नई दिल्ली। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। राहुल गांधी ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने मांग की है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़ी सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल पद का कार्यभार ग्रहण करने से रोका जाए। राहुल ने पत्र में कहा कि 19 वर्षीय अंकिता ने अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया था, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के चार साल बाद भी कथित वीआईपी की पहचान स्पष्ट क्यों नहीं हो सकी है। हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अदालत में पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को राहुल गांधी की चिट्ठी
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।उन्होंने अपने पत्र में कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और न्याय से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका से जुड़े सवाल अब तक अनसुलझे हैं।उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार पिछले चार वर्षों से न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।राहुल ने राष्ट्रपति से इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कदम उठाने की अपील की है।
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर आपत्ति
इस पूरे विवाद का प्रमुख कारण भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति है।12 अक्टूबर 2026 को उनकी नियुक्ति की घोषणा के बाद अंकिता भंडारी के परिवार ने विरोध जताया।परिवार का आरोप है कि हत्याकांड के कथित वीआईपी पहलू से जुड़े आरोपों की जांच पूरी हुए बिना उन्हें संवैधानिक पद देना उचित नहीं है।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में इसी मुद्दे को उठाया है।उन्होंने मांग की है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए और उन्हें पदभार ग्रहण करने से रोका जाए।हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ हत्याकांड में संलिप्तता के आरोप प्रमाणित नहीं हुए हैं।
चार साल बाद भी कौन था वह VIP?
राहुल गांधी ने अपने पत्र में हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी की पहचान को लेकर सवाल उठाया है।उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी पर एक प्रभावशाली व्यक्ति के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने का दबाव बनाए जाने का आरोप सामने आया था।अंकिता ने कथित तौर पर इसका विरोध किया था।
राहुल गांधी का कहना है कि इतने वर्षों के बाद भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर वह व्यक्ति कौन था।उन्होंने सीबीआई जांच की धीमी गति पर भी चिंता व्यक्त की।हालांकि, कथित वीआईपी की पहचान और किसी अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका जांच का विषय है।
सितंबर 2022 में हुई थी अंकिता की हत्या
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की रहने वाली अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं।सितंबर 2022 में वह अचानक लापता हो गई थीं।इसके बाद जांच के दौरान पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई थी।
24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद हुआ था।इस घटना के बाद उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे।लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
तीन दोषियों को सुनाई जा चुकी है उम्रकैद
अंकिता भंडारी हत्याकांड में वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था।मामले में अदालत ने 30 मई 2025 को पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।पुलकित आर्य भाजपा के पूर्व नेता विनोद आर्य का बेटा है।
तीनों दोषियों के खिलाफ हत्या से संबंधित आरोप न्यायिक प्रक्रिया में साबित हुए।हालांकि, अदालत के फैसले के बाद भी पीड़ित परिवार कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग करता रहा है।परिवार का कहना है कि हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
जनवरी 2026 में शुरू हुई सीबीआई जांच
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ने के बाद जनवरी 2026 में सीबीआई जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी को मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने संबंधित रिकॉर्ड और पूर्व में हुई जांच से जुड़े दस्तावेज प्राप्त किए।इस जांच का उद्देश्य कथित वीआईपी की भूमिका और उससे संबंधित आरोपों की पड़ताल करना है।हालांकि, अब तक ऐसी कोई अंतिम आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे कथित वीआईपी की आपराधिक संलिप्तता प्रमाणित होती हो।
इंडिया गेट पर धरने पर बैठे अंकिता के माता-पिता
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के विरोध में अंकिता भंडारी के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठे थे।परिवार ने मांग की कि सीबीआई जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी ने राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाई।उनका कहना है कि बेटी की हत्या के मामले में सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए।परिवार ने जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग की है।
राहुल और प्रियंका ने परिवार से की मुलाकात
बुधवार, 14 अक्टूबर को राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इंडिया गेट पहुंचे थे।दोनों नेताओं ने धरने पर बैठे अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की।राहुल गांधी ने परिवार की बात सुनी और न्याय की मांग का समर्थन किया।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक मामले में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है।इसके अगले दिन राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
गुरुवार को अंकिता भंडारी के परिवार के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की खबर भी सामने आई।दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने नाराजगी व्यक्त की।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि न्याय की मांग कर रहे परिवार की आवाज दबाई जा रही है।हालांकि, प्रदर्शन स्थल और पुलिस कार्रवाई के संबंध में प्रशासनिक नियमों तथा पुलिस के पक्ष को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
भाजपा सरकार पर कांग्रेस का हमला
अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा सरकार पर सवाल उठा रही है।कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रभावशाली व्यक्तियों को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है।उन्होंने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह का फैसला पीड़ित परिवार के लिए चिंताजनक है।
वहीं, किसी व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगना और उसका अपराध सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं।दुष्यंत गौतम की कथित भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
महिलाओं की सुरक्षा और न्याय का उठा सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न जैसे मुद्दों से जुड़ा रहा है।अंकिता की उम्र महज 19 वर्ष थी और वह नौकरी के माध्यम से अपना भविष्य बनाने की कोशिश कर रही थीं।
उनकी हत्या के बाद देशभर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा हुई थी।राहुल गांधी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है।उन्होंने जोर दिया कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति की संभावित भूमिका को निष्पक्ष जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
राष्ट्रपति के फैसले पर टिकी निगाहें
राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब राजनीतिक हलकों में राष्ट्रपति की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।कांग्रेस और पीड़ित परिवार चाहते हैं कि दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए।
दूसरी ओर, सीबीआई की जांच से कथित वीआईपी के संबंध में उठ रहे सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद की जा रही है।फिलहाल राष्ट्रपति की ओर से राहुल गांधी के इस पत्र पर किसी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
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