NDA के पास दो-तिहाई बहुमत का दावा

Update: 2026-07-04 12:59 GMT
New Delhi नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 13 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, जिनमें महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की सिफारिश पर लोकसभा और राज्यसभा के मानसून सत्र को बुलाने की मंजूरी दे दी है। सरकार का उद्देश्य इस सत्र में कई लंबे समय से लंबित और नए महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन से पारित कराना है।
इस बार का मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार दावा कर रही है कि एनडीए दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई है। ऐसे में कई संवैधानिक और नीतिगत बदलावों से जुड़े विधेयकों को पारित कराने की राह आसान हो सकती है।
सरकार की प्राथमिकता में 130वां संविधान संशोधन विधेयक, महिला आरक्षण लागू करने से जुड़ा विधेयक, परिसीमन (डिलिमिटेशन) से संबंधित प्रस्ताव और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन जैसे महत्वपूर्ण बिल शामिल हैं। इन सभी प्रस्तावों को इस सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
इसके अलावा सरकार की कोशिश पहले से लंबित कई विधेयकों को भी सदन से मंजूरी दिलाने की होगी, ताकि नीतिगत कामकाज को आगे बढ़ाया जा सके। माना जा रहा है कि सरकार इस सत्र को काफी अहम मानकर रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
दूसरी ओर, विपक्ष भी इस सत्र को लेकर पूरी तैयारी में है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे कई राजनीतिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाएंगे। इसमें महंगाई, बेरोजगारी, आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानसून सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि एक ओर सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति अपनाएगा।
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लंबे समय से राजनीतिक चर्चा चल रही है। इसे लागू करने की दिशा में यह सत्र निर्णायक माना जा सकता है। इसी तरह परिसीमन का मुद्दा भी कई राज्यों की राजनीति को प्रभावित करने वाला है।
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