नई दिल्ली : एअर इंडिया की एक फ्लाइट में उड़ान के दौरान कई तकनीकी दिक्कतें सामने आने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में लो प्रेशर की स्थिति से लेकर ऑटो-पायलट के फेल होने तक कई तकनीकी समस्याएं दर्ज की गईं। एक के बाद एक सामने आई इन परेशानियों ने उड़ान की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में लो प्रेशर
विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके जरिए विमान के कई अहम नियंत्रण और संचालन संबंधी सिस्टम काम करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उड़ान के दौरान तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में लो प्रेशर की समस्या सामने आई। तीनों सिस्टम में एक साथ दबाव कम होना तकनीकी रूप से गंभीर स्थिति मानी जाती है। ऐसी स्थिति में विमान के संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
ऑटो-पायलट भी हुआ फेल
हाइड्रोलिक सिस्टम में समस्या के बाद ऑटो-पायलट से जुड़ी खराबी की जानकारी भी सामने आई। ऑटो-पायलट विमान को निर्धारित मार्ग और ऊंचाई बनाए रखने में पायलटों की सहायता करता है। इसके काम न करने पर पायलटों को विमान का नियंत्रण अधिक सक्रिय रूप से संभालना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कॉकपिट क्रू को विमान की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए मैनुअल तरीके से उड़ान संचालित करनी पड़ सकती है।
पायलटों के सामने बढ़ी चुनौती
एक ही उड़ान में कई तकनीकी संकेत मिलने के बाद पायलटों को स्थिति का आकलन कर आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ा। विमान संचालन में ऐसी परिस्थितियों के लिए पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और विमान में मौजूद बैकअप सिस्टम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीकी घटनाओं के बाद विमान की जांच और संबंधित सिस्टम की विस्तृत समीक्षा की जाती है, ताकि समस्या के कारणों का पता लगाया जा सके।
क्या हुआ इसकी जांच अहम
हाइड्रोलिक सिस्टम और ऑटो-पायलट से जुड़ी समस्याओं की एक साथ रिपोर्ट सामने आने के बाद घटना के तकनीकी कारणों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञ विमान के डेटा, कॉकपिट रिकॉर्ड और मेंटेनेंस हिस्ट्री का विश्लेषण कर यह पता लगा सकते हैं कि समस्याएं किस क्रम में सामने आईं और उनका आपस में कोई संबंध था या नहीं। एयरलाइन और संबंधित विमानन सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद ही घटना की पूरी तकनीकी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
Tags: