का सही विवरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।संविधान के तहत चुनाव आयोग को चुनावों के संचालन और मतदाता सूचियों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों पर उठ रहे राजनीतिक सवालों के बीच आयोग की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर भी चर्चा हो रही है।फिलहाल INDIA गठबंधन एसआईआर वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कायम है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को अपने बयान के माध्यम से केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एसआईआर वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि जनता लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की ताकत रखती है।दिल्ली में लगातार तीन दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद अब विपक्षी गठबंधन के अगले कार्यक्रमों और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक नजर बनी हुई है।
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