दिल्ली में शराब बुकिंग ऐप बंद, AAP के आरोपों पर भाजपा का पलटवार
शराब बुकिंग ऐप पर दिल्ली में सियासी घमासान
नई दिल्ली: राजधानी में शराब की ऑनलाइन बुकिंग के लिए तैयार किए गए मोबाइल ऐप को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। आप ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार पर शराब खरीदने की सुविधा बढ़ाने का आरोप लगाया है। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि ऐप विकसित करने की प्रक्रिया पिछली आप सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इस विवाद के बीच दैनिक जागरण की रिपोर्ट में प्रशासन द्वारा ऐप तत्काल प्रभाव से बंद किए जाने की सूचना दी गई है। हालांकि, रिपोर्ट में बंद करने के औपचारिक आदेश का विवरण नहीं दिया गया है। मामला दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम यानी डीएसआईआईडीसी के ‘दिल्ली लिकर बुकिंग’ ऐप से जुड़ा है। इसके माध्यम से ग्राहक संबंधित दुकानों पर उपलब्ध शराब का स्टॉक देख सकते थे और अग्रिम बुकिंग के साथ डिजिटल भुगतान कर सकते थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था में शराब की होम डिलीवरी शामिल नहीं है। ग्राहक को अपनी खरीद संबंधित दुकान से स्वयं लेनी होती है।
आप ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस सुविधा का विरोध करते हुए सरकार को इसे वापस लेने के लिए 24 घंटे का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग नहीं माने जाने पर पार्टी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार शराब खरीदने वालों को कतार से बचाने की चिंता कर रही है, जबकि अस्पतालों में दवाइयों, बच्चों की किताबों और समय पर एंबुलेंस जैसी जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। आप ने इस मुद्दे को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर निशाना साधा। पार्टी के आधिकारिक बयान में भी योजना वापस लेने और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। ये सरकार के कामकाज को लेकर आप के राजनीतिक आरोप हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी ऐप के मुद्दे पर भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पहले आप की शराब नीति का विरोध करती थी और अब शराब की उपलब्धता आसान बना रही है। उनके बयान में घर-घर शराब पहुंचाने का आरोप भी शामिल था। हालांकि, निगम की ओर से जारी विवरण के मुताबिक मौजूदा सुविधा केवल ऑनलाइन बुकिंग और दुकान से खरीद लेने तक सीमित है।
निगम ने जारी की योजना की समयरेखा
विवाद बढ़ने के बाद डीएसआईआईडीसी ने ऐप के विकास और संचालन से संबंधित स्थिति स्पष्ट की। निगम के मुताबिक, ऐप विकसित करने की मंजूरी उसके प्रबंधन ने 13 दिसंबर, 2024 को दी थी। उस समय दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी। इसके बाद दो जनवरी, 2025 को विकास कार्य का आदेश जारी किया गया। अधिकारियों के अनुसार, ऐप नवंबर, 2025 में शुरू किया गया था। आईओएस उपयोगकर्ताओं और विभिन्न प्लेटफॉर्म से पहुंच उपलब्ध कराने के लिए छह सितंबर, 2026 को क्यूआर कोड आधारित माइक्रोसाइट की सुविधा जोड़ी गई। इस समयरेखा में विकास की मंजूरी, कार्यादेश और वास्तविक संचालन अलग-अलग चरण हैं। इसलिए इन्हें एक ही तारीख को ऐप शुरू होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
भाजपा ने पिछली सरकार को घेरा
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने आप के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस ऐप का विरोध किया जा रहा है, उसकी प्रक्रिया पिछली सरकार में शुरू हुई थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने इसे बढ़ावा नहीं दिया और इसका दायरा भी नहीं बढ़ाया। कपूर ने ऐप के माध्यम से हुई सीमित बुकिंग का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने इसका प्रचार नहीं किया। दूसरी ओर, आप ने पिछली सरकार द्वारा इस पहल को मंजूरी दिए जाने के दावे को चुनौती दी है और सतर्कता जांच की मांग की है। इससे विवाद अब ऐप की उपयोगिता के साथ उसकी प्रशासनिक मंजूरी की जिम्मेदारी पर भी केंद्रित हो गया है। Amar Ujala Hindi News Live
208 दुकानों से जुड़ी थी बुकिंग सुविधा
अधिकारियों के मुताबिक, व्यवस्था डीएसआईआईडीसी की 208 खुदरा दुकानों से जुड़ी थी। ग्राहक उपलब्ध ब्रांड और मात्रा देखकर भुगतान कर सकते थे। बुकिंग के बाद चुनी हुई दुकान से 48 घंटे के भीतर खरीद लेनी होती थी। अधिकारियों ने इसका उद्देश्य दुकानों के बाहर कतारें कम करना और बिक्री तथा भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाना बताया।
निगम के स्थिति नोट पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर, 2025 से मार्च, 2026 के बीच ऐप से 3,629 लेन-देन हुए, जिनकी राशि 12.93 लाख रुपये थी। अप्रैल, 2026 से स्थिति नोट जारी होने तक 10,730 अतिरिक्त लेन-देन में 29.90 लाख रुपये की बुकिंग हुई। निगम ने कहा कि मौजूदा सरकार ने कतारें घटाने और व्यवस्था संभालने में उपयोगिता के कारण ऐप में हस्तक्षेप नहीं किया था। अब ऐप बंद किए जाने की सूचना के बाद उसके संचालन की स्थिति पर स्पष्ट प्रशासनिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। बुधवार शाम तक इसके गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होने की रिपोर्ट थी, जबकि गुरुवार सुबह प्रकाशित खबर में बंद किए जाने की बात सामने आई। राजनीतिक दलों के दावों के बीच बुकिंग सुविधा, होम डिलीवरी और योजना की मंजूरी से जुड़े तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।