ग्रेटर नोएडा : हाल ही में हुई बस में आग लगने की घटना के बाद ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के DCP ट्रैफिक (सेंट्रल रेंज) के. रमेश ने गुरुवार को बताया कि जिस बस में आग लगी थी, उसके खिलाफ राजधानी में पहले से ही नौ चालान लंबित थे। इनमें ज्यादातर चालान तेज रफ्तार और गलत तरीके से पार्किंग से जुड़े हुए थे। हालांकि, बस का परमिट 26 अक्टूबर तक वैध था।
ANI से बातचीत में DCP के. रमेश ने बस से जुड़े ट्रैफिक उल्लंघनों और परिवहन वाहनों की जांच को लेकर पुलिस की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक पुलिस लगातार ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और बस मालिकों के साथ बैठकें करती है। इन बैठकों में परमिट की वैधता, यातायात नियमों के पालन और वाहनों से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को लेकर उन्हें जानकारी दी जाती है।
DCP रमेश के मुताबिक, संबंधित बस पर दिल्ली में कुल नौ चालान थे। इनमें से अधिकांश चालान तेज रफ्तार और गलत तरीके से पार्किंग के मामलों में जारी किए गए थे। इससे यह सामने आता है कि बस के खिलाफ आग लगने की घटना से पहले भी यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले दर्ज थे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बस का परमिट 26 अक्टूबर तक वैध था।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहनों की नियमित जांच की जाती है। पुलिस की ओर से बस संचालकों और मालिकों को नियमों का पालन करने के लिए लगातार जागरूक किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि परिवहन वाहनों के संचालन में परमिट, फिटनेस और अन्य जरूरी नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।
DCP के. रमेश ने बताया कि ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और बस मालिकों के साथ नियमित बैठकें कर उन्हें नियमों के उल्लंघन से होने वाली कार्रवाई के बारे में बताया जाता है। पुलिस की ओर से खास तौर पर अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग जैसे मामलों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि जो लोग नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं।
बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों के मामले में तेज रफ्तार को एक महत्वपूर्ण यातायात उल्लंघन माना जाता है। इसी तरह गलत तरीके से पार्किंग करने से सड़क पर यातायात प्रभावित होने के साथ दूसरे वाहनों के लिए भी परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में ट्रैफिक पुलिस चालान जारी करती है और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करती है।
ग्रेटर नोएडा में बस में आग लगने की घटना के बाद सामने आई यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन वाहनों की निगरानी और उनके संचालन से जुड़े नियमों पर ध्यान खींचा है। हादसे के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से वाहनों की जांच और नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई की जानकारी दी जा रही है।
DCP रमेश ने कहा कि पुलिस परिवहन संचालकों को समय-समय पर नियमों की जानकारी देती है। उनका कहना है कि बस मालिकों और ऑपरेटरों को परमिट तथा यातायात नियमों का पालन करने की सलाह लगातार दी जाती है। इसके बावजूद यदि कोई वाहन अवैध पार्किंग, ओवरलोडिंग या अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
बस पर नौ चालान लंबित होने की जानकारी सामने आने के बाद अब इस बात पर भी ध्यान गया है कि व्यावसायिक वाहनों के खिलाफ दर्ज यातायात उल्लंघनों का समय पर निपटारा कितना जरूरी है। ट्रैफिक नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि सड़क पर यात्रियों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
अधिकारियों के अनुसार, बस का परमिट 26 अक्टूबर तक वैध था। ऐसे में परमिट की वैधता और यातायात नियमों के उल्लंघन को अलग-अलग पहलुओं के तौर पर देखा जा रहा है। परमिट वैध होने के बावजूद किसी वाहन पर ट्रैफिक नियम तोड़ने के लिए चालान हो सकते हैं।
ग्रेटर नोएडा की घटना के बाद ट्रैफिक पुलिस की ओर से परिवहन वाहनों की निगरानी, नियमों के पालन और उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस ने साफ किया है कि अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग जैसे मामलों में नियमों के मुताबिक सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस पूरे मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि आग लगने वाली बस का परमिट 26 अक्टूबर तक वैध था, लेकिन उसके खिलाफ दिल्ली में नौ चालान दर्ज थे। इनमें अधिकतर मामले तेज रफ्तार और गलत तरीके से पार्किंग से संबंधित बताए गए हैं। घटना के बाद ट्रैफिक नियमों और परिवहन वाहनों की निगरानी को लेकर पुलिस की ओर से एक बार फिर सख्ती पर जोर दिया गया है।