Delhi दिल्ली: जड़ित मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने संसद में चुनाव सुधारों और सर्वेक्षण सूचना रिपोर्ट (SIR) पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष की लापरवाही पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दो दिन सत्ता पक्ष की गैर-जिम्मेदारी की वजह से बर्बाद हो गए, जबकि ये दिन बर्बाद नहीं होने चाहिए थे। महुआ माजी ने बताया कि संसद के हर सदस्य अपने क्षेत्र और जनता से जुड़े सवाल लेकर आते हैं। ऐसे में अगर चर्चा तीन बजे के बाद शुरू हुई, तो इसका स्वागत किया जा सकता है, लेकिन इसे पहले से ही बेहतर ढंग से आयोजित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “हम चुनाव सुधारों, SIR और संबंधित मुद्दों पर गंभीर रूप से चर्चा करेंगे, ताकि लोकतंत्र की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और प्रभावी सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।”
सांसद ने यह भी जोर दिया कि चुनाव सुधार सिर्फ विधायी सुधार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके पीछे नागरिकों की सहभागिता, मतदान की पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। महुआ माजी ने कहा कि संसद में समय का सदुपयोग होना चाहिए, ताकि सदस्य लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभा सकें। उन्होंने उल्लेख किया कि संसद में केवल विधायी प्रस्तावों की चर्चा नहीं, बल्कि नागरिकों के हित में सक्रिय और प्रभावी कार्यवाही भी महत्वपूर्ण है। महुआ माजी ने कहा कि JMM हमेशा लोकतंत्र की मजबूत नींव, स्वतंत्र निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव सुधारों के पक्ष में रही है।
सांसद ने सरकार और सत्ता पक्ष से आग्रह किया कि भविष्य में किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा को व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से आयोजित किया जाए, ताकि संसदीय प्रक्रिया में सभी सदस्य समान रूप से शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव सुधारों और SIR पर चर्चा से राजनीतिक पारदर्शिता, नागरिक विश्वास और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
महुआ माजी की इस टिप्पणी के बाद संसदीय हलकों में चुनाव सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने और SIR की समीक्षा को लेकर बहस की संभावना बढ़ गई है। उनके अनुसार, इस चर्चा में सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों के मुद्दों और निर्वाचन सुधारों पर सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इस अवसर पर सांसद ने यह स्पष्ट किया कि JMM के दृष्टिकोण से समान अवसर, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा हर चर्चा का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद में समय का सही उपयोग और मुद्दों पर प्रभावी बहस ही लोकतंत्र के सशक्तीकरण और चुनाव सुधारों की दिशा में ठोस कदम साबित होगी।
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