नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक स्तर पर महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र की उच्च-स्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड-19 महामारी से मिले सबक को भविष्य के लिए मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों, निरंतर निवेश और बेहतर संस्थागत क्षमताओं में बदलना जरूरी है।संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 'महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया' विषय पर आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए श्रीवास्तव ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने महामारी जैसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों और सरकार एवं समाज के स्तर पर अपनाए गए समन्वित दृष्टिकोण की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने अपने संबोधन में कोविड-19 महामारी के अनुभवों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महामारी से दुनिया को कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं और अब जरूरत है कि इन अनुभवों को दीर्घकालिक तैयारियों में बदला जाए। इसके लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार निवेश, संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना और ऐसी स्वास्थ्य प्रणालियां विकसित करना आवश्यक है जो भविष्य में संभावित आपात स्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।उन्होंने स्पष्ट किया कि महामारी की तैयारी केवल किसी एक बीमारी या संक्रमण तक सीमित नहीं हो सकती। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियां अलग-अलग रूपों में सामने आ सकती हैं। इसलिए ऐसी व्यापक व्यवस्था की जरूरत है जो विभिन्न प्रकार की संभावित स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम हो।
श्रीवास्तव ने बैठक के दौरान भारत के समन्वित दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए बताया कि महामारी की रोकथाम और प्रतिक्रिया में सरकार के साथ समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। बड़े स्तर पर पैदा होने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की किसी एक संस्था या विभाग के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए अलग-अलग स्तरों पर समन्वय और व्यापक भागीदारी की आवश्यकता होती है।
भारत ने इस मंच के जरिए वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को भी प्रमुखता से सामने रखा। स्वास्थ्य आपात स्थितियों का प्रभाव किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, इसलिए इनके खिलाफ तैयारियों में देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया।कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया के सामने स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत व्यवस्थाओं और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आई थीं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इसी अनुभव को भविष्य की तैयारियों का आधार बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि महामारी से मिली सीख को केवल अनुभव तक सीमित रखने के बजाय उसे स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
श्रीवास्तव ने निरंतर निवेश को भी महामारी से निपटने की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए लंबे समय तक संसाधनों और संस्थागत क्षमता पर ध्यान देने की जरूरत होती है। महामारी समाप्त होने के बाद तैयारियों में कमी आने के बजाय उन्हें लगातार मजबूत करना भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जरूरी है।संयुक्त राष्ट्र की उच्च-स्तरीय बैठक में भारत की ओर से प्रस्तुत दृष्टिकोण में महामारी की रोकथाम को भी प्रमुख स्थान दिया गया। किसी स्वास्थ्य संकट के सामने आने के बाद केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से ऐसी क्षमता तैयार करने पर जोर दिया गया, जिससे संभावित खतरों की पहचान और उनसे निपटने की तैयारी बेहतर हो सके।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों को महामारी की तैयारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। किसी भी बड़े स्वास्थ्य संकट के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था पर अचानक दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में संस्थागत क्षमताओं का मजबूत होना और अलग-अलग स्तरों पर समन्वय प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो जाता हैबैठक के दौरान भारत ने यह भी रेखांकित किया कि महामारी से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों की भागीदारी आवश्यक है। व्यापक स्वास्थ्य संकट का सामना करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों के साथ अन्य संबंधित व्यवस्थाओं और समुदायों के बीच समन्वय की जरूरत होती है।
श्रीवास्तव ने भारत के दृष्टिकोण को बताते हुए कई तरह की संभावित स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जो अलग-अलग परिस्थितियों में समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया दे सके।अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता भी बैठक में प्रमुख रूप से सामने आई। वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना साझा प्रयासों के जरिए करने पर जोर दिया गया। महामारी जैसी परिस्थितियों में देशों के बीच सहयोग स्वास्थ्य प्रणालियों की तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत की ओर से कहा गया कि कोविड-19 से मिली सीख को भविष्य की नीतियों और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हिस्सा बनाना आवश्यक है। इसके लिए केवल तत्काल उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लंबे समय तक स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और संस्थागत ढांचे को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है।महामारी की रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए भारत के समन्वित दृष्टिकोण में स्वास्थ्य सुरक्षा को व्यापक रूप में देखा गया है। संभावित आपात स्थितियों के लिए पहले से तैयार रहना, संस्थागत क्षमता विकसित करना और स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करना इस दृष्टिकोण के प्रमुख पहलुओं के रूप में सामने आए।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई उच्च-स्तरीय बैठक ने विभिन्न देशों को महामारी से मिले अनुभवों और भविष्य की तैयारियों पर अपनी बात रखने का मंच दिया। भारत की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और दीर्घकालिक तैयारियों की आवश्यकता को रेखांकित किया।कुल मिलाकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से संदेश दिया कि कोविड-19 महामारी से मिले सबक को भूलने के बजाय उन्हें भविष्य की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनाया जाना चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने निरंतर निवेश, मजबूत संस्थागत क्षमता और सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि महामारी की रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए सरकार, समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच प्रभावी समन्वय महत्वपूर्ण है।
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