तेलंगाना

तेलंगाना में कांग्रेस का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा

Ratna Netam
8 Oct 2026 2:56 PM IST
तेलंगाना में कांग्रेस का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ खोला मोर्चा
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हैदराबाद। तेलंगाना में कांग्रेस ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 'चलो लोक भवन' विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस और सहयोगी दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों ने हैदराबाद में मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर भी निशाना साधते हुए संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की।
यह विरोध प्रदर्शन कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के 'लोकतंत्र बचाओ' अभियान के तहत आयोजित किया गया। मार्च की शुरुआत हैदराबाद के नेकलेस रोड स्थित पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रतिमा से हुई। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता लोक भवन की ओर बढ़े। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की।
प्रदर्शन में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य महेश कुमार गौड़ सहित राज्य सरकार के कई मंत्री शामिल हुए। इनमें पोन्नम प्रभाकर, पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी, कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी, जुपल्ली कृष्ण राव, विवेक वेंकट स्वामी और मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे नेता शामिल थे। इसके अतिरिक्त भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और तेलंगाना जन समिति के नेताओं ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
कांग्रेस नेता मेट्टू साई कुमार ने प्रदर्शन के उद्देश्य को लेकर कहा कि पार्टी जनता के सामने भाजपा के कामकाज का रिकॉर्ड और संविधान को कमजोर करने की कथित कोशिशों को उजागर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जहां भी सत्ता में होती है, वहां विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं रहती। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल से तुलना करते हुए भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
साई कुमार ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) लगातार संविधान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए उपलब्ध संसाधनों और सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करती है। हालांकि, ये कांग्रेस नेता के राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
विरोध प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक गतिविधियां तेज होने पर पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ और कुछ मंत्रियों को लोक भवन के निकट प्रदर्शन करते समय हिरासत में लेकर पंजागुट्टा पुलिस थाने ले जाया गया। कांग्रेस के अन्य नेताओं को भी अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
इस दौरान तेलंगाना सरकार के मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मताधिकार की रक्षा करना और चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने को कहा।
पोन्नम प्रभाकर ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के सांसदों को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी।
तेलंगाना में आयोजित यह प्रदर्शन देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे विपक्षी आंदोलन का हिस्सा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तथा मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले 6 और 7 अक्टूबर को भी दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान राहुल गांधी सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में सभी पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भाजपा ने राजनीतिक पक्षपात तथा गलत आचरण से जुड़े आरोपों का खंडन किया है।
तेलंगाना कांग्रेस ने इससे पहले भी राज्य में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में हैदराबाद सहित विभिन्न जिलों में पार्टी नेताओं ने विरोध दर्ज कराया था। वहीं, अक्टूबर की शुरुआत में कांग्रेस और वामपंथी दलों ने संयुक्त कार्यक्रम घोषित करते हुए 8 अक्टूबर को लोक भवन तक मार्च निकालने की जानकारी दी थी।
इस आंदोलन के माध्यम से कांग्रेस चुनाव आयोग की जवाबदेही, मतदाता सूची की पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे इन मांगों को लेकर अपना अभियान जारी रखना चाहते हैं।
गुरुवार को हैदराबाद में हुए 'चलो लोक भवन' प्रदर्शन ने तेलंगाना में भी चुनाव आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस और सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर जोर दे रहे हैं, वहीं चुनावी प्रक्रिया से संबंधित आरोपों और उनके जवाब को लेकर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
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