नई दिल्ली। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए देशव्यापी ऑनलाइन नागरिक याचिका शुरू की। कांग्रेस की युवा इकाई ने इस अभियान को ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ नाम दिया है। संगठन का कहना है कि इस पहल के जरिए वह चुनावी पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े अपने सवालों को सोशल मीडिया से आगे ले जाकर देशव्यापी अभियान का रूप देना चाहता है।यूथ कांग्रेस ने देश के नागरिकों और खास तौर पर युवाओं से इस ऑनलाइन याचिका से जुड़ने की अपील की है। संगठन का कहना है कि अभियान को कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, युवा संगठनों और अलग-अलग समुदायों तक पहुंचाया जाएगा। IYC इसे केवल ऑनलाइन अभियान तक सीमित रखने के बजाय व्यापक जनभागीदारी वाली मुहिम में बदलने की बात कह रही है।

‘ज्ञानेश इट्स डन ब्रो’ नाम से अभियान

IYC की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ अभियान का उद्देश्य चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को सोशल मीडिया की बहस तक सीमित नहीं रहने देना है। संगठन चाहता है कि युवा और अन्य नागरिक इस मुद्दे पर अपनी भागीदारी दर्ज कराएं।यूथ कांग्रेस ने कहा कि जब नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा करने वाली संवैधानिक संस्था के कामकाज को लेकर सवाल उठते हैं तो पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की जा सकती है। यह यूथ कांग्रेस का राजनीतिक रुख है।

पांच प्रमुख मांगें रखीं

ऑनलाइन नागरिक याचिका में यूथ कांग्रेस ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त पद से हटाने की मांग शामिल है। संगठन ने उनकी गिरफ्तारी और अभियोजन की भी मांग की है। इसके अलावा पूरी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से संबंधित प्रक्रियाओं की व्यापक जांच कराने की मांग की गई है।अभियान में राजनीतिक संबंधों को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच और चुनाव आयोग के चुनावी रिकॉर्ड तथा आंतरिक आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है। ये IYC की मांगें और आरोप हैं; इनके आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी स्थापित नहीं होती और ऐसे निष्कर्ष सक्षम जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विवाद

इस राजनीतिक विवाद को नया आधार से मिला। रिपोर्ट में कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराई थीं।रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन जैसे विषयों से था। कुछ आपत्तियां स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR की प्रक्रिया से भी संबंधित थीं।रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ निर्णयों और आदेशों के बारे में उन्हें जानकारी नहीं होने की बात रिकॉर्ड पर रखी थी। इन्हीं रिपोर्टों के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर अपना विरोध तेज किया है।

चुनाव आयोग ने दिया जवाब

इस विवाद में चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया है। आयोग का कहना है कि लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और प्रारंभिक चरण में अलग-अलग विचार एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, SIR समेत अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।इसलिए यूथ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के साथ चुनाव आयोग के इस पक्ष को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामने आई रिपोर्ट आंतरिक आपत्तियों की बात करती है, जबकि आयोग अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मति से लिया गया बताता है।

युवाओं को अभियान से जोड़ने की तैयारी

IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि संगठन इस अभियान को केवल ऑनलाइन याचिका तक सीमित नहीं रखेगा। उनके मुताबिक, इसे कैंपस, कॉलेज, विश्वविद्यालय, युवा संगठनों और समुदायों तक पहुंचाने की योजना है। संगठन देश के अलग-अलग हिस्सों में युवाओं को अभियान से जोड़ना चाहता है।IYC के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और चुनाव आयोग जनता की संस्था है। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर सियासत तेज

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष के कई नेताओं ने रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों का हवाला देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने कहा है कि अंतिम फैसले निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त संधू और जोशी की आपत्तियों में फॉर्म-6, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटाबेस की व्यवस्था जैसे विषय शामिल थे। चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और 2023 के कानून के तहत आयोग के कामकाज में यथासंभव सर्वसम्मति का प्रावधान है; मतभेद होने पर बहुमत की राय लागू होती है।

ऑनलाइन याचिका से बड़े आंदोलन की तैयारी

यूथ कांग्रेस का कहना है कि वह ऑनलाइन याचिका पर देशभर से नागरिकों के हस्ताक्षर जुटाने के साथ लोगों को अपनी चिंताएं साझा करने और अभियान से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी। संगठन ने इसे चुनावी जवाबदेही को लेकर व्यापक आंदोलन में बदलने की घोषणा की है।फिलहाल ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ अभियान ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यूथ कांग्रेस जहां CEC को हटाने सहित कई मांगें उठा रही है, वहीं चुनाव आयोग आंतरिक विचार-विमर्श को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताते हुए कह रहा है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ऐसे में मतदाता सूची और आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

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