दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। ऐसे में यह फैसला पुलिस कैसे कर सकती है कि कौन व्यक्ति तिरंगा फहरा सकता है और कौन नहीं। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
'कौन तिरंगा फहराएगा, यह पुलिस कैसे तय करेगी?'
अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस से सवाल करते हुए कहा, "दिल्ली पुलिस यह कैसे तय करेगी कि कौन राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है और कौन नहीं? उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को तिरंगा फहराना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज सभी भारतीयों का है और इसे फहराने का अधिकार किसी विशेष व्यक्ति या समूह तक सीमित नहीं होना चाहिए।
'क्या अब तिरंगा फहराने के लिए अनुमति लेनी पड़ेगी?'
सीजेपी संस्थापक ने सवाल उठाया कि क्या अब नागरिकों को तिरंगा फहराने के लिए भी दिल्ली पुलिस से अनुमति लेनी होगी। उनकी टिप्पणी सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने से संबंधित पुलिस की अनुमति व्यवस्था को लेकर सामने आई है।
दिल्ली पुलिस ने सीमित समूह को अनुमति देने की बात कही
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्रगान गाने के लिए कुछ लोगों को उपयुक्त स्थान पर एकत्र होने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और लागू निषेधाज्ञा का पालन करने की अपील भी की है।
16 अक्टूबर को तिरंगा कार्यक्रम का ऐलान
सीजेपी ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में 'लहरा दो तिरंगा' कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है। इसी बीच नई दिल्ली नगर परिषद ने प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की सूचना जारी की है।
अभिजीत दिपके के बयान ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार और सार्वजनिक आयोजनों के लिए पुलिस अनुमति के बीच अंतर को लेकर बहस तेज कर दी है।