दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला खदान आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। सोनिया गांधी ने कहा कि इस मामले में मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट उनकी ईमानदारी और जवाबदेही को साबित करती है। उन्होंने दावा किया कि मनमोहन सिंह का सार्वजनिक जीवन और प्रधानमंत्री के तौर पर उनका रिकॉर्ड मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज के तरीके से बिल्कुल अलग रहा है। सोनिया गांधी ने कहा कि इतिहास मनमोहन सिंह को एक शांत, सौम्य और प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में से एक के रूप में याद करेगा।
सोनिया गांधी ने अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित एक लेख में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 29 जुलाई 2026 भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन था, हालांकि इस फैसले पर सार्वजनिक चर्चा अपेक्षाकृत कम हुई। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर मनमोहन सिंह को मिली राहत को बरकरार रखा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि शीर्ष अदालत ने निचली अदालत द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और तत्कालीन प्रधानमंत्री के खिलाफ बिना पर्याप्त आधार के की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को भी गलत माना। सोनिया गांधी के अनुसार, इस फैसले के साथ मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रहे इस मामले का औपचारिक अध्याय समाप्त हो गया है।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबे समय तक एक सुनियोजित और समन्वित अभियान चलाया गया। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में नौकरशाही, मीडिया, न्यायपालिका, कुछ नागरिक संगठनों के साथ-साथ आरएसएस और बीजेपी से जुड़े लोग भी शामिल थे। उन्होंने मनमोहन सिंह को असाधारण ईमानदारी और शुचिता वाला व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों ने उनके सार्वजनिक जीवन की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की।
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राज्यसभा में 2017 में मनमोहन सिंह को लेकर दिए गए प्रधानमंत्री मोदी के ‘रेनकोट पहनकर नहाने’ वाले बयान का उल्लेख करते हुए इसे संसदीय इतिहास के बेहद निचले स्तर की टिप्पणी बताया। सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक नेताओं पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। इन आरोपों पर केंद्र सरकार या बीजेपी की ओर से इस लेख के संदर्भ में प्रतिक्रिया का उल्लेख यहां नहीं है।
सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री के रूप में 10 साल के कार्यकाल का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के दौरान भारत में कई महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक बदलाव हुए। उनके मुताबिक, उस दौर में निजी निवेश और उपभोग को बढ़ावा मिला तथा भारत ने वैश्विक आर्थिक संकट के दौरान भी अपनी अर्थव्यवस्था को संभाला।
उन्होंने दावा किया कि मनमोहन सिंह सरकार के 10 वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर, जीडीपी की गणना की पद्धति में बदलाव को ध्यान में रखने के बावजूद, उसके पहले के 12 वर्षों की तुलना में अधिक रही। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उस दौर में आर्थिक विकास के साथ बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर आए।
सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार की कई योजनाओं और नीतियों का भी उल्लेख किया। इनमें शिक्षा का अधिकार कानून, उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल में नागरिक संगठनों और छात्रों को सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने और विरोध प्रदर्शन करने की पर्याप्त स्वतंत्रता थी।
उन्होंने मनमोहन सिंह की मीडिया और संसद के प्रति जवाबदेही का भी उल्लेख किया। सोनिया गांधी के अनुसार, प्रधानमंत्री के रूप में सिंह ने 100 से अधिक बिना पूर्व निर्धारित सवालों वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह संसद और मीडिया के प्रति जवाबदेह रहने में विश्वास रखते थे।
सोनिया गांधी ने लेख में यह भी कहा कि अफसोस है कि मनमोहन सिंह खुद सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को देखने के लिए मौजूद नहीं हैं। मनमोहन सिंह का 27 दिसंबर 2024 को निधन हो गया था। सोनिया गांधी ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन और प्रधानमंत्री के रूप में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में याद करेंगी।
कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रहा मामला औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। इस फैसले को कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री की छवि के लिए महत्वपूर्ण माना है। वहीं सोनिया गांधी ने इसे मनमोहन सिंह की ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में उनकी विश्वसनीयता की पुष्टि के तौर पर पेश किया है।
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