नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत ने गुरुवार को अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने की विदेश यात्रा की अनुमति दे दी। अदालत ने कुछ शर्तों और औपचारिकताओं के अधीन वैनडाइक को अमेरिका और छह यूक्रेनी नागरिकों को यूक्रेन जाने की इजाजत दी है।विशेष NIA न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने विदेश यात्रा की अनुमति और पासपोर्ट जारी करने की मांग वाली अर्जियों को स्वीकार किया। इससे पहले आरोपियों को जमानत देते समय अदालत ने उनके दिल्ली से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया था। अब यात्रा की अनुमति मिलने के बाद वे अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन करते हुए सीमित अवधि के लिए अपने-अपने देशों में परिवार से मिल सकेंगे।
विदेश यात्रा के अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के तहत प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का विस्तार है। कोर्ट ने इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए आवेदनों पर विचार किया और निर्धारित शर्तों के साथ विदेश यात्रा की अनुमति दी।अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि संबंधित लोगों को पहले ही डिफॉल्ट जमानत मिल चुकी है। हालांकि उनके खिलाफ NIA की आगे की जांच जारी है, इसलिए विदेश यात्रा की अनुमति को शर्तों और आवश्यक औपचारिकताओं से जोड़ा गया है।यात्रा की मंजूरी का अर्थ मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है। NIA की जांच और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी रह सकती है।
परिवार से मिलने मांगी थी अनुमति
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक ने अदालत में आवेदन दाखिल कर अमेरिका जाकर अपने परिवार से मिलने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने पासपोर्ट जारी करने और जमानत की शर्तों में आवश्यक बदलाव की मांग भी की थी।वैनडाइक की ओर से अदालत को बताया गया था कि वह अपने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका जाना चाहते हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें डिफॉल्ट जमानत देते समय दिल्ली में रहने और NIA द्वारा बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने की शर्त लगाई थी।छह यूक्रेनी नागरिकों को भी बाद में इसी आधार पर डिफॉल्ट जमानत मिली। अदालत ने अब उनकी विदेश यात्रा संबंधी अर्जियों पर विचार करते हुए उन्हें भी एक महीने के लिए अपने देश जाने की अनुमति दी है।
मार्च में हुई थी गिरफ्तारी
मैथ्यू आरोन वैनडाइक को NIA ने 13 मार्च 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। उसी दिन छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था। छह यूक्रेनी नागरिकों की पहचान विक्टर कामिंस्की, पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफानकिव और मैक्सिम होंचारुक के रूप में रिपोर्ट की गई है।NIA ने आरोप लगाया था कि ये लोग भारत के रास्ते म्यांमार गए और वहां जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन से संबंधित प्रशिक्षण देने जैसी गतिविधियों में शामिल रहे। ये एजेंसी के आरोप हैं और व्यापक मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।मामला शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के प्रावधानों के तहत भी दर्ज किया गया था।
चार्जशीट में नहीं लगाए गए UAPA के प्रावधान
सितंबर में NIA ने सातों विदेशी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसमें एजेंसी ने Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत कथित अवैध प्रवेश, प्रवास और आवाजाही से जुड़े आरोप लगाए, लेकिन उस चार्जशीट में UAPA के प्रावधान शामिल नहीं किए गए। एजेंसी ने हालांकि अदालत को बताया कि UAPA से जुड़े पहलुओं पर आगे की जांच जारी है।यही पहलू बाद में डिफॉल्ट जमानत की मांग का प्रमुख आधार बना।मैथ्यू वैनडाइक के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया था कि UAPA के तहत जांच पूरी करने के लिए उपलब्ध वैधानिक अवधि समाप्त होने के बावजूद उस कानून के तहत पूर्ण चार्जशीट दाखिल नहीं की गई।
वैनडाइक को मिली थी डिफॉल्ट जमानत
18 सितंबर को विशेष NIA अदालत ने मैथ्यू वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। अदालत ने कहा था कि NIA की ओर से दाखिल चार्जशीट केवल Immigration and Foreigners Act की धाराओं तक सीमित थी, जबकि UAPA से संबंधित जांच जारी बताई गई थी। कोर्ट ने इसे उस चरण पर अधूरी या ‘piecemeal’ चार्जशीट माना।अदालत ने कहा था कि जांच एजेंसी अधूरी चार्जशीट दाखिल कर BNSS की धारा 187(3) के तहत मिलने वाले डिफॉल्ट जमानत के अधिकार को दरकिनार नहीं कर सकती।वैनडाइक को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और शुरुआत में इतनी ही राशि की जमानत की शर्त पर राहत दी गई थी। बाद में उनकी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने एक लाख रुपये का कैश बॉन्ड स्वीकार करने की अनुमति दी।
छह यूक्रेनी नागरिकों को भी मिली जमानत
वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत मिलने के बाद छह यूक्रेनी नागरिकों ने भी समान आधार पर राहत मांगी। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने समानता के सिद्धांत पर उनकी अर्जियों को स्वीकार करते हुए डिफॉल्ट जमानत दे दी।छह यूक्रेनी नागरिकों से संबंधित Immigration and Foreigners Act के अपराध FRRO के समक्ष जुर्माना जमा करने के बाद कंपाउंड किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रत्येक ने 5.5 लाख रुपये का जुर्माना दिया और अदालत ने रिहाई के लिए एक लाख रुपये का कैश बॉन्ड निर्धारित किया।जमानत देते समय अदालत ने उन पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध भी लगाए थे। इनमें अदालत की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर नहीं जाने जैसी शर्त शामिल थी।
पासपोर्ट जारी करने का रास्ता साफ
विदेश यात्रा की अनुमति के लिए पासपोर्ट उपलब्ध होना आवश्यक था। इसी कारण अदालत के समक्ष दायर अर्जियों में पासपोर्ट जारी करने की अनुमति भी मांगी गई थी।गुरुवार के आदेश के बाद निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने पर सातों विदेशी नागरिक अपने पासपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे और कोर्ट द्वारा स्वीकृत अवधि के दौरान विदेश यात्रा कर पाएंगे।हालांकि उन्हें अदालत की ओर से तय यात्रा अवधि और अन्य शर्तों का पालन करना होगा। यात्रा पूरी होने के बाद मामले की जांच और अदालती कार्यवाही के लिए उनकी उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी।
NIA की आगे की जांच जारी
विदेश यात्रा की अनुमति और डिफॉल्ट जमानत मिलने के बावजूद मामले का व्यापक NIA जांच वाला हिस्सा समाप्त नहीं हुआ है। एजेंसी पहले अदालत को बता चुकी है कि UAPA के तहत लगाए गए शुरुआती आरोपों से संबंधित तथ्यों की आगे जांच की जा रही है।ऐसे में अदालत का मौजूदा आदेश मुख्य रूप से सातों विदेशी नागरिकों की सीमित अवधि की विदेश यात्रा से संबंधित है। इसे NIA द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।राउज एवेन्यू की विशेष NIA अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच की जरूरतों के बीच संतुलन रखते हुए मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए परिवारों से मिलने की अनुमति दी है। अब सातों को विदेश जाने से पहले अदालत की ओर से निर्धारित सभी शर्तों और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करना होगा।